Saturday, November 29, 2025

दांत दर्द या मुंह की बदबू

 

 दांत दर्द या मुंह की बदबू का आसान उपाय

● दन्त व मुख समस्या से ग्रस्त व्यक्ति का जीवन काफी कष्टमय रहता है, उसे कुछ भी अछा नहीं लगता आपको ये दन्त मंजन उस व्यक्ति के जीवन मे नवीन रस भर देगा….!

बड़ी इलायची के बीज-10 ग्राम
लवंग-10 ग्राम
दाल चीनी-10 ग्राम
काली मिर्च-10 ग्राम
नौसादर -10 ग्राम
भुनी हुयी फिटकरी-10 ग्राम
काला नमक -30 ग्राम
माजूफल -10 ग्राम

इन सबको कूट पीस कर ले और अंत में कपूर की टिक्की पीश कर इसमें मिक्स करके छान कर एक सीसी जिसमे हवा प्रवेश न कर सके रख ले अगर किसी को दांत में ठंडा या गर्म लग रहा हो या फिर दांत में दर्द हो या मुख से बदबू आती हो तो दिन में २ बार दन्त मंजन करने से कुछ ही दिन में ठीक हो जायेगा तथा किसी दवा की आवश्यकता नहीं होगी।

सर्दियों में हाथों की देखभाल के घरेलु उपाय

 

 सर्दियों में हाथों की देखभाल के घरेलु उपाय

जैतून का तेल और चीनी
जैतून का तेल त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होता है. यदि सर्दियों में आपके हाथ भी अजीब और फटे फटे से रहते है तो 3 चम्मच जैतून के तेल में 2 चम्मच चीनी डालिये और इन्हें अच्छे से मिलाइये. मिलाने के बाद इस तेल से अपने हाथो की मालिश कीजिये! मालिश के 15 मिनट बाद इन्हें लगे रहने दे. बाद में गुनगुने पानी से अपने हाथों को साफ़ कर लें. इससे आपके हाथों की पुरानी चमक वापस आ जाएगी!

बेसन और नींबू का रस
जहाँ एक ओर बेसन स्क्रबिंग के लिए मशहूर है वही दूसरी ओर नींबू त्वचा की रंगत निखारने में मदद करता है. सर्दियों में अपने हाथों की वास्तविक सुंदरता वापस लाने के लिए आप सी उपाय का प्रयोग कर सकती है. इसके लिए 1 चम्मच बेसन, 1 चम्मच दूध की मलाई और 1 चम्मच नींबू का रस लें और इन सभी को मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट बना लें. अब इस मिश्रण से अपने हाथों को अच्छे से मलें. जब ये सूखने लगे इसे रगड़ते हुए साफ़ कर दे. इसके बाद हाथों को ठन्डे पानी से धो कर उनपर थोड़ा सा जैतून का तेल लगा लें. इससे आपके हाथो की खोई नमी वापस आ जाएगी!

गुलाबजल और ग्लिसरीन
इसके अतिरिक्त एक और उपाय है जिसकी मदद से आप पाने हाथों की खोयी खूबसूरती को वापस पा सकती है. इसके लिये 4 चम्मच गुलाबजल, 3 चम्मच ग्लिसरीन और माध्यम आकार के 2 नींबू का रस एक साथ मिला लीजिये. अब इस मिश्रण को किसी बोतल में भरकर सुखी और ठंडी जगह पर रखे. जब भी बाहर जाएँ तो इससे अपने हाथों की मालिश करें. इसके अलावा रात को सोने से पहले भी अपने हाथो की इस मिश्रण से मालिश करें. सर्दियों में हाथों को मुलायम और अच्छा बनाने का ये एक बेहतर उपाय है!

दूध की मलाई
दूध और उसकी मलाई त्वचा के लिए बहुत लाभकारी होती है. इसमें मौजूद तत्व आपकी स्किन को nourish करके उसे सुन्दर बनाने में मदद करते है. सर्दियों में यदि आपके हाथ भी फटे-फटे से रहते है तो दूध की मलाई का प्रयोग करके देखे. इसके लिए रात को सोने से पूर्व हाथों पर दूध की मलाई में नींबू का रस मिलाकर उसे अपने हाथों पर लगाएं. इसके कुछ देर बाद रुई की मदद से इसे साफ़ कर लें. नियमित रूप से इस उपाय का प्रयोग करने से आपके हाथों की खोई चमक वापस आ जाएगी!

बादाम तेल
ये तेल भी त्वचा के लिए बहुत लाभकारी होता है. सर्दियों में हाथ अपनी वास्तविक नमी खो देते है जिससे वे रूखे और बेजान प्रतीत होते है. यदि आपके साथ भी यही समस्या है तो रोजाना रात सोने से पहले बादाम रोगन तेल से हाथों की मालिश करें. इससे उनमे चमक भी आएगी और वे सुन्दर भी दिखेंगे!

नींबू या आलू का छिलका
चूँकि नींबू में citric acid पाया जाता है इसीलिए ये त्वचा की रंगत निखारने में मदद करता है. इसके अलावा त्वचा के कालेपन को दूर करने के लिए भी ये एक अच्छा उपाय है. अक्सर सर्दियों में हाथों का रंग काला हो जाता है यदि आपके साथ भी यही समस्या है तो नींबू के छिलके को हाथों पर रगड़े. ऐसा करने से हाथों का रंग भी हल्का होगा और उनपर पड़े दाग़-धब्बे भी समाप्त हो जायेंगे. नींबू के स्थान पर आप आलू का भी प्रयोग कर सकती है!

चन्दन का पाउडर
दूध, गुलाबजल और चन्दन के पाउडर के मिश्रण से भी अपने हाथों की खोयी चमक को वापस पाया जा सकता है. इसके लिए इन तीनो पदार्थो को एक साथ मिलाकर एक पेस्ट तैयार कर लें. अब इसे अपने हाथों पर लगाएं. आधा घंटे रखने के बाद इसे साफ़ पानी से धो ले. इससे आपके हाथों का कालापन दूर होगा और वे मुलायम और सुन्दर बनेंगे!

शहद
त्वचा से लेकर स्वास्थ्य सभी में शहद बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यदि आपके हाथ भी सर्दियों में बेजान और रूखे हो जाते है तो इससे छुटकारा पाने के लिए ये एक अच्छा उपाय है. इसके लिए शहद और नींबू के रस की समान मात्रा मिलाकर उन्हें अच्छे से मिला लें. अब इस मिश्रण से अपने हाथों की मालिश करें. बाद में साफ़ पानी से धो लें. आपके हाथ पहले से कहीं अधिक सुन्दर और मुलायम हो जायेंगे!🙏

 

कुछ घरेलू उपाय:-

आंवला-
किसी भी रूप में थोड़ा सा आंवला हर रोज़ खाते रहे,
जीवन भर उच्च रक्तचाप और हार्ट फेल नहीं होगा, मुररबा हो तो पानी से धुलकर खांना, वात पित्त कफ त्रिदोष संतुलित कर्ता है

मेथी दाना:-
मेथीदाना पीसकर रख ले,रात काँच के गिलास में डाल दे, और गर्म पानी भर दे, इंसमे त्रिफला भी डाल सकते है, सुबह पीना है, कफ और वात नाशक है ,इस से आंव नहीं बनेगी, शुगर कंट्रोल रहेगी और जोड़ो के दर्द नहीं होंगे और पेट ठीक रहेगा, रक्त साफ होगा एव पतला भी

नेत्र स्नान:-
मुंह में पानी का कुल्ला भर कर नेत्र धोये ,ऐसा दिन में तीन बार करे।, जब भी पानी के पास जाए,,मुंह में पानी का कुल्ला भर ले, और नेत्रों पर पानी के छींटे मारे, धोये, मुंह का पानी गर्म ना हो इसलिएबार बार कुल्ला नया भरते रहे।
इससे आरोग्य शक्ति बढ़ती हैं, नेत्र ज्योति ठीक रहती हैं।

 सरसों का तेल:-
सर्दियों में हल्का गर्म सरसों तेल और गर्मियों में ठंडा सरसों तेल तीन बूँद दोनों कान में कभी कभी डालते रहे।
इस से कान स्वस्थ रहेंगे।

निद्रा:-
दिन में जब भी विश्राम करे तो दाहिनी करवट ले कर सोएं। और रात में बायीं करवट ले कर सोये।
दाहिनी करवट लेने से बायां स्वर अर्थात चन्द्र नाड़ी चलेगी, और बायीं करवट लेने से दाहिना स्वर अर्थात सूर्य स्वर चलेगा। 

ताम्बे का पानी:-
रात को ताम्बे के बर्तन में रखा पानी सुबह उठते बिना कुल्ला किये ही पिए, निरंतर ऐसा करने से आप कई रोगो से बचे रहेंगे। ताम्बे के बर्तन में रखा जल, गंगा जल से भी अधिक शक्तिशाली माना गया हैं।

सौंठ:-
सामान्य बुखार, फ्लू, जुकाम और कफ से बचने के लिए पिसी हुयी आधा चम्मच सौंठ और ज़रा सा गुड एक गिलास पानी में इतना उबाले के आधा पानी रह जाए।
रात को सोने से पहले यह पिए।
बदलते मौसम, सर्दी व वर्षा के ,आरम्भ में यह पीना रोगो से बचाता हैं। सौंठ नहीं हो तो अदरक का
इस्तेमाल कीजिये।

टाइफाइड:-
चुटकी भर दालचीनी की फंकी चाहे अकेले ही, चाहे शहद के साथ दिन में दो बार लेने से टाइफाईड नहीं होता।

नाक:-
रात को सोते समय नित्य सरसों का तेल नाक में लगाये।
हर तीसरे दिन दो कली लहसुन रात को भोजन के साथ ले। प्रात: दस तुलसी के पत्ते और पांच काली मिर्च नित्य चबाये।
सर्दी, बुखार, श्वांस रोग नहीं होगा ,नाक स्वस्थ रहेगी।

मालिश:-
स्नान करने से आधा घंटा पहले सर के ऊपरी हिस्से में सरसों के तेल से मालिश करेइस से सर हल्का रहेगा, मस्तिष्क ताज़ा रहेगा।
रात को सोने से पहले पैर के तलवो, नाभि, कान के पीछे और गर्दन पर सरसों के तेल की मालिश कर के सोएं।
निद्रा अच्छी आएगी,मानसिक तनाव दूर होगा।त्वचा मुलायम रहेगी।
सप्ताह में एक दिन पूरे शरीर में मालिश ज़रूर करे।

हरड़
हर रोज़ एक छोटी हरड़ भोजन के बाद दाँतो तले रखे और इसका रस धीरे धीरे पेट में जाने दे। जब काफी देर बाद ये हरड़ बिलकुल नरम पड़ जाए तो चबा चबा कर निगल ले, इस से आपके बाल कभी
सफ़ेद नहीं होंगे, दांत 100 वर्ष तक निरोगी रहेंगे और पेट के रोग नहीं होंगे 

 

घरेलू उपचार

पेट दर्द 
* पोदीना, जीरा, हींग, कालीमिर्च और नमक डालकर, चटनी की तरह पीस लें । मात्रा भी चटनी जैसी ही लेनी है । इसको एक गिलास पानी में उबालकर पीने से , पेट दर्द व अपच में  लाभ होता है ।

* यदि , बच्चे के पेट में  दर्द हो तो, बेसन को पानी में , गूँठकर, गर्म करके पेट पर मल दें।

* मूंग के बराबर हींग को, गूड़ में लपेटकर, गर्म पानी से सेवन करें । गैस का पेट दर्द ठीक हो जाता है । 
* हींग को , थोडे़ से पानी में घोलकर नाभि के आसपास लेप करें । 

* हींग को , शुद्ध घी में , हल्की आंच पर भूनकर, चूर्ण बना लें। थोड़ा सा ( आधा चम्मच )  चूर्ण, एक गिलास  पानी में घोलकर, पीने से तुरंत लाभ होता है । 

* बच्चे के पेट में , दर्द होने पर, हाथ-पैर पटकता हो और बार-बार हाथ पेट की ओर ले जाता है ।मूंग के दाल बराबर हींग, मां के दूध में घोलकर पीला दें और पेट की सिकाई करें । इसके बाद राई व हींग को पीसकर, नाभि के आसपास लगाएं। बच्चे को आराम मिलता है ।

* हींग को गर्म पानी में घोलकर, नाभि के आसपास लेप करें तथा भूनी हिंग आधा ग्राम किसी भी चीज के साथ सेवन करें ।

* 2 ग्राम हींग को आधा किलो पानी में उबालें , जब पानी आधा रह जाएं तो, गर्म -गर्म सेवन करें । 

* भूनी हींग, जीरा, सौठ व सेंधा नमक मिलाकर, चौथाई चम्मच, गर्म पानी के साथ फंकी लें।

* पिसा धनिया और मिश्री पिसी हुई, पानी में घोलकर सेवन करें । 
* पेट दर्द में , दो इलायची पीसकर, शहद में मिलाकर, चाटने से लाभ होता है ।

* बच्चों के पेट में , दर्द होने पर, एक गिलास पानी में , दो चम्मच सौंफ उबाले। आधा पानी रहने पर, स्वादानुसार शहद मिलाकर सेवन करें । यदि रह-रहकर दर्द उठता हो तो, पोदीने का रस, चार चम्मच और एक चम्मच शहद मिलाकर,  सेवन कराएं। 

Sunday, November 23, 2025

कायाकल्प त्रिफला

 त्रिफला:-

त्रिफला का अनुपात :- 1:2:3=1(हरड )+2(बहेड़ा )+3(आंवला )

मतलब जैसे आपको 120 ग्राम त्रिफ़ला बनाना है तो :: 20 ग्राम हरड+40 ग्राम बहेडा+60 ग्राम आंवला लेवे |


त्रिफला से कायाकल्प:-


हमारे यहाँ वर्ष भर में छ: ऋतुएँ होती है,प्रत्येक ऋतू में दो दो मास होते है


शिशिर ऋतू में ( 14 जनवरी से 13 मार्च) 5 ग्राम त्रिफला को आठवां भाग छोटी पीपल का चूर्ण मिलाकर सेवन करें।


बसंत ऋतू में (14 मार्च से 13 मई) 5 ग्राम त्रिफला को बराबर का शहद मिलाकर सेवन करें।


ग्रीष्म ऋतू में (14 मई से 13 जुलाई ) 5 ग्राम त्रिफला को चोथा भाग गुड़ मिलाकर सेवन करें।


वर्षा ऋतू में (14 जुलाई से 13 सितम्बर) 5 ग्राम त्रिफला को छठा भाग सैंधा नमक मिलाकर सेवन करें।


शरद ऋतू में(14 सितम्बर से 13 नवम्बर) 5 ग्राम त्रिफला को चोथा भाग देशी खांड/शक्कर मिलाकर सेवन करें।


हेमंत ऋतू में (14 नवम्बर से 13 जनवरी) 5 ग्राम त्रिफला को छठा भाग सौंठ का चूर्ण मिलाकर सेवन करें।

इस तरह इसका सेवन लगातार 11 वर्ष तक सेवन करने से 100% कायाकल्प हो जाएगा


एक वर्ष तक नियमित सेवन करने से शरीर चुस्त होता है।


दो वर्ष तक नियमित सेवन करने से शरीर निरोगी हो जाता हैं।


तीन वर्ष तक नियमित सेवन करने से नेत्र-ज्योति बढ जाती है।


चार वर्ष तक नियमित सेवन करने से त्वचा कोमल व सुंदर हो जाती है।


पांच वर्ष तक नियमित सेवन करने से बुद्धि का विकास होकर कुशाग्र हो जाती है।

छः वर्ष तक नियमित सेवन करने से शरीर शक्ति में पर्याप्त वृद्धि होती है।


सात वर्ष तक नियमित सेवन करने से बाल फिर से सफ़ेद से काले हो जाते हैं।


आठ वर्ष तक नियमित सेवन करने से वर्ध्दाव्स्था से पुन: योवन लोट आता है।


नौ वर्ष तक नियमित सेवन करने से नेत्र-ज्योति कुशाग्र हो जाती है और शुक्ष्म से शुक्ष्म वस्तु भी आसानी से दिखाई देने लगती हैं।


दस वर्ष तक नियमित सेवन करने से वाणी मधुर हो जाती है यानी गले में सरस्वती का वास हो जाता है।

रूसी, फ्यास डेंड्रफ का सफल इलाज

 रूसी:-

आमतौर पर इसे फ्यास डेंड्रफ भी कहते है, ये बालो, मुछो, दाढ़ी में भी होता है

लाभ:-

सिर के फोड़े फुंसी में

सिर के सोराइसिस में

सिर के डेंड्रफ में

उपाय:-

-सुहागा की खिल 1 चम्मच

-नारियल तेल 1 चम्मच

-दही 1 चम्मच

-नीम्बू रस 3 चम्मच

- बालों का आयुर्वेदिक तेल


सुहागे को कड़ाही में डालकर खिल बनाये, फिर इसे पीस लें


सबको मिलाकर पेस्ट बनाएं, बालो पर लगाये, 45 मिनट बाद नीम्बू के रस, संतरा के रस या दही या मुल्तानी मिट्टी से धुलें


इसके बाद बालों का आयुर्बेदिक तेल लगाये

बाजार का साबुन, शैम्पू बन्द करें। 🙏

यह डिटॉक्स पीकर बीमारियां निकालें बॉडी से बाहर

 यह डिटॉक्स पीकर बीमारियां निकालें बॉडी से बाहर:-


बात चाहे वजन कम करने की हो या फिर ग्लोइंग स्किन की, दोनों के लिए ही बॉडी को डिटॉक्स करना बेहद जरुरी है। सर्दियों में वैसे भी पसीना न आने के कारण हमारे शरीर में एंटी-ऑक्सीडेंट तत्व गर्मियों के मुकाबले ज्यादा बढ़ जाते हैं, ऐसे में जरुरी ही अच्छे खान-पान के जरिए अपनी बॉडी को डिटॉक्स किया जाए। 

सामाग्री-

-आंवला - 50 ग्राम

-अदरक का रस - 20 ग्राम

-नींबू -  1

-शहद या शुद्ध गुड पुराना - 2 टीस्पून

-काली मिर्च - 1/2 टीस्पून

-पानी - 1 गिलास


बनाने का तरीका

-250 ग्राम आंवले के बीज निकालकर इसे पानी के साथ ब्लेंडर में अच्छे से ब्लेंड करें।

-उसके बाद इस जूस को छलनी की मदद से छान लें।

छानने के बाद इसमें अदरक का रस, नींबू और काली मिर्च डालकर अच्छे से मिक्स करें।

-उसके बाद पीने के वक्त शहद या शुद्ध गुड पुराना मिलाएं।


ड्रिंक पीने का सही वक्त

अगर आप इस डिटॉक्स ड्रिंक को सुबह के वक्त पीते हैं, तो आपको ढेरों लाभ मिलते हैं।


लाभ:-


आपकी स्किन और बाल दोनों के लिए फायदेमंद है

पाचन को दुरुस्त करने और बीमारियों से शरीर को बचाने के लिए , सर्दी-जुकाम संबंधित बहुत कम परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

आपके इम्यून सिस्टम को स्ट्रांग बनाने में मदद करती है।

सर्दी-जुकाम जैसी समस्याओं से दूर रखने में मदद करते हैं।🙏

ढीलापन व पूरी कड़क न होना

ढीलापन व पूरी कड़क न होना लंबे समय से तनाव कम रहना, जल्दी ढीलापन, टाइमिंग की कमी, अल्प उत्तेजना जैसी समस्या हो तो यह पारंपरिक संयोजन बेहद लाभकारी माना गया है। एक बार के बाद दुबारा तैयार न होना


🔥 रोग संकेत: जननेन्द्रिय में अल्प तनाव

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🌿 नुस्खा सामग्री (100% आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ)


1. मूसली सफेद – 35gm 

2. मूसली काली – 55gm 

3. बहेमन लाल – 37gm 

4. बहेमन सफेद – 37gm 

5. सालम पंजा – 52gm 

6. सालम मिश्री – 32gm 

7. शुद्ध कोंच बीज – 35gm 

8. बीज बंद – 45gm 

9. पीला सतावर – 32gm 

10. अश्वगंधा – 30gm 

11. उंटगन बीज – 25gm 

12. सालम गट्टा – 20gm 

13. रूमी मस्तगी – 25gm 

14. अकरकरा – 25gm 

15. सिंघाड़ा गिरी – 25gm 

16. विधारी कंद – 35gm 

17. जायफल – 25gm 

18. छोटी इलायची – 25gm 

19. लौंग – 25gm 

20. जावत्री – 30 gm 


🧪 बनाने की विधि

✔ सभी औषधियों को कूट-पीसकर बारीक चूर्ण बना लें।

✔ प्रतिदिन रात को सोते समय 1 चम्मच चूर्ण + 1 गिलास गुनगुना दूध लें।

✔ बिल्कुल पुरानी वैद्य परंपरा वाला असर — धीरे-धीरे शक्ति, तनाव और स्थिरता में सुधार।

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⚠ परहेज़

❌ खटाई

❌ चाट-पकौड़ी

❌ चावल

(पुराने जमाने से ये परहेज़ इस नुस्खे में बेहद ज़रूरी माने गए हैं)

कामशक्ति केशरी

कामशक्ति केशरी – प्राचीन बाजीकरण का अद्भुत चमत्कारी योग ⭐

(नपुंसकता, कमजोरी, कामेच्छा की कमी – सबका परम्परागत इलाज)  योग

👇 हर द्रव्य वही, जो सदियों से बल–वीर्य–ओज बढ़ाने में श्रेष्ठ माना गया है—

स्वर्ण भस्म — 250 मिग्रा

नाग भस्म (100 पुटी) — 1 ग्राम

हीरा भस्म — 250 मिग्रा

कज्जली — 1 ग्राम

माणिक्य भस्म — 250 मिग्रा

रजत भस्म — 1 ग्राम

पन्ना भस्म — 250 मिग्रा

अभ्रकभस्म (1000 पुटी) — 1 ग्राम

बैक्रांत पिष्टी — 250 मिग्रा

तालमखाना चूर्ण — 3 ग्राम

सालबमिश्री चूर्ण — 3 ग्राम

सोंठ चूर्ण — 3 ग्राम

लौंग चूर्ण — 3 ग्राम

जायफल चूर्ण — 3 ग्राम

केशर चूर्ण — 3 ग्राम

जावित्री चूर्ण — 3 ग्राम

भांग बीज चूर्ण — 3 ग्राम

कौंच बीज चूर्ण — 3 ग्राम

दालचीनी चूर्ण — 3 ग्राम

तेजपात चूर्ण — 3 ग्राम

छोटी इलायची चूर्ण — 3 ग्राम

अकरकरा चूर्ण — 3 ग्राम

सफेद जीरा चूर्ण — 3 ग्राम

खुरासानी अजवायन चूर्ण — 3 ग्राम

पीपल चूर्ण — 3 ग्राम

रूमी मस्तगी — 3 ग्राम

शुद्ध वत्सनाभ — 3 ग्राम

मालकांगनी चूर्ण — 3 ग्राम

शुद्ध धतूर बीज चूर्ण — 3 ग्राम

सफेद मूसली चूर्ण — 3 ग्राम

शुद्ध शिलाजीत — 3 ग्राम

ला॰ बहमन चूर्ण — 3 ग्राम

कस्तूरी असली — 1 ग्राम

⚗ निर्माण विधि (Traditional Method)

सबसे पहले कस्तूरी को शंखपुष्पी या शतावरी के 250 ml स्वरस में घोलें।

फिर सभी द्रव्यों को एक साथ खरल में लंबा घोंटें और 125 mg की गोलियाँ बना लें।

(जितना घोंटन, उतनी शक्ति—ये पुरानी परंपरा है!)

🕉 मात्रा एवं सेवन

प्रातः–सायं 1–1 गोली

मधु के साथ चटाकर गुनगुना दूध पियें।

🚀 गुण / Benefits

यह योग—

✔ उत्तम कामशक्ति-वर्धक

✔ नपुंसकता नाशक

✔ वीर्यशक्ति, धैर्य, ऊर्जा और ओज को बढ़ाने में अत्यंत प्रभावी

अत्यधिक गंभीर नपुंसकता में—

👉 कामशक्ति केशरी + वसंतकुसुमाकर रस + पौरुषदाता (1–1 गोली)

👉 भोजन के बाद अश्वगंधारिष्ट

👉 और बाह्य प्रयोग हेतु संजीवनी बाजीकरण क्रीम

यह संयोजन पुरानों का आजमाया हुआ अचूक उपाय है।

GURV.

दांत दर्द या मुंह की बदबू

   दांत दर्द या मुंह की बदबू का आसान उपाय ● दन्त व मुख समस्या से ग्रस्त व्यक्ति का जीवन काफी कष्टमय रहता है, उसे कुछ भी अछा नहीं लगता आपको य...