Saturday, November 29, 2025

दांत दर्द या मुंह की बदबू

 

 दांत दर्द या मुंह की बदबू का आसान उपाय

● दन्त व मुख समस्या से ग्रस्त व्यक्ति का जीवन काफी कष्टमय रहता है, उसे कुछ भी अछा नहीं लगता आपको ये दन्त मंजन उस व्यक्ति के जीवन मे नवीन रस भर देगा….!

बड़ी इलायची के बीज-10 ग्राम
लवंग-10 ग्राम
दाल चीनी-10 ग्राम
काली मिर्च-10 ग्राम
नौसादर -10 ग्राम
भुनी हुयी फिटकरी-10 ग्राम
काला नमक -30 ग्राम
माजूफल -10 ग्राम

इन सबको कूट पीस कर ले और अंत में कपूर की टिक्की पीश कर इसमें मिक्स करके छान कर एक सीसी जिसमे हवा प्रवेश न कर सके रख ले अगर किसी को दांत में ठंडा या गर्म लग रहा हो या फिर दांत में दर्द हो या मुख से बदबू आती हो तो दिन में २ बार दन्त मंजन करने से कुछ ही दिन में ठीक हो जायेगा तथा किसी दवा की आवश्यकता नहीं होगी।

सर्दियों में हाथों की देखभाल के घरेलु उपाय

 

 सर्दियों में हाथों की देखभाल के घरेलु उपाय

जैतून का तेल और चीनी
जैतून का तेल त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होता है. यदि सर्दियों में आपके हाथ भी अजीब और फटे फटे से रहते है तो 3 चम्मच जैतून के तेल में 2 चम्मच चीनी डालिये और इन्हें अच्छे से मिलाइये. मिलाने के बाद इस तेल से अपने हाथो की मालिश कीजिये! मालिश के 15 मिनट बाद इन्हें लगे रहने दे. बाद में गुनगुने पानी से अपने हाथों को साफ़ कर लें. इससे आपके हाथों की पुरानी चमक वापस आ जाएगी!

बेसन और नींबू का रस
जहाँ एक ओर बेसन स्क्रबिंग के लिए मशहूर है वही दूसरी ओर नींबू त्वचा की रंगत निखारने में मदद करता है. सर्दियों में अपने हाथों की वास्तविक सुंदरता वापस लाने के लिए आप सी उपाय का प्रयोग कर सकती है. इसके लिए 1 चम्मच बेसन, 1 चम्मच दूध की मलाई और 1 चम्मच नींबू का रस लें और इन सभी को मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट बना लें. अब इस मिश्रण से अपने हाथों को अच्छे से मलें. जब ये सूखने लगे इसे रगड़ते हुए साफ़ कर दे. इसके बाद हाथों को ठन्डे पानी से धो कर उनपर थोड़ा सा जैतून का तेल लगा लें. इससे आपके हाथो की खोई नमी वापस आ जाएगी!

गुलाबजल और ग्लिसरीन
इसके अतिरिक्त एक और उपाय है जिसकी मदद से आप पाने हाथों की खोयी खूबसूरती को वापस पा सकती है. इसके लिये 4 चम्मच गुलाबजल, 3 चम्मच ग्लिसरीन और माध्यम आकार के 2 नींबू का रस एक साथ मिला लीजिये. अब इस मिश्रण को किसी बोतल में भरकर सुखी और ठंडी जगह पर रखे. जब भी बाहर जाएँ तो इससे अपने हाथों की मालिश करें. इसके अलावा रात को सोने से पहले भी अपने हाथो की इस मिश्रण से मालिश करें. सर्दियों में हाथों को मुलायम और अच्छा बनाने का ये एक बेहतर उपाय है!

दूध की मलाई
दूध और उसकी मलाई त्वचा के लिए बहुत लाभकारी होती है. इसमें मौजूद तत्व आपकी स्किन को nourish करके उसे सुन्दर बनाने में मदद करते है. सर्दियों में यदि आपके हाथ भी फटे-फटे से रहते है तो दूध की मलाई का प्रयोग करके देखे. इसके लिए रात को सोने से पूर्व हाथों पर दूध की मलाई में नींबू का रस मिलाकर उसे अपने हाथों पर लगाएं. इसके कुछ देर बाद रुई की मदद से इसे साफ़ कर लें. नियमित रूप से इस उपाय का प्रयोग करने से आपके हाथों की खोई चमक वापस आ जाएगी!

बादाम तेल
ये तेल भी त्वचा के लिए बहुत लाभकारी होता है. सर्दियों में हाथ अपनी वास्तविक नमी खो देते है जिससे वे रूखे और बेजान प्रतीत होते है. यदि आपके साथ भी यही समस्या है तो रोजाना रात सोने से पहले बादाम रोगन तेल से हाथों की मालिश करें. इससे उनमे चमक भी आएगी और वे सुन्दर भी दिखेंगे!

नींबू या आलू का छिलका
चूँकि नींबू में citric acid पाया जाता है इसीलिए ये त्वचा की रंगत निखारने में मदद करता है. इसके अलावा त्वचा के कालेपन को दूर करने के लिए भी ये एक अच्छा उपाय है. अक्सर सर्दियों में हाथों का रंग काला हो जाता है यदि आपके साथ भी यही समस्या है तो नींबू के छिलके को हाथों पर रगड़े. ऐसा करने से हाथों का रंग भी हल्का होगा और उनपर पड़े दाग़-धब्बे भी समाप्त हो जायेंगे. नींबू के स्थान पर आप आलू का भी प्रयोग कर सकती है!

चन्दन का पाउडर
दूध, गुलाबजल और चन्दन के पाउडर के मिश्रण से भी अपने हाथों की खोयी चमक को वापस पाया जा सकता है. इसके लिए इन तीनो पदार्थो को एक साथ मिलाकर एक पेस्ट तैयार कर लें. अब इसे अपने हाथों पर लगाएं. आधा घंटे रखने के बाद इसे साफ़ पानी से धो ले. इससे आपके हाथों का कालापन दूर होगा और वे मुलायम और सुन्दर बनेंगे!

शहद
त्वचा से लेकर स्वास्थ्य सभी में शहद बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यदि आपके हाथ भी सर्दियों में बेजान और रूखे हो जाते है तो इससे छुटकारा पाने के लिए ये एक अच्छा उपाय है. इसके लिए शहद और नींबू के रस की समान मात्रा मिलाकर उन्हें अच्छे से मिला लें. अब इस मिश्रण से अपने हाथों की मालिश करें. बाद में साफ़ पानी से धो लें. आपके हाथ पहले से कहीं अधिक सुन्दर और मुलायम हो जायेंगे!🙏

 

कुछ घरेलू उपाय:-

आंवला-
किसी भी रूप में थोड़ा सा आंवला हर रोज़ खाते रहे,
जीवन भर उच्च रक्तचाप और हार्ट फेल नहीं होगा, मुररबा हो तो पानी से धुलकर खांना, वात पित्त कफ त्रिदोष संतुलित कर्ता है

मेथी दाना:-
मेथीदाना पीसकर रख ले,रात काँच के गिलास में डाल दे, और गर्म पानी भर दे, इंसमे त्रिफला भी डाल सकते है, सुबह पीना है, कफ और वात नाशक है ,इस से आंव नहीं बनेगी, शुगर कंट्रोल रहेगी और जोड़ो के दर्द नहीं होंगे और पेट ठीक रहेगा, रक्त साफ होगा एव पतला भी

नेत्र स्नान:-
मुंह में पानी का कुल्ला भर कर नेत्र धोये ,ऐसा दिन में तीन बार करे।, जब भी पानी के पास जाए,,मुंह में पानी का कुल्ला भर ले, और नेत्रों पर पानी के छींटे मारे, धोये, मुंह का पानी गर्म ना हो इसलिएबार बार कुल्ला नया भरते रहे।
इससे आरोग्य शक्ति बढ़ती हैं, नेत्र ज्योति ठीक रहती हैं।

 सरसों का तेल:-
सर्दियों में हल्का गर्म सरसों तेल और गर्मियों में ठंडा सरसों तेल तीन बूँद दोनों कान में कभी कभी डालते रहे।
इस से कान स्वस्थ रहेंगे।

निद्रा:-
दिन में जब भी विश्राम करे तो दाहिनी करवट ले कर सोएं। और रात में बायीं करवट ले कर सोये।
दाहिनी करवट लेने से बायां स्वर अर्थात चन्द्र नाड़ी चलेगी, और बायीं करवट लेने से दाहिना स्वर अर्थात सूर्य स्वर चलेगा। 

ताम्बे का पानी:-
रात को ताम्बे के बर्तन में रखा पानी सुबह उठते बिना कुल्ला किये ही पिए, निरंतर ऐसा करने से आप कई रोगो से बचे रहेंगे। ताम्बे के बर्तन में रखा जल, गंगा जल से भी अधिक शक्तिशाली माना गया हैं।

सौंठ:-
सामान्य बुखार, फ्लू, जुकाम और कफ से बचने के लिए पिसी हुयी आधा चम्मच सौंठ और ज़रा सा गुड एक गिलास पानी में इतना उबाले के आधा पानी रह जाए।
रात को सोने से पहले यह पिए।
बदलते मौसम, सर्दी व वर्षा के ,आरम्भ में यह पीना रोगो से बचाता हैं। सौंठ नहीं हो तो अदरक का
इस्तेमाल कीजिये।

टाइफाइड:-
चुटकी भर दालचीनी की फंकी चाहे अकेले ही, चाहे शहद के साथ दिन में दो बार लेने से टाइफाईड नहीं होता।

नाक:-
रात को सोते समय नित्य सरसों का तेल नाक में लगाये।
हर तीसरे दिन दो कली लहसुन रात को भोजन के साथ ले। प्रात: दस तुलसी के पत्ते और पांच काली मिर्च नित्य चबाये।
सर्दी, बुखार, श्वांस रोग नहीं होगा ,नाक स्वस्थ रहेगी।

मालिश:-
स्नान करने से आधा घंटा पहले सर के ऊपरी हिस्से में सरसों के तेल से मालिश करेइस से सर हल्का रहेगा, मस्तिष्क ताज़ा रहेगा।
रात को सोने से पहले पैर के तलवो, नाभि, कान के पीछे और गर्दन पर सरसों के तेल की मालिश कर के सोएं।
निद्रा अच्छी आएगी,मानसिक तनाव दूर होगा।त्वचा मुलायम रहेगी।
सप्ताह में एक दिन पूरे शरीर में मालिश ज़रूर करे।

हरड़
हर रोज़ एक छोटी हरड़ भोजन के बाद दाँतो तले रखे और इसका रस धीरे धीरे पेट में जाने दे। जब काफी देर बाद ये हरड़ बिलकुल नरम पड़ जाए तो चबा चबा कर निगल ले, इस से आपके बाल कभी
सफ़ेद नहीं होंगे, दांत 100 वर्ष तक निरोगी रहेंगे और पेट के रोग नहीं होंगे 

 

घरेलू उपचार

पेट दर्द 
* पोदीना, जीरा, हींग, कालीमिर्च और नमक डालकर, चटनी की तरह पीस लें । मात्रा भी चटनी जैसी ही लेनी है । इसको एक गिलास पानी में उबालकर पीने से , पेट दर्द व अपच में  लाभ होता है ।

* यदि , बच्चे के पेट में  दर्द हो तो, बेसन को पानी में , गूँठकर, गर्म करके पेट पर मल दें।

* मूंग के बराबर हींग को, गूड़ में लपेटकर, गर्म पानी से सेवन करें । गैस का पेट दर्द ठीक हो जाता है । 
* हींग को , थोडे़ से पानी में घोलकर नाभि के आसपास लेप करें । 

* हींग को , शुद्ध घी में , हल्की आंच पर भूनकर, चूर्ण बना लें। थोड़ा सा ( आधा चम्मच )  चूर्ण, एक गिलास  पानी में घोलकर, पीने से तुरंत लाभ होता है । 

* बच्चे के पेट में , दर्द होने पर, हाथ-पैर पटकता हो और बार-बार हाथ पेट की ओर ले जाता है ।मूंग के दाल बराबर हींग, मां के दूध में घोलकर पीला दें और पेट की सिकाई करें । इसके बाद राई व हींग को पीसकर, नाभि के आसपास लगाएं। बच्चे को आराम मिलता है ।

* हींग को गर्म पानी में घोलकर, नाभि के आसपास लेप करें तथा भूनी हिंग आधा ग्राम किसी भी चीज के साथ सेवन करें ।

* 2 ग्राम हींग को आधा किलो पानी में उबालें , जब पानी आधा रह जाएं तो, गर्म -गर्म सेवन करें । 

* भूनी हींग, जीरा, सौठ व सेंधा नमक मिलाकर, चौथाई चम्मच, गर्म पानी के साथ फंकी लें।

* पिसा धनिया और मिश्री पिसी हुई, पानी में घोलकर सेवन करें । 
* पेट दर्द में , दो इलायची पीसकर, शहद में मिलाकर, चाटने से लाभ होता है ।

* बच्चों के पेट में , दर्द होने पर, एक गिलास पानी में , दो चम्मच सौंफ उबाले। आधा पानी रहने पर, स्वादानुसार शहद मिलाकर सेवन करें । यदि रह-रहकर दर्द उठता हो तो, पोदीने का रस, चार चम्मच और एक चम्मच शहद मिलाकर,  सेवन कराएं। 

Sunday, November 23, 2025

कायाकल्प त्रिफला

 त्रिफला:-

त्रिफला का अनुपात :- 1:2:3=1(हरड )+2(बहेड़ा )+3(आंवला )

मतलब जैसे आपको 120 ग्राम त्रिफ़ला बनाना है तो :: 20 ग्राम हरड+40 ग्राम बहेडा+60 ग्राम आंवला लेवे |


त्रिफला से कायाकल्प:-


हमारे यहाँ वर्ष भर में छ: ऋतुएँ होती है,प्रत्येक ऋतू में दो दो मास होते है


शिशिर ऋतू में ( 14 जनवरी से 13 मार्च) 5 ग्राम त्रिफला को आठवां भाग छोटी पीपल का चूर्ण मिलाकर सेवन करें।


बसंत ऋतू में (14 मार्च से 13 मई) 5 ग्राम त्रिफला को बराबर का शहद मिलाकर सेवन करें।


ग्रीष्म ऋतू में (14 मई से 13 जुलाई ) 5 ग्राम त्रिफला को चोथा भाग गुड़ मिलाकर सेवन करें।


वर्षा ऋतू में (14 जुलाई से 13 सितम्बर) 5 ग्राम त्रिफला को छठा भाग सैंधा नमक मिलाकर सेवन करें।


शरद ऋतू में(14 सितम्बर से 13 नवम्बर) 5 ग्राम त्रिफला को चोथा भाग देशी खांड/शक्कर मिलाकर सेवन करें।


हेमंत ऋतू में (14 नवम्बर से 13 जनवरी) 5 ग्राम त्रिफला को छठा भाग सौंठ का चूर्ण मिलाकर सेवन करें।

इस तरह इसका सेवन लगातार 11 वर्ष तक सेवन करने से 100% कायाकल्प हो जाएगा


एक वर्ष तक नियमित सेवन करने से शरीर चुस्त होता है।


दो वर्ष तक नियमित सेवन करने से शरीर निरोगी हो जाता हैं।


तीन वर्ष तक नियमित सेवन करने से नेत्र-ज्योति बढ जाती है।


चार वर्ष तक नियमित सेवन करने से त्वचा कोमल व सुंदर हो जाती है।


पांच वर्ष तक नियमित सेवन करने से बुद्धि का विकास होकर कुशाग्र हो जाती है।

छः वर्ष तक नियमित सेवन करने से शरीर शक्ति में पर्याप्त वृद्धि होती है।


सात वर्ष तक नियमित सेवन करने से बाल फिर से सफ़ेद से काले हो जाते हैं।


आठ वर्ष तक नियमित सेवन करने से वर्ध्दाव्स्था से पुन: योवन लोट आता है।


नौ वर्ष तक नियमित सेवन करने से नेत्र-ज्योति कुशाग्र हो जाती है और शुक्ष्म से शुक्ष्म वस्तु भी आसानी से दिखाई देने लगती हैं।


दस वर्ष तक नियमित सेवन करने से वाणी मधुर हो जाती है यानी गले में सरस्वती का वास हो जाता है।

रूसी, फ्यास डेंड्रफ का सफल इलाज

 रूसी:-

आमतौर पर इसे फ्यास डेंड्रफ भी कहते है, ये बालो, मुछो, दाढ़ी में भी होता है

लाभ:-

सिर के फोड़े फुंसी में

सिर के सोराइसिस में

सिर के डेंड्रफ में

उपाय:-

-सुहागा की खिल 1 चम्मच

-नारियल तेल 1 चम्मच

-दही 1 चम्मच

-नीम्बू रस 3 चम्मच

- बालों का आयुर्वेदिक तेल


सुहागे को कड़ाही में डालकर खिल बनाये, फिर इसे पीस लें


सबको मिलाकर पेस्ट बनाएं, बालो पर लगाये, 45 मिनट बाद नीम्बू के रस, संतरा के रस या दही या मुल्तानी मिट्टी से धुलें


इसके बाद बालों का आयुर्बेदिक तेल लगाये

बाजार का साबुन, शैम्पू बन्द करें। 🙏

यह डिटॉक्स पीकर बीमारियां निकालें बॉडी से बाहर

 यह डिटॉक्स पीकर बीमारियां निकालें बॉडी से बाहर:-


बात चाहे वजन कम करने की हो या फिर ग्लोइंग स्किन की, दोनों के लिए ही बॉडी को डिटॉक्स करना बेहद जरुरी है। सर्दियों में वैसे भी पसीना न आने के कारण हमारे शरीर में एंटी-ऑक्सीडेंट तत्व गर्मियों के मुकाबले ज्यादा बढ़ जाते हैं, ऐसे में जरुरी ही अच्छे खान-पान के जरिए अपनी बॉडी को डिटॉक्स किया जाए। 

सामाग्री-

-आंवला - 50 ग्राम

-अदरक का रस - 20 ग्राम

-नींबू -  1

-शहद या शुद्ध गुड पुराना - 2 टीस्पून

-काली मिर्च - 1/2 टीस्पून

-पानी - 1 गिलास


बनाने का तरीका

-250 ग्राम आंवले के बीज निकालकर इसे पानी के साथ ब्लेंडर में अच्छे से ब्लेंड करें।

-उसके बाद इस जूस को छलनी की मदद से छान लें।

छानने के बाद इसमें अदरक का रस, नींबू और काली मिर्च डालकर अच्छे से मिक्स करें।

-उसके बाद पीने के वक्त शहद या शुद्ध गुड पुराना मिलाएं।


ड्रिंक पीने का सही वक्त

अगर आप इस डिटॉक्स ड्रिंक को सुबह के वक्त पीते हैं, तो आपको ढेरों लाभ मिलते हैं।


लाभ:-


आपकी स्किन और बाल दोनों के लिए फायदेमंद है

पाचन को दुरुस्त करने और बीमारियों से शरीर को बचाने के लिए , सर्दी-जुकाम संबंधित बहुत कम परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

आपके इम्यून सिस्टम को स्ट्रांग बनाने में मदद करती है।

सर्दी-जुकाम जैसी समस्याओं से दूर रखने में मदद करते हैं।🙏

ढीलापन व पूरी कड़क न होना

ढीलापन व पूरी कड़क न होना लंबे समय से तनाव कम रहना, जल्दी ढीलापन, टाइमिंग की कमी, अल्प उत्तेजना जैसी समस्या हो तो यह पारंपरिक संयोजन बेहद लाभकारी माना गया है। एक बार के बाद दुबारा तैयार न होना


🔥 रोग संकेत: जननेन्द्रिय में अल्प तनाव

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🌿 नुस्खा सामग्री (100% आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ)


1. मूसली सफेद – 35gm 

2. मूसली काली – 55gm 

3. बहेमन लाल – 37gm 

4. बहेमन सफेद – 37gm 

5. सालम पंजा – 52gm 

6. सालम मिश्री – 32gm 

7. शुद्ध कोंच बीज – 35gm 

8. बीज बंद – 45gm 

9. पीला सतावर – 32gm 

10. अश्वगंधा – 30gm 

11. उंटगन बीज – 25gm 

12. सालम गट्टा – 20gm 

13. रूमी मस्तगी – 25gm 

14. अकरकरा – 25gm 

15. सिंघाड़ा गिरी – 25gm 

16. विधारी कंद – 35gm 

17. जायफल – 25gm 

18. छोटी इलायची – 25gm 

19. लौंग – 25gm 

20. जावत्री – 30 gm 


🧪 बनाने की विधि

✔ सभी औषधियों को कूट-पीसकर बारीक चूर्ण बना लें।

✔ प्रतिदिन रात को सोते समय 1 चम्मच चूर्ण + 1 गिलास गुनगुना दूध लें।

✔ बिल्कुल पुरानी वैद्य परंपरा वाला असर — धीरे-धीरे शक्ति, तनाव और स्थिरता में सुधार।

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⚠ परहेज़

❌ खटाई

❌ चाट-पकौड़ी

❌ चावल

(पुराने जमाने से ये परहेज़ इस नुस्खे में बेहद ज़रूरी माने गए हैं)

कामशक्ति केशरी

कामशक्ति केशरी – प्राचीन बाजीकरण का अद्भुत चमत्कारी योग ⭐

(नपुंसकता, कमजोरी, कामेच्छा की कमी – सबका परम्परागत इलाज)  योग

👇 हर द्रव्य वही, जो सदियों से बल–वीर्य–ओज बढ़ाने में श्रेष्ठ माना गया है—

स्वर्ण भस्म — 250 मिग्रा

नाग भस्म (100 पुटी) — 1 ग्राम

हीरा भस्म — 250 मिग्रा

कज्जली — 1 ग्राम

माणिक्य भस्म — 250 मिग्रा

रजत भस्म — 1 ग्राम

पन्ना भस्म — 250 मिग्रा

अभ्रकभस्म (1000 पुटी) — 1 ग्राम

बैक्रांत पिष्टी — 250 मिग्रा

तालमखाना चूर्ण — 3 ग्राम

सालबमिश्री चूर्ण — 3 ग्राम

सोंठ चूर्ण — 3 ग्राम

लौंग चूर्ण — 3 ग्राम

जायफल चूर्ण — 3 ग्राम

केशर चूर्ण — 3 ग्राम

जावित्री चूर्ण — 3 ग्राम

भांग बीज चूर्ण — 3 ग्राम

कौंच बीज चूर्ण — 3 ग्राम

दालचीनी चूर्ण — 3 ग्राम

तेजपात चूर्ण — 3 ग्राम

छोटी इलायची चूर्ण — 3 ग्राम

अकरकरा चूर्ण — 3 ग्राम

सफेद जीरा चूर्ण — 3 ग्राम

खुरासानी अजवायन चूर्ण — 3 ग्राम

पीपल चूर्ण — 3 ग्राम

रूमी मस्तगी — 3 ग्राम

शुद्ध वत्सनाभ — 3 ग्राम

मालकांगनी चूर्ण — 3 ग्राम

शुद्ध धतूर बीज चूर्ण — 3 ग्राम

सफेद मूसली चूर्ण — 3 ग्राम

शुद्ध शिलाजीत — 3 ग्राम

ला॰ बहमन चूर्ण — 3 ग्राम

कस्तूरी असली — 1 ग्राम

⚗ निर्माण विधि (Traditional Method)

सबसे पहले कस्तूरी को शंखपुष्पी या शतावरी के 250 ml स्वरस में घोलें।

फिर सभी द्रव्यों को एक साथ खरल में लंबा घोंटें और 125 mg की गोलियाँ बना लें।

(जितना घोंटन, उतनी शक्ति—ये पुरानी परंपरा है!)

🕉 मात्रा एवं सेवन

प्रातः–सायं 1–1 गोली

मधु के साथ चटाकर गुनगुना दूध पियें।

🚀 गुण / Benefits

यह योग—

✔ उत्तम कामशक्ति-वर्धक

✔ नपुंसकता नाशक

✔ वीर्यशक्ति, धैर्य, ऊर्जा और ओज को बढ़ाने में अत्यंत प्रभावी

अत्यधिक गंभीर नपुंसकता में—

👉 कामशक्ति केशरी + वसंतकुसुमाकर रस + पौरुषदाता (1–1 गोली)

👉 भोजन के बाद अश्वगंधारिष्ट

👉 और बाह्य प्रयोग हेतु संजीवनी बाजीकरण क्रीम

यह संयोजन पुरानों का आजमाया हुआ अचूक उपाय है।

GURV.

Sunday, September 7, 2025

कुछ रामबाण घरेलू नुक्से

 कुछ रामबाण घरेलू नुक्से

1. कान दर्द -  प्याज पीसकर उसका रस कपड़े से छान लें। फिर उसे गरम करके 4 बूंद कान में डालने से कान का दर्द समाप्त हो जाता है।

2. दांत दर्द - हल्दी एवं सेंधा नमक महीन पीसकर, उसे शुद्ध सरसों के तेल में मिलाकर सुबह-शाम मंजन करने से दांतों का दर्द बंद हो जाता है

3. दांतों के सुराख - कपूर को महीन पीसकर दांतों पर उंगली से लगाएं और उसे मलें। सुराखों को भली प्रकार साफ कर लें। फिर सुराखों के नीचे कपूर को कुछ समय तक दबाकर रखने से दांतों का दर्द निश्चित रूप से समाप्त हो जाता है। 

4. बच्चों के पेट के कीड़े - छोटे बच्चों के पेट में कीड़े हों तो सुबह एवं शाम को प्याज का रस गरम करके 1 तोला पिलाने से कीड़े अवश्य मर जाते हैं। धतूरे के पत्तों का रस निकालकर उसे गरम करके गुदा पर लगाने से चुन्ने (लघु कृमि) से आराम हो जाता है। 

5. गिल्टी का दर्द - प्याज पीसकर उसे गरम कर लें। फिर उसमें गो-मूत्र मिलाकर छोटी-सी टिकरी बना लें। उसे कपड़े के सहारे गिल्टी पर बांधने से गिल्टी का दर्द एवं गिल्टी समाप्त हो जाती है। 

6. पेट के केंचुए एवं कीड़े - 1 बड़ा चम्मच सेम के पत्तों का रस एवं शहद समभाग मिलाकर प्रात:, मध्यान्ह एवं सायं को पीने से केंचुए तथा कीड़े 4-5 दिन में मरकर बाहर निकल जाते हैं। 

7. छोटे बच्चों को उल्टी दस्त - पके हुए अनार के फल का रस कुनुकुना गरम करके प्रात:, मध्यान्ह एवं सायं को 1-1 चम्मच पिलाने से शिशु-वमन अवश्य बंद हो जाता है। 

8. कब्ज दूर करने हेतु - 1 बड़े साइज का नींबू काटकर रात्रिभर ओस में पड़ा रहने दें। फिर प्रात:काल 1 गिलास चीनी के शरबत में उस नींबू को निचोड़कर तथा शरबत में नाममात्र का काला नमक डालकर पीने से कब्ज निश्चित रूप से दूर हो जाता है।

9. आग से जल जाने पर - कच्चे आलू को पीसकर रस निकाल लें, फिर जले हुए स्थान पर उस रस को लगाने से आराम हो जाता है। इसके अतिरिक्त इमली की छाल जलाकर उसका महीन चूर्ण बना लें, उस चूर्ण को गो-घृत में मिलाकर जले हुए स्थान पर लगाने से आराम हो जाता है।

10. कान की फुंसी - लहसुन को सरसों के तेल में पकाकर, उस तेल को सुबह, दोपहर और शाम को कान में 2-2 बूंद डालने से कान के अंदर की फुंसी बह जाती है अथवा बैठ जाती है तथा दर्द समाप्त हो जाता है। 

11. कुकुर खांसी - फिटकरी को तवे पर भून लें और उसे महीन पीस लें। तत्पश्चात 3 रत्ती फिटकरी के चूर्ण में समभाग चीनी मिलाकर सुबह, दोपहर और शाम को सेवन करने से कुकुर खांसी ठीक हो जाती है। 

12. पेशाब की जलन - ताजे करेले को महीन-महीन काट लें। पुन: उसे हाथों से भली प्रकार मल दें। करेले का पानी स्टील या शीशे के पात्र में इकट्ठा करें। वही पानी 50 ग्राम की खुराक बनाकर 3 बार (सुबह, दोपहर और शाम) पीने से पेशाब की कड़क एवं जलन ठीक हो जाती है।
 
13. फोड़े - नीम की मुलायम पत्तियों को पीसकर गो-घृत में उसे पकाकर (कुछ गरम रूप में) फोड़े पर हल्के कपड़े के सहारे बांधने से भयंकर एवं पुराने तथा असाध्य फोड़े भी ठीक हो जाते हैं। 

14. सिरदर्द - सोंठ को बहुत महीन पीसकर बकरी के शुद्ध दूध में मिलाकर नाक से बार-बार खींचने से सभी प्रकार के सिरदर्द में आराम होता है।

15. पेशाब में चीनी (शकर)- जामुन की गुठली सुखाकर महीन पीस डालें और उसे महीन कपड़े से छान लें। अठन्नीभर प्रतिदिन 3 बार (सुबह, दोपहर और शाम) ताजे जल के साथ लेने से पेशाब के साथ चीनी आनी बंद हो जाती है। इसके अतिरिक्त ताजे करेले का रस 2 तोला नित्य पीने से भी उक्त रोग में लाभ होता है।

16. मस्तिष्क की कमजोरी - मेहंदी का बीज अठन्नीभर पीसकर शुद्ध शहद के साथ प्रतिदिन 3 बार (सुबह, दोपहर और शाम) सेवन करने से मस्तिष्क की कमजोरी दूर हो जाती है और स्मरण शक्ति ठीक होती है तथा सिरदर्द में भी आराम हो जाता है। 

17. अधकपारी का दर्द - 3 रत्ती कपूर तथा मलयागिरि चंदन को गुलाब जल के साथ घिसकर (गुलाब जल की मात्रा कुछ अधिक रहे) नाक के द्वारा खींचने से अधकपारी का दर्द अवश्य समाप्त हो जाता है।

18. खूनी दस्त - 2 तोला जामुन की गुठली को ताजे पानी के साथ पीस-छानकर, 4-5 दिन सुबह 1 गिलास पीने से खूनी दस्त बंद हो जाता है। इसमें चीनी या कोई अन्य पदार्थ नहीं मिलाना चाहिए। 

19. जुकाम - 1 पाव गाय का दूध गरम करके उसमें 12 दाना कालीमिर्च एवं 1 तोला मिश्री- इन दोनों को पीसकर दूध में मिलाकर सोते समय रात को पी लें। 5 दिन में जुकाम बिलकुल ठीक हो जाएगा अथवा 1 तोला मिश्री एवं 8 दाना कालीमिर्च ताजे पानी के साथ पीसकर गरम करके चाय की तरह पीयें और 5 दिन तक स्नान न करें।

20. मंदाग्नि - अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े करके नींबू के रस में डालकर और नाममात्र का सेंधा नमक मिलाकर शीशे के बर्तन में रख दें। 5-7 टुकड़े नित्य भोजन के साथ सेवन करें, मंदाग्नि दूर हो जाएगी। 

21. उदर विकार - अजवाइन, कालीमिर्च एवं सेंधा नमक- इन तीनों को एक में ही मिलाकर चूर्ण बना लें। ये तीनों बराबर मात्रा में होने चाहिए। इस चूर्ण को प्रतिदिन नियमित रूप से रात को सोते समय गरम जल के साथ सेवन करने से (मात्रा अठन्नीभर) सभी प्रकार के उदर रोग दूर हो जाते हैं।


Wednesday, August 20, 2025

नॉर्मल डेलीवेरी करवाने हेतु उपाये

नॉर्मल डेलीवेरी करवाने हेतु उपाये 

जब स्त्री को हल्का हल्का दर्द होने लगे और लगे की डेलीवेरी का समय हो चुका है उसे ये पीला दें  

नुस्खा नंबर 1  

16 बादाम 
8 मुनक्का 
8 काली मिर्च 
50 ग्राम देशी घी में फ्राई करें 
250 से 400 ग्राम में गरम गरम पिलाना है 

 

नुस्खा नंबर 1  

 

Sunday, July 20, 2025

खुद का डॉक्टर बने

 

 डॉक्टर खुद बने
1= नमक केवल सेन्धा प्रयोग करें।थायराइड, बी पी, पेट ठीक होगा।

2=कुकर स्टील का ही काम में लें। एल्युमिनियम में मिले lead से होने वाले नुकसानों से बचेंगे

3=तेल कोई भी रिफाइंड न खाकर केवल तिल, सरसों, मूंगफली, नारियल प्रयोग करें। रिफाइंड में बहुत केमिकल होते हैं जो शरीर में कई तरह की बीमारियाँ पैदा करते हैं ।

4=सोयाबीन बड़ी को 2 घण्टे भिगो कर, मसल कर ज़हरीली झाग निकल कर ही प्रयोग करें।

5= रसोई में एग्जास्ट फैन जरूरी है, प्रदूषित हवा बाहर करें।

6= काम करते समय स्वयं को अच्छा लगने वाला संगीत चलाएं।खाने में अच्छा प्रभाव आएगा और थकान कम होगी।

7= देसी गाय के घी का प्रयोग बढ़ाएं।अनेक रोग दूर होंगे, वजन नहीं बढ़ता।

8=ज्यादा से ज्यादा मीठा नीम/कढ़ी पत्ता खाने की चीजों में डालें, सभी का स्वास्थ्य ठीक करेगा।

9=ज्यादा चीजें लोहे की कढ़ाई में ही बनाएं। आयरन की कमी किसी को नहीं होगी।

10=भोजन का समय निश्चित करें, पेट ठीक रहेगा। भोजन के बीच बात न करें, भोजन ज्यादा पोषण देगा।

11=नाश्ते में अंकुरित अन्न शामिल करें। पोषक विटामिन, फाइबर मिलेंगें।

12=सुबह के खाने के साथ देशी गाय के दूध का बना ताजा दही लें, पेट ठीक रहेगा।

13=चीनी कम से कम प्रयोग करें, ज्यादा उम्र में हड्डियां ठीक रहेंगी।

14=चीनी की जगह बिना मसले का गुड़ या देशी शक्कर लें।

15= छौंक में राई के साथ कलौंजी का भी प्रयोग करें, फायदे इतने कि लिख ही नहीं सकते।

16= चाय के समय, आयुर्वेदिक पेय की आदत बनाएं व निरोग रहेंगे.

17- डस्ट बिन एक रसोई में एक बाहर रखें, सोने से पहले रसोई का कचरा बाहर के डस्ट बिन में डालें।

18- रसोई में घुसते ही नाक में घी या सरसों तेल लगाएं, सर और फेफड़े स्वस्थ रहेंगें।

19- करेले, मैथी, मूली याने कड़वी सब्जियां भी खाएँ, रक्त शुद्ध रहेगा।

20- पानी मटके वाले से ज्यादा ठंडा न पिएं, पाचन व दांत ठीक रहेंगे।

21- प्लास्टिक, एल्युमिनियम रसोई से हटाये, केन्सर कारक हैं।

22- माइक्रोवेव ओवन का प्रयोग केन्सर कारक है।

23- खाने की ठंडी चीजें कम से कम खाएँ, पेट और दांत को खराब करती हैं।

24- बाहर का खाना बहुत हानिकारक है, खाने से सम्बंधित ग्रुप से जुड़कर सब घर पर ही बनाएं।

25- तली चीजें छोड़ें, वजन, पेट, एसिडिटी ठीक रहेंगी।

26- मैदा, बेसन, छौले, राजमां, उड़द कम खाएँ, गैस की समस्या से बचेंगे।

27- अदरक, अजवायन का प्रयोग बढ़ाएं, गैस और शरीर के दर्द कम होंगे।

28- बिना कलौंजी वाला अचार हानिकारक होता है।

29- पानी का फिल्टर R O वाला हानिकारक है। U V वाला ही प्रयोग करें, सस्ता भी और बढ़िया भी।

30- रसोई में ही बहुत से कॉस्मेटिक्स हैं, इस प्रकार के ग्रुप से जानकारी लें।

31- रात को आधा चम्मच त्रिफला एक कप पानी में डाल कर रखें, सुबह कपड़े से छान कर इस जल से आंखें धोएं, चश्मा उतर जाएगा। छान कर जो पाउडर बचे उसे फिर एक गिलास पानी में डाल कर रख दें। रात को पी जाएं। पेट साफ होगा, कोई रोग एक साल में नहीं रहेगा।

32- सुबह रसोई में चप्पल न पहनें, शुद्धता भी, एक्यू प्रेशर भी।

33- रात का भिगोया आधा चम्मच कच्चा जीरा सुबह खाली पेट चबा कर वही पानी पिएं, एसिडिटी खतम।

34- एक्यूप्रेशर वाले पिरामिड प्लेटफार्म पर खड़े होकर खाना बनाने की आदत बना लें तो भी सब बीमारी शरीर से निकल जायेगी।

35- चौथाई चम्मच दालचीनी का कुल उपयोग दिन भर में किसी भी रूप में करने पर निरोगता अवश्य होगी।

36- रसोई के मसालों से बना चाय मसाला स्वास्थ्यवर्धक है।

37- सर्दियों में नाखून बराबर जावित्री कभी चूसने से सर्दी के असर से बचाव होगा।

38- सर्दी में बाहर जाते समय 2 चुटकी अजवायन मुहं में रखकर निकलिए, सर्दी से नुकसान नहीं होगा.

39. रस निकले नीबू के चौथाई टुकड़े में जरा सी हल्दी, नमक, फिटकरी रख कर दांत मलने से दांतों का कोई भी रोग नहीं रहेगा

40- कभी-कभी नमक-हल्दी में 2 बून्द सरसों का तेल डाल कर दांतों को उंगली से साफ करें, दांतों का कोई रोग टिक नहीं सकता।

41- बुखार में 1 लीटर पानी उबाल कर 250 ml कर लें, साधारण ताप पर आ जाने पर रोगी को थोड़ा थोड़ा दें, दवा का काम करेगा।

42- सुबह के खाने के साथ घर का जमाया देशी गाय के ताजा दही जरूर शामिल करें

यूरिक एसिड रोगों का घर


 यूरिक एसिड हमारे जीवन में रोगों का घर

यूरिक एसिड का बढ़ने की समस्या बडी तेजी से बढ़ रही है। आयु बढ़ने के साथ-साथ यूरिक एसिड " गाउट " आर्थराइटिस समस्या का होना तेजी से आंका गया है। जोकि लाईफ स्टाईल, खान-पान, दिनचर्या के बदलाव से भोजन पाचन प्रक्रिया के दौरान बनने वाले ग्लूकोज प्रोटीन से सीधे यूरिन एसिड में बदलने की प्रक्रिया को यूरिक एसिड कहते हैं।
 

यूरिक एसिड के लक्षण 
पैरो-जोड़ों में दर्द होना।
पैर , एडियों में दर्द रहना।
गांठों में सूजन
जोड़ों में सुबह शाम तेज दर्द कम-ज्यादा होना।
एक स्थान पर देर तक बैठने पर उठने में पैरों एड़ियों में सहनीय दर्द। फिर दर्द सामlन्य हो जाना।
पैरों, जोड़ो, उगलियों, गांठों में सूजन होना।
शर्करा लेबल बढ़ना। 
इस तरह की कोई भी समस्या होने पर तुरन्त यूरिक एसिड जांच करवायें।

 यूरिक एसिड नियत्रंण करने के तरीके
1. यूरिक एसिड बढ़ने पर हाई फाइबर युक्त आहार खायें। जिसमें पालक, ब्रोकली, ओट्स, दलिया, इसबगोल भूसी फायदेमंद हैं।
2. आंवला रस और एलोवेरा रस मिश्रण कर सुबह शाम खाने से 10 मिनट पहले पीने से यूरिक एसिड कम करने में सक्षम है।
3. टमाटर और अंगूर का जूस पीने से यूरिक एसिड तेजी से कम करने में सक्षम है।
4. तीनो वक्त खाना खाने के 5 मिनट बाद 1 चम्मच अलसी के बीज का बारीक चबाकर खाने से भोजन पाचन क्रिया में यूरिक ऐसिड नहीं बनता।
5. 1 चम्मच शहद और 1 चम्मच अश्वगन्धा पाउडर को 1 कप गर्म पानी के साथ घोल कर पीने से यूरिक एसिड नियत्रंण में आता है।
6. यूरिक एसिड बढ़ने के दौरान जैतून तेल का इस्तेमाल खाने तड़के-खाना बनाने में करें। जैतून तेल में विटामिन-ई एवं मिनरलस मौजूद हैं। जोकि यूरिक एसिड नियत्रंण करने में सहायक हैं।
7. यूरिक एसिड बढ़ने पर खाने से 15 पहले अखरोट खाने से पाचन क्रिया शर्करा को ऐमिनो एसिड नियत्रंण करती है। जोकि प्रोटीन को यूरिक एसिड़ में बदलने से रोकने में सहायक है।
8. विटामिन सी युक्त चीजें खाने में सेवन करें। विटामिन सी यूरिक एसिड को मूत्र के रास्ते विसर्ज करने में सहायक है।
9. रोज 2-3 चैरी खाने से यूरिक एसिड नियत्रंण में रखने में सक्षम है। चेरी गांठों में एसिड क्रिस्टल नहीं जमने देती।
10. सलाद में आधा नींबू निचैlड कर खायें। दिन में 3 बार 2 गिलास पानी में 1 नींबू निचैंlड कर पीने से यूरिक एसिड मूत्र के माध्यम से निकलने में सक्षम है। चीनी, मीठा न मिलायें।
11. तेजी से यूरिक एसिड घटाने के लिए रोज सुबह शाम 45-45 मिनट तेज पैदल चलकर पसीना बहायें। तेज पैदल चलने से एसिड क्रिस्टल जोड़ों गांठों पर जमने से रोकता है। साथ में रक्त संचार को तीब्र कर रक्त संचार सुचारू करने में सक्षम है। पैदल चलना से शरीर में होने वाले सैकड़ों से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है। तेज पैदल चलना एसिड एसिड को शीध्र नियत्रंण करने में सक्षम पाया गया है।
12. बाहर का खाना पूर्ण रूप से बन्द कर दें। घर पर बना सात्विक ताजा भोजन खायें। खाने में ताजे फल, हरी सब्जियां, सलाद, फाइबर युक्त संतुलित पौष्टिक आहर लें।
13. रोज योगा , आसान , व्यायाम करें। योग आसान व्यायाय यूरिक एसिड को घटाने में मद्दगार है। साथ में योगा-आसान-व्यायाम करने से मोटापा वजन नियत्रंण रहेगा।
14. ज्यादा सूजन दर्द में आराम के लिए गर्म पानी में सूती कपड़ा भिगो कर सेकन करें।
15. यूरिक एसिड समस्या शुरू होने पर तुरन्त जांच उपचार करवायें। यूरिक एसिड ज्यादा दिनों तक रहने से अन्य रोग आसानी से घर बना लेते हैं। 


 यूरिक ऐसिड बढ़ने पर खान-पान  
 यूरिक एसिड बढ़ने पर मीट मछली सेवन तुरन्त बंद कर दें। नॉनवेज खाने से यूरिक एसिड तेजी से बढ़ता है। औषधि दवाईयां असर कम करती है।

 यूरिक एसिड बढ़ने पर अण्डा का सेवन पूर्ण रूप से बंद कर दें। अण्डा रिच प्रोटीन वसा से भरपूर है। जोकि यूरिक एसिड को बढ़ता है।

बेकरी से बनी खाद्य सामग्री बंद कर दें। बेकरी फूड प्रीजरवेटिव गिला होता है। जैसेकि पेस्ट्री, केक, पैनकेक, बंन्न, क्रीम बिस्कुट इत्यादि।

यूरिक एसिड बढ़ने पर तुरन्त जंकफूड, फास्ट फूड, ठंडा सोडा पेय, तली-भुनी चीजें बन्द कर दें। जंकफूड, फास्टफूड, सोडा ठंडा पेय पाचन क्रिया को और भी बिगाड़ती है। जिससे एसिड एसिड तेजी से बढता है।

चावल, आलू, तीखे मिर्चीले, चटपटा, तले पकवानों का पूरी तरह से खाना बन्द कर दें। यह चीजें यूरिक एसिड बढ़ाने में सहायक हैं।

बन्द डिब्बा में मौजूद हर तरह की सामग्री खाना पूरी तरह से बंद कर दें। बन्द डब्बे की खाने पीने की चीजों में भण्डारण के वक्त कैम्किल रसायन मिलाया जाता है। जैसे कि तरह तरह के प्लास्टिक पैक चिप्स, फूड इत्यादि। हजारों तरह के बन्द डिब्बों और पैकेट की खाद्य सामग्री यूरिक एसिड तेजी बढ़ाने में सहायक है।

एल्कोहन का सेवन पूर्ण रूप से बन्द कर दें। बीयर, शराब यूरिक एसिड तेजी से बढ़ती है। शोध में पाया गया है कि जो लोग लगातार बीयर शराब नशीली चीजों का सेवन करते हैं, 70 प्रतिशत उनको सबसे ज्यादा यूरिक एसिड की समस्या होती है। यूरिक एसिड बढ़ने पर तुरन्त बीयर, शराब पीना बन्द कर दें। बीयर शराब स्वस्थ्य व्यक्ति को भी रोगी बना देती है। बीयर, शराब नशीली चीजें स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
इसके साथ प्रतिदिन चार - पांच लीटर पानी पीने से बहुत अच्छा असर आता है

यूरिक एसिड बढ़ने का उपाय:-

बहुत कारगर एवं शानदार उपाय है
उपाय:-
1- छोटी हरड का पावडर 100 ग्राम
2- बड़ी हरड का पावडर 100 ग्राम
3- आवंला का पावडर 100 ग्राम
4- जीरा का पावडर  100 ग्राम
5- गिलोय का पावडर  200 ग्राम

इन सभी को आपस में मिला लीजिये, प्रतिदिन 5 ग्राम सुबह और 5 ग्राम शाम को पानी से लीजिये।

लाल मिर्च का पावडर और किसी भी अन्य खटाई, अचार का सेवन बिल्कुल नहीं करना है। 

Thursday, July 17, 2025

बुद्धि वर्धक चूरन (स्मरणशक्ति)


  बुद्धि वर्धक चूरन (स्मरणशक्ति)

बुद्धिर्यस्य बलं तस्य' अर्थात् जिसमें बुद्धि है वही बलवान है। 

अगर आप को लगता है के आप के बच्चे की यादशक्ति कम है,पढ़ाई में मन नही लगता ,कोई भी बात भूल जाता है।हमेसा थकावट महसूस करता है,सिर दर्द करता है। तो आप के बच्चो और आप को यह चूर्ण बहुत लाभदायल सिद्ध होगा।

चूर्ण के घटक

शंखपुष्पी 100 ग्राम
ब्राह्मी 50 ग्राम
शतावर 50 ग्राम
बादाम 100 ग्राम
अखरोट गिरी 50 ग्राम
सोंफ 50 ग्राम
मगज 50 ग्राम
कालीमिर्च 10 ग्राम
छोटी इलायची बीज 10 ग्राम
तरबुज बीज गिरी 20 ग्राम
अश्वगंधा 50 ग्राम
आवला 50 ग्राम
जटामांशी 20ग्राम
तुलसी पंचाग 10 ग्राम
मिश्री 100 ग्राम

आप चाहे तो इस मे 3 ग्राम चांदी भस्म भी।मिला सकते हो।
इस सभी समाग्री को कुट पीस कर चूर्ण बना ले और सुबह शाम आधा आधा चमच्च दूध के साथ बच्चों को चौथाई चमच्च दूध के साथ हर रोज दे।

यह चूर्ण दिमागी रूप से सशक्त बनाता है दिमाग तेज़ करता है । अनिद्रा के रोगों में लाभदायक है। मानसिक परेशानी और तनाव दूर करता है । थाइरोइड के रोग को भी कम करता है । शरीर में सुस्ती नही आने देता हरदम तरोताज़ा रखता है ।

यो बच्चे दिमागी कमज़ोर और जिन बच्चों का पढ़ाई में मन नही लगता उन के लिए बहुत ही लाभदायक चूर्ण है!

असाध्य रोगों का ईलाज

 


यह दवा कैंसर से लेकर सभी असाध्य रोगों को ठीक करेगा जो ला ईलाज हैं !
गिलोय चूर्ण 200 ग्राम
हल्दी चूर्ण -100 ग्राम
सतावरी चूर्ण 100 ग्राम
घृतकुमारी रस 100ग्राम,
सालममिश्री 100 ग्राम
तुलसी पंचांग 50 ग्राम
नीम पंचांग 20 ग्राम
नीम का रस 200 ML

सभी को मिलाकर चूर्ण बना लें घृतकुमारी  रस के कारण गीला होगा यह छाया मे सुखा ले । उसके बाद नीम रस मे भिगोकर सूखा लीजिये (ऐसा 2 बार करना है) आपकी दवा तैयार है।

सेवन विधि-

मात्रा - 4 से 5 ग्राम

सुबह शाम खाली पेट सेवन करने से कैंसर से लेकर सभी असाध्य रोगों में कार्य करता है जिन्हे अलौपैथिक डॉक्टर भी ठीक नही कर पाते यह पंचामृत शरीर की शुद्धि व् रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए अत्यंत लाभकारी है...

नोट -: आप अगर कोई एलोपैथिक दवा ले रहे है तो यह दवा भी साथ मे जरूर शुरू करे यह दवा अग्रेजी दवा के साईड इफेक्ट को बिल्कुल ख़त्म कर देगा जिससे आपकी किडनी तथा लीवर लंबे समय तक अंग्रेजी दवाइयां लेने की वजह से बिल्कुल भी क्षतिग्रस्त नहीं होंगे।

Wednesday, July 16, 2025

वात पित्त कफ के दोष तीनों को संतुलित करे इस आयुर्वेदिक उपाय से

 इसे सेव कर सुरक्षित कर लें, ऐसी पोस्ट कम ही आती है..
वात पित्त कफ के दोष तीनों को संतुलित करे इस आयुर्वेदिक उपाय से...अंत तक जरुर पढ़े
वात पित्त और कफ के दोष:-
पोस्ट को धयान से 2 बार पढ़े
शरीर 3 दोषों से भरा है
#वात(GAS) -लगभग 80 रोग
#पित्त(ACIDITY)- लगभग 40 रोग
#कफ(COUGH) -लगभग 28 रोग
यहां सिर्फ त्रिदोषो के मुख्य लक्षण बतये जायेगे और वह रोग घरेलू चिकित्सा से आसानी से ठीक होते है
सभी परहेज विधिवत रहेंगे जैसे बताती हूं
💙जिस इंसान की बड़ी आंत में कचड़ा होता है बीमार भी केवल वही होता है
💙एनीमा एक ऐसी पद्धति है जो बड़ी आंत को साफ करती है और किसी भी रोग को ठीक करती है
💚संसार के सभी रोगों का कारण इन तीन दोष के बिगड़ने से होता है
वात(#GAS) अर्थात वायु:-💛
--शरीर मे वायु जहां भी रुककर टकराती है, दर्द पैदा करती है, दर्द हो तो समझ लो वायु रुकी है
--पेट दर्द, कमर दर्द, सिर दर्द, घुटनो का दर्द ,सीने का दर्द आदि
--डकार आना भी वायू दोष है
--चक्कर आना,घबराहट और हिचकी आना भी इसका लक्षण है
कारण:-
-----------------
--गैस उत्तपन्न करने वाला भोजन जैसे कोई भी दाल आदि गैस और यूरिक एसिड बनाती ही है
--यूरिक एसिड जहां भी रुकता है उन हड्डियों का तरल कम होता जाता है हड्डियां घिसना शुरू हो जाती है ,उनमे आवाज आने लगती है, उसे डॉक्टर कहते है कि ग्रीस ख़त्म हो गई, या फिर स्लिप डिस्क या फिर स्पोंडलाइटिस, या फिर सर्वाइकल आदि
--प्रोटीन की आवश्यकता सिर्फ सेल्स की मरम्मत के लिए है जो अंकुरित अनाज और सूखे मेवे कर देते है
--मैदा औऱ बिना चोकर का आटा खांना
--बेसन की वस्तुओं का सेवन करना
--दूध और इससे बनी वस्तुओं का सेवन करना
-आंतो की कमजोरी इसका कारण व्यायाम न करना
निवारण:-
--------------
--अदरक का सेवन करें,यह वायु खत्म करता है, रक्त पतला करता है कफ भी बाहर निकालता है, सोंठ को लेकर रात में गुनगने पानी से आधा चम्मच खायेँ
--लहसुन किसी भी गैस को बाहर निकालता है,
यदि सीने में दर्द होने लगे तो तुरन्त 8-10 कली लहसुन खा ले, ब्लॉकेज में तुरंत आराम मिलता है
--लहसुन कफ के रोग और टीबी के रोग भी मारता है
--सर्दी में 2-2 कली सुबह शाम, और गर्मी में 1-1 कली सुबह शाम ले, और अकेला न खायेँ सब्जी या फिर जूस , चटनी आदि में कच्चा काटकर डालकर ही खायेँ
--मेथीदाना भी अदरक लहसुन की तरह ही कार्य करता है
प्राकृतिक उपचार:-
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गर्म ठंडे कपड़े से सिकाई करे, अब उस अंग को पहले छुएं यदि वो गर्म है तो ठंडे सिकाई करे और वह अंग अगर ठंडा है तो गर्म सिकाई करे औऱ अगर न गर्म है और न ठंडा तो गर्म ठंडी सिकाई करे एक मिनट गर्म एक मिनट ठंडा
कफ(#COUGH):-
--मुंह नाक से आने वाला बलगम इसका मुख्य लक्षण है
--सर्दी जुखाम खाँसी टीबी प्लूरिसी निमोनिया आदि इसके मुख्य लक्षण है
--सांस लेने में तकलीफ अस्थमा आदि या सीढी चढ़ने में हांफना
कारण:-
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--तेल एव चिकनाई वाली वस्तुओं का अधिक सेवन
--दूध और इससे बना कोई भी पदार्थ
--ठंडा पानी औऱ फ्रिज की वस्तुये खांना
--धूल ,धुंए आदि में अधिक समय रहना
--धूप का सेवन न करना
निवारण:-
--------------------------
--विटामिन C का सेवन करे यह कफ का दुश्मन है यह संडास के रास्ते कफ निकालता है, जैसे आवंला
--लहसुन, यह पसीने के रूप में कफ को गलाकर निकालता है
--Bp सामान्य हॉगा
--ब्लड सर्कुलेशन ठीक हॉगा
--नींद अच्छी आएगी
--अदरक भी सर्वश्रेष्ठ कफ नाशक है
प्राकृतिक उपचार
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--एक गिलास गुनगने पानी मे एक चम्मच नमक डालकर उससे गरारे करे
--गुनगने पानी मे पैर डालकर बैठे, 2 गिलास सादा।पानी पिये और सिरर पर ठंडा कपड़ा रखे, रोज 10 मिनट करे
--रोज 30-60 मिनट धूप ले
पित्त(#ACIDITY):-पेट के रोग
--वात दोष और कफ दोष में जितने भी रोग है उनको हटाकर शेष सभी रोग पित्त के रोग है, BP, शुगर, मोटापा, अर्थराइटिस, आदि
--शरीर मे कही भी जलन हो जैसे पेट मे जलन, मूत्र त्याग करने के बाद जलन ,मल त्याग करने में जलन, शरीर की त्वचा में कही भी जलन,
--खट्टी डकारें आना
--शरीर मे भारीपन रहना
कारण:-
-----------------------------
--गर्म मसाले, लाल मिर्च, नमक, चीनी, अचार
--चाय ,काफी,सिगरेट, तम्बाकू, शराब,
--मांस ,मछली ,अंडा
--दिनभर में सदैव पका भोजन करना
--क्रोध, चिंता, गुस्सा, तनाव
--दवाइयों का सेवन
--मल त्याग रोकना
--सभी 13 वेग को रोकना जैसे छींक, पाद, आदि
निवारण
--------------------------------
--फटे हुए दूध का पानी पिये, गर्म दूध में नीम्बू डालकर दूध को फाड़े, वह पानी छानकर पिए, पेट का सभी रोग में रामबाण है, सभी प्रकार का बुखार भी दूर करता है
--फलो व सब्जियों का रस, जैसे अनार का रस, लौकी का रस, पत्ता गोभी का रस आदि
--निम्बू पानी का सेवन
प्राकृतिक उपचार
-----------------------------------
--पेट को गीले कपड़े से ठंडक दे
--रीढ़ की हड्डी को ठंडक देना, लकवा इसी रीढ़ की हड्डी की गर्मी से होता है, गीले कपड़े से रीढ़ की हड्डी पर पट्टी रखें
--व्यायाम ,योग करे
--गहरी नींद ले

दिनांक - 17.07.2025


 

Thursday, July 10, 2025

खून साफ करने के लिए चमत्कारिक दवा


 खून साफ करने के लिए चमत्कारिक दवा:-

रक्त हमारे शरीर में पोषक तत्वों की पूर्ति करने एवं शरीर के निर्माण में सहयोग का कार्य करता है , लेकिन दूषित रक्त शरीर में विकृति फैलता है

इसका पहला असर हमारी त्वचा पर दिखाई देता है , जैसे चेहरे पर फोड़े – फुंसियाँ होना , त्वचा पर खुजली , दाद आदि ,  इन सभी समस्याओं को दूर करने के लिए आयुर्वेदिक दवा , स्किन क्रीम आदि का प्रयोग करते है लेकिन फिर भी ये जल्दी से ठीक नहीं होते 

रक्त शोधक क्वाथ 

चोपचीनी – 50 ग्राम
उन्नाव – 50 ग्राम
आंवला – 50 ग्राम
हरड – 50 ग्राम
बहेड़ा – 50 ग्राम
सफ़ेद चन्दन – 50 ग्राम
लाल चन्दन – 50 ग्राम
ब्रह्मदंडी – 50 ग्राम

इन सभी को ऊपर बताई गई मात्रा में ले आएं अब इनको हल्का दरदरा कूटकर तुलसी रस तथा मकोय रस की दो भावना देकरसुरक्षित रख लें  अब इस दर्दरे चूर्ण में से एक बड़ा चम्मच एक ग्लास पानी में रात भर के लिए भिगों दे , सुबह पानी को आग पर गरम करे , जब पानी आधा ग्लास बचे तो इसे उतार कर ठंडा करले , इस क्वाथ को छान कर पीना है|

सेवन की विधि

 इस क्वाथ का प्रयोग सुबह के समय करना चाहिए ,अगर आप क्वाथ को सीधा न पी सके तो इसमें 10 ग्राम शहद मिलाकर सेवन कर सकते है

लाभ

खून की खराबी अर्थात रक्त अशुद्धि मे इस क्वाथ का प्रयोग करने से जल्द ही रक्त शुद्ध होने लगता है , रक्त की अशुद्धि के कारण होने वाली खुजली, चेहरे की फोड़ा – फुंसी, दाद, पिम्पले आदि सभी विकार दूर होते है , साथ ही खून शुद्ध होने से कब्ज, चर्म रोग, शारीर में बढ़ा हुआ पीत, कमजोर शरीर एवं चक्कर आना आदि समस्याएँ जड़ से खत्म हो जाती है।

बरसात के मौसम जहां प्रकृति के लिए जीवनदायी होता है, वहीं हो सकता अनेक बीमारियों का कारण । सर्वश्रेष्ठ आयुर्वेदिक स्वास्थ्य नियम -


बरसात का मौसम जहां प्रकृति के लिए जीवनदायी होता है, वहीं हमारे शरीर के लिए अनेक बीमारियों का कारण भी बन सकता है। इस समय वात और पित्त दोष में असंतुलन आता है, और पाचन शक्ति (अग्नि) कमजोर हो जाती है।
आयुर्वेद कहता है – "ऋतु के अनुसार जीवनशैली ही रोगों से रक्षा का उपाय है।"
इसलिए प्रस्तुत हैं वर्षा ऋतु के लिए 20 सर्वश्रेष्ठ आयुर्वेदिक स्वास्थ्य नियम, जिन्हें अपनाकर आप इस मानसून को स्वस्थ और ऊर्जावान बना सकते हैं।

Sunday, June 29, 2025

माजून अक्सीर - यह 2 महीने सेवन जरूर करें

 माजून अक्सीर

मेरे सभी पुरुष मित्रों से आग्रह है यह 2 महीने सेवन जरूर करें आपको आने वाले समय में भी किसी चीज की आवश्यकता नहीं रहेगी, 


कुलजन                    20 ग्राम

शतावर                     20 ग्राम

तालमखाना               20 ग्राम

मूसली काली              20 ग्राम

मूसली सफेद              20 ग्राम

सत गिलोय                 20 ग्राम

अश्वगंधा निगौरी           20 ग्राम

गोद सहजना               20 ग्राम

मोचरस                      20 ग्राम

समंदरसोख                 20 ग्राम

रूमी मस्तंगी असली     20 ग्राम

बहमन सफेद               20 ग्राम

स्काकुल                      20 ग्राम

सालम मिस्री                20 ग्राम

इलाइची दाना (छोटी)    20 ग्राम

लाल चन्दन                  20 ग्राम

दारचीनी                      20 ग्राम

काली मिर्च                   20 ग्राम

अतुलशक्तिदाता            10 ग्राम

केशर                           2 ग्राम

 मकरध्वज                    5 ग्राम

रजतसिन्दूर                   5 ग्राम

चांदी के वर्क                 5 नग 


इन सब के बराबर शहद।

100 ग्राम शुद्ध देसी घी।

सब से पहले इन सब का अच्छे से कुटछान कर चूर्ण बना लें।अब इस चूर्ण को देशी घी में पका कर ठंडा होने दे।ठंडा होने के बाद आप इसमे शहद अच्छे से मिलाकर साथ ही चांदी के वर्क मिलकर अच्छे से घोट दे ।आप का माजून बन का त्यार है।सुबह और रात को 1-1 चमच दूध के साथ 2 महीना ले।आप की शीघ्रपतन की समस्या को हमेशा के लिए जड़ से खत्म करेगा,,,वीर्य को गाढ़ा और शुद्ध पुष्ट करेगा, तथा इरेक्शन की समस्या को जड़ से खत्म कर देगा वीर्य में शुक्राणु की गिनती को बहुत तेजी से बढ़ाता है।तनाव की कमी को दूर करके इंद्री को पुष्ट करता है।खाने में भी बहुत स्वाद।यह हमारा शीघ्रपतन पर सिद्ध अक्सीरी योग है।

Tuesday, December 24, 2024

सर्दी स्पेशल

 1-          कामोत्तेजक व स्तंभक योग व बाजीकरण योग

सफेद मूसली 40 ग्राम

काली मूसली 40 ग्राम

गिलोयसत्व 40 ग्राम

सोंठ 40 ग्राम

छोटी पीपल 40 ग्राम

मुलेहठी40 ग्राम

ईसबगोल 40 ग्राम

तालमखाना 40 ग्राम

बबूल का गोंद 40 ग्राम

रूमी मस्तगी 40 ग्राम

बीजबन्द 40 ग्राम

लौंग 20 ग्राम

जायफल 20 ग्राम

केसर 1 ग्राम

शुद्ध भांग 20 ग्राम

सलाम पंजा – 40 ग्राम

सलाम मिस्री 40 ग्राम

खसखस – 25 ग्राम  

खरबूजे के बीज़ – 50 ग्राम  

मिश्री धागे वाली - 300 ग्राम

निमार्ण विधि -  भांग और मिश्री को छोड़ कर सभी बूटियों को कूट- पीस लें। इसमें धुली भांग 100 ग्राम तथा मिश्री 700 ग्राम पीसकर मिला लें। और किसी हवा बंद बर्तन में रख ले बस दवा तैयार हुआ

सेवन विधि -  10 ग्राम रात को गर्म दूध के साथ लें।

लाभ - यह अपूर्व बाजीकरण योग है। इसके सेवन से उतेजना एवं स्तम्भन दोनों प्राप्त होते हैं। अधेड़ आयु के पुरुषों के लिये यह बड़े काम की चीज है। अधिक विषय - भोग के कारण जिन पुरुषों को शीघ्रपतन हो जाता है और लिंग में पूरी उतेजना नहीं आती है तथा लिंग शिथिल रहता है, उन्हें इसका अवश्य सेवन करना चाहिये। मैथुन में पूरा आनन्द देता है। मैंने इसे कई रोगियों पर आजमाया है।

मैं एक ऐसे वैद्य राज  जी को जानता हूँ जो इसमें खोवा मिलाकर 20 20 ग्राम के पेड़े बनकर उन्हें मदनमोदक के नाम से बेचते हैं। सम्भोग से दो. घण्टे पूर्व के साथ लेने को कहते हैं। अधेड़ आयु के बहुत से लोग उनसे यह मोदक खरीदते हैं। मैंने कई बार उनसे योग पूछा तो उन्होंने नहीं बतलाया। मैंने योग जानने की तरकीब सोंची। उनके नौकर को लालच देकर उससे योग तथा उसे बनाने का तरीका ज्ञात किया तो पता चला कि यह चूर्ण है जिसमें वह खोवा बराबर मात्रा में मिलाकर मोदक तैयार करते हैं!

 2-  सर्दी स्पेशल

सफेद मूसली पाउडर  150 G

ब्लैक मूसली पाउडर 150 G

सतावरी पाउडर 30 G

अश्वगंधा पाउडर 100 G

कौच के बीज़ 100 G

शिलाजीत - 100 G

खरबूजे के बीज़ - 100 G

खोपरा - 100 G

जावीत्री - 50 G

जायफल - 10 PC

बड़ी ईलायची - 50 G

छोटी ईलायची - 10 G

लोंग - 10 G

 Chakki se piswa kar ..

 Kaju, Kishmish, Badam, Akhrot as you wish..

 Besan ki Laddoo bana k kha sakte ho... Sardi m

 

सामग्री का उपयोग आयुर्वेदिक और औषधीय दृष्टिकोण से किया जाता है। यह सामग्री आमतौर पर शरीर के विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान के लिए तैयार की जाती है। इनका उपयोग करने के फायदे और नुकसान इस प्रकार हो सकते हैं:

फायदे:

    सफेद मूसली (40 ग्राम) - यह शरीर को शक्ति प्रदान करने वाली औषधि है। इससे मांसपेशियों की मजबूती और ताकत मिलती है। यह पुरुषों के लिए कामोत्तेजक और ऊर्जा वर्धक होती है।

    काली मूसली (40 ग्राम) - यह भी शरीर को ऊर्जा देने वाली होती है और यौन शक्ति को बढ़ाने के लिए उपयोगी मानी जाती है।

    गिलोय सत्व (40 ग्राम) - गिलोय शरीर की रोग प्रतिकारक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। यह इन्फेक्शन, बुखार और इन्फ्लेमेशन को कम करने में सहायक है।

    सोंठ (40 ग्राम) - सोंठ पाचन तंत्र को सुधारने, अपच, गैस, और सूजन को कम करने में मदद करती है। यह इम्यून सिस्टम को भी मजबूत करती है।

    छोटी पीपल (40 ग्राम) - यह आयुर्वेद में पाचन क्रिया को सुधारने और शारीरिक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होती है।

    मुलेठी (40 ग्राम) - मुलेठी गले की सूजन, खांसी और सर्दी के इलाज में प्रभावी है। यह शरीर में बल और ताजगी लाती है।

    ईसबगोल (40 ग्राम) - यह पेट के लिए बहुत फायदेमंद होता है, खासकर कब्ज और आंतों की समस्याओं के लिए।

    तालमखाना (40 ग्राम) - यह शरीर को शांति और ताजगी देने के लिए उपयोगी है। यह मानसिक तनाव को कम करने और शरीर की ऊर्जा को बढ़ाने में सहायक है।

    बबूल का गोंद (40 ग्राम) - बबूल का गोंद शरीर को शारीरिक ताकत प्रदान करता है और पाचन में सहायक है। यह खून की सफाई में भी मदद करता है।

    रूमी मस्तगी (40 ग्राम) - यह मानसिक थकान, तनाव और चिंता को कम करने में सहायक है। यह यौन शक्ति को भी बढ़ाता है।

    बीजबन्द (40 ग्राम) - यह पाचन तंत्र को मजबूत करता है और शरीर की रोग प्रतिकारक क्षमता को बढ़ाता है।

    लौंग (40 ग्राम) - लौंग का उपयोग गैस, कब्ज, और अपच के लिए किया जाता है। यह शरीर में गर्मी पैदा करता है और इन्फेक्शन को भी कम करता है।

    जायफल (40 ग्राम) - जायफल पाचन शक्ति को मजबूत करता है, मानसिक तनाव को कम करता है और नींद में सुधार करता है।

    केसर (40 ग्राम) - केसर त्वचा, पाचन और मानसिक स्थिति को सुधारने में सहायक होता है। यह रक्त संचार को बढ़ाता है और शरीर को ताजगी प्रदान करता है।

    शुद्ध भांग (100 ग्राम) - शुद्ध भांग का उपयोग दर्द, मानसिक तनाव और मांसपेशियों के दर्द के लिए किया जाता है। यह स्फूर्ति और शांति प्रदान करता है।

    मिश्री धागे वाली (700 ग्राम) - यह मिठास के रूप में उपयोग की जाती है, जो शरीर को ऊर्जा देती है और पाचन क्रिया को सुधारने में सहायक है।

नुकसान:

    अत्यधिक सेवन: इन सामग्रियों का अत्यधिक सेवन शरीर में हानिकारक प्रभाव डाल सकता है। जैसे कि अधिक सोंठ से पेट में जलन हो सकती है, और अधिक मुलेठी से रक्तचाप बढ़ सकता है।

    शुद्ध भांग: शुद्ध भांग का अत्यधिक सेवन मानसिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है, जिससे भ्रम और मानसिक कमजोरी हो सकती है।

    सावधानी: कुछ लोगों को इन सामग्रियों से एलर्जी हो सकती है, जैसे कि लौंग, जायफल, या भांग। इनका सेवन किसी योग्य चिकित्सक की सलाह से करना चाहिए।

    मधुमेह और उच्च रक्तचाप: मिश्री और अन्य मीठे पदार्थ मधुमेह और उच्च रक्तचाप वाले व्यक्तियों के लिए हानिकारक हो सकते हैं, इसलिए इनका सेवन सीमित करना चाहिए।

निष्कर्ष:

इन सामग्रियों का सेवन आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से फायदेमंद हो सकता है, लेकिन उचित मात्रा और सावधानी के साथ किया जाना चाहिए। इन्हें किसी विशेषज्ञ या आयुर्वेदाचार्य की सलाह के अनुसार ही सेवन करना बेहतर होता है।

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