Saturday, July 2, 2022

चश्मा हटाने का उपचा

 चश्मा हटाने का उपचार
ज्यादा देर तक कंप्यूटर पर काम करते हुए या किताब, टीवी देखते हुए आंखे दर्द करने लगती है तो यह खतरे की घंटी हो सकती है। ऎसे में आंखों की रोशनी कमजोर होने से आपकी आंखों पर चश्मा चढ़ जाता है।
चश्में से छुटकारा पाने के लिये कुछ घरेलू उपाय जिनसे आसानी से चश्मे से छुटकारा मिलेगा।
हथेली
अपनी दोनों हथेलियों को आपस में रगड़े, जिससे गर्मी पैदा होगी।
फिर आंखे बंद करके हथेलियों को आंखों पर रखें।
ध्यान रहें आंखों पर हाथ रखते पर रोशनी बिल्कुल ना आएं।
दिन में ऎसा 3-4 बार करें।

कालीमिर्च
दो चुटकी कालीमिर्च पाउडर में एक चम्मच शहद मिलाकर मिश्रण तैयार कर लें और रोजाना इसका सेवन करें।
इससे आंखों की रोशनी बेहतर होती है और चश्मे से छुटकारा मिलता है।

चीनी और धनिया की आई ड्रॉप
तीन भाग धनिया के साथ एक भाग चीनी मिक्स करें।
दोनों को पीसकर पेस्ट बना लें।
फिर इसे पानी में गर्म करें और एक घंटे के लिए कवर करके रख दें।
फिर एक साफ कॉटन का कपड़ा लेकर इस मिश्रण को छान लें और आंखों में आई ड्रॉप की तरह इस्तेमाल करें।

भरपूर नींद
आधुनिक लाइफस्टाइल में अनिद्रा की समस्या बहुत कॉमन है।
अगर पूरी नींद नहीं लेंगे तो इसका असर आंखों पर भी पड़ेगा।
जिससे आंखों के नीचे डार्क सर्कल्स तो होंगे ही, साथ ही आंखों की रोशनी भी कम होगी। इसलिए एक दिन में 7-9 घंटे की नींद बहुत जरूरी है।

एक्सरसाइज
चश्मा हटाने का सबसे कारगर उपाय है आंखों की एक्सरसाइज।
रोज आंखों की एक्सरसाइज करने से आंखे मजबूत होती है और आंखों की रोशनी भी बेहतर होती है।
अगर रोज आंखों की एक्सरसाइज करें तो इससे आपका चश्मा भी हट सकता है।

तांबे के बर्तन में रखा पानी
एक लीटर पानी को तांबे के जग में रात भर के लिए रख दें और सुबह उठकर इस पानी को पीएं।
तांबे में रखा पानी शरीर विशेषकर आंखों को बहुत फायदा पहुंचाता है।

शहद
बादाम को गर्म पानी में कुछ देर रखें, फिर गल जाने पर इसके छिलके उतार दें और इसमें एक चम्मच शहद मिला लें।
इस मिश्रण को रोज खाएं, इससे कमजोर आंखे ठीक होती है और आंखों की रोशनी बढ़ती है।

सूर्य की रोशनी
सूर्य की रोशनी आंखों के लिए बहुत लाभदाक है।
इससे आंखों के लेंस और सिलिअरी मांसपेशियों को रिएक्टिवेट होती है।
इसके लिए रोज कुछ मिनट बंद आंखों पर धूप सेंके। इससे आंखों की रोशनी तेज होती है।

ड्राई फ्रूट्स
रातभर 6-7 बादाम, 15 किशमिश और दो अंजीर पानी में भिगोकर रखें और फिर अगली सुबह इन्हें खाली पेट खा लें।
इसमें पाए जाने वाले फाइबर और विटामिन से आंखों की रोशनी तेज होती है।

सौंफ का शर्बत

 सौंफ का शर्बत
पेट की समस्याओं के लिए पिएं एक्सपर्ट का बताया ये सौंफ का शर्बत
अगर आपको पेट ठंडा करने के लिए कुछ अच्छी ड्रिंक पीनी है तो सौंफ का शर्बत बहुत अच्छा साबित हो सकता।
 

गर्मियों का मौसम शुरू हो गया है और इस मौसम में जितना पेट को ठंडा रखा जाए उतना ही अच्छा होता है। गर्मियों के मौसम में अक्सर हम पेट से जुड़ी कई समस्याओं से दो-चार होते हैं। अगर देखा जाए तो ये मौसम कई लोगों को काफी समस्याएं दे देता है।
गैस, अपच, उल्टी, दस्त आदि बहुत सारी समस्याएं सिर्फ पेट में गर्मी बढ़ने के कारण हो सकती हैं।
ऐसे में क्यों न पेट को ठंडा करने के लिए कोई उपाय कर लिया जाए?

आयुर्वेद में पेट को ठंडा करने के लिए सौंफ का शर्बत पीने को कहा गया है। आयुर्वेदिक डॉक्टर दीक्षा भावसार (BAMS) ने भी इसके बारे में जानकारी दी है। डॉक्टर दीक्षा ने इस शर्बत के फायदे के बारे में बताया कि पेट की गर्मी को शांत करने के लिए ये शर्बत काफी उपयोगी साबित हो सकता है।


सौंफ के शर्बत से होते हैं ये फायदे-
सौंफ के शर्बत से आप पेट की गर्मी शांत कर सकते हैं
सौंफ में फ्लैवोनॉइड्स होते हैं जो सलाइवा का फ्लो ठीक रखते हैं जिससे मुंह नहीं सूखता।
ये मुंह की दुर्गंध को भी ठीक करता है।

सौंफ का शर्बत

सौंफ को अक्सर खाना खाने के बाद इस्तेमाल किया जाता है और इसे माउथ फ्रेशनर का काम लिया जाता है, लेकिन यकीन मानिए सौंफ का काम बहुत हद तक मुंह के स्वास्थ्य को ठीक रखना है।
ये काफी अरोमैटिक होती है और इसलिए ये मुंह की दुर्गंध से काफी अच्छे से लड़ती है। इसे आप दिन में कई बार ऐसे ही खा सकते हैं, लेकिन सौंफ का शर्बत खासतौर पर आपके पेट के लिए होता है जो पेट की कई समस्याओं का इलाज बन सकता है।

पर आखिर ये सौंफ का शर्बत बनाया कैसे जाए?
इसके लिए भी डॉक्टर दीक्षा ने रेसिपी बताई है.!


सामग्री-
2 चम्मच सौंफ का पाउडर
थोड़ी सी मिश्री
2 ग्लास पानी
पुदीना, इलाइची (ऑप्शनल)
बस इस शर्बत को बनाना इतना ही आसान है।
आपको मिश्री अपने स्वादानुसार लेनी होगी।
आप इन सभी चीज़ों को अच्छे से मिलाएं और आपकी ड्रिंक तैयार है।
अगर आपके पास पहले से ही सौंफ का पाउडर मौजूद है तो इसे पूरा बनाने में आपको सिर्फ 5 मिनट ही लगेंगे!
पानी ठंडा लीजिए तो ज्यादा राहत मिलेगी और इसे दोपहर के खाने के बाद गर्मियों में लिया जा सकता है।

Friday, July 1, 2022

मोमिया सिंगरफ (बिल्कुल नामर्द हो...)

 मोमिया सिंगरफ

मोमिया सिंगरफ बहुत ही शक्तिवर्धक योग है ,,जिस की कुछ खुराक ही बिल्कुल नामर्द हो चुके व्यक्ति को मर्द बना देती है,,,,यह योग एक चमत्कारी योग है।जो बिल्कुल निराश हो गए मानुष की जिन्दगी में खुशी की लहरे भर देती है।
मोमिया सिंगरफ बहुत ही उत्तेजक , काम वर्धक है , दूध , घी को पाचाती है।
इस बनाने की विधि --
सब से पहले सिंगरफ 2 तोला और 250 ग्राम आक का दूध ले।
इस आक के दूध को कड़छी में डाल दे और सिंगरफ को भी इस आक के दूध वाली कड़छी में डाल कर मंद मंद आग पर पकाए कि सारा दूध जजब हो जाए।

इसी प्रकार आप को आक के दूध की 100 पुठ देनी है।
इस के बाद आप को सिंगरफ को एक चीनी के कप में रात भर रख देना है।सुबह आप को कप में सिंगरफ मोम की जैसे गाड़ा लेप येहा मिलेगा,,,इसी को मोमिया सिंगरफ कहते है जिस को ठरकी,सेक्स के सोकीन व्यक्ति दूढते फिरते है।
इस की ताकत का तो आप को इस की बनाने की कड़ी मेहनत से ही मालूम हो जाता है।।।इस को बनाना आसान नही,,इसी कारण यह दुर्लभ ही है।।लेकिन जो कडी मेहनत कर सकता है वोह बना ले तो उस को और किसी भी दवा की कभी भी जरूरत नही पड़ती।
यह आयुर्वेद का चमत्कारी योगों में से एक प्रसिद्ध योग है।यो मानुष के शरीर को चट्टान की तरह शक्ति शाली बना देता है।चेहरे का रंग रूप हो बदल जाता है ,,चेहरा में नूर,लाली टपकती है,,,कभी भी शरीर में दर्द, गठिया,बलगम,सास की समस्या,सर्दी,जुकाम, थकावट आदि नही होगा।
इस की खुराक एक चावल है ,,7 दिन के बाद दूसरी खुराक इसी प्रकार आप को कुछ खुराक खानी है,,माखन, मलाई,दूध के साथ।
इस सर्दी में यह हमारे पास मिल जायेगा ।
For More Information +91-9729510363

Thursday, June 30, 2022

गैस,बदहजमी, कब्ज आदि का चूर्ण

 गैस,बदहजमी, कब्ज आदि का चूर्ण

(1) इंद्रायण, हरड़ और नमक काला सब हमवजन ले कर अच्छे से कूट छान कर मिला कर रख ले। सुबह और रात को गुनगुने पानी से 2 से 3 ग्राम भोजन के बाद ले।इस से आप का खाया भोजन पचेगा और सुबह पेट भी अच्छे से साफ होगा।गैस आदि की समस्या भी ठीक होगी।

(2) हींग,सोंठ, अजवाइन नमक काला और मिश्री सभी बराबर मात्रा ले के अच्छे से कूट छान कर मिला ले ।इस चूर्ण को सुबह और रात को 2-2 ग्राम गुनगुने पानी से ले।
यह चूर्ण पुरानी कब्ज,गैस आदि में बहुत लाभकारी चूर्ण है।


तेजस्वी वटी (Sexual disease)

 अक्सीरी तेजस्वी वटी

अगर आप नीचे दिए गई किसी भी समस्या से प्रेषण हो तो आप।बिना किसी भी झिजक से तेजस्वी वटी ले सकते हो।तेजस्वी वटी गर्मी और सर्दी दोनो मौसमों के लिए त्यार की जाती है।

👉1. सेक्स की इच्छा ही न होना |
👉 2. सम्भोग करते-करते बीच में ही उत्तेजना समाप्त होकर लिंग का बिना वीर्य निकले ही ढीला पड़ जाना और पत्नी का असंतुष्ट रह जाना?
👉 3. सेक्स क्रिया शुरू करते ही वीर्य निकल जाना और पत्नी के सामने शर्मिंदा होना पड़े?
👉 4. एक बार यदि सेक्स कर लिया तो कई-कई दिनों तक लिंग में सेक्स करने लायक उत्तेजना का ही न आना जिस कारण यदि पत्नी कमउम्र है तो अकारण काम का बहाना करना पड़ता है?
👉 5. वीर्य में शुक्राणुओं की कमी, वीर्य का पानी की तरह पतला होना?
👉 6. सेक्स के बाद भयंकर कमजोरी महसूस होना जैसे बरसों से बीमार हों?
👉 7. कठोरता का न आना और इच्छा होने पर भी थोड़ा सा उत्तेजित होकर पिलपिला बना रहना?
👉 8. जवानी शुरू होते ही हस्तमैथुन करके वीर्य का सत्यानाश करा और लिंग को भी बीमार बना डाला है?
9👉. सेक्स के दौरान दम फूलने लगना जैसे अस्थमा का दौरा पड़ गया हो?
ऐसी तमाम समस्याएं हैं जिनके कारण वैवाहिक जीवन का सत्यानाश होता रहता है और कई बार तो साथी के कदम बहक जाने से परिवार तक टूट जाते हैं। ऐसे में पति बाजारू दवाओं का सेवन करके या नीम-हकीमों के चक्कर में अपनी मेहनत का पैसा लुटाते रहते हैं लेकिन ऐसी दवाओं से स्थायी समाधान हाथ नहीं आकर बस कुछ देर के लाभ का छलावा महसूस होता है। ऐसे में चाहिये कि शरीर का भली प्रकार पोषण करके शक्ति प्रदान करने वाली औषधि आपके पास हों न कि क्षणिक उत्तेजना देकर आँखों, किडनी व मस्तिष्क यानि दिमाग का नाश करे । पुरातन आयुर्वेद ने गहरे गहन अध्ययन और अनुभव के बाद एक परिपूर्ण तेजवस्वी वटी त्यार की है। जो कि शरीर की समस्त आवश्यकताओं को पूरा कर न सिर्फ़ कमजोरी दूर करता है बल्कि अतिरिक्त सेक्स पावर भी प्रदान करती है।
अगर अपने चेहरे पर सूरज जैसी चमक चाहते है तो एक बार जरूर परखे।
बिजली जैसी ताकत प्रदान करने वाली महाशक्तिशाली वटी में पड़ने वाले घटक



    • स्वर्ण वर्क - 15 mg
    • हीरा भस्म - 15 mg
    • माणिक्य पिष्टी - 15 mg
    • पन्ना पिष्टी - 15 mg
    • नागभस्म - 1.35 mg
    • कज्जली - 1.35 mg
    • चाँदी वर्क - 1.35 mg
    • अभ्रक भस्म - 1.35 mg
    • तालमखाना - 4 mg
    • सालम मिश्री - 4 mg
    • लौंग - 4 mg
    • केसर - 4 mg
    • सौंठ - 4 mg
    • जायफल - 4 mg
    • जावित्री - 4 mg
    • विजया बीज - 4 mg
    • कौंच बीज - 4 mg
    • दालचीनी - 4 mg
    • तेजपत्र - 4 mg
    • छोटी इलायची - 4 mg
    • अकरकरा - 4 mg
    • सफ़ेद जीरा - 4 mg
    • खुरासानी अजवायन - 4 mg
    • पीपर - 4 mg
    • रूमी मस्तंगी - 4 mg
    • मालकांगनी - 4 mg
    • शुद्ध धत्तूर बीज - 4 mg
    • शुद्ध वत्सनाभ - 4 mg
    • सफ़ेद मूसली. - 4 mg
    • शुद्ध शिलाजीत - 4 mg
    • लाल बहमन - 4 mg
वटी 2 : त्रिबंग भस्म, मुक्ताशुक्ति भस्म, कज्जली, अभ्रक भस्म, लोह भस्म, ताम्र भस्म, चाँदी भस्म, स्वर्ण भस्म, शुद्ध हिंगुल, शुद्ध हरताल, वैक्रान्त भस्म, शुद्ध कुचला, शुद्ध वत्सनाभ, विजया बीज, शुद्ध शिलाजीत, तोदरी, अश्वगंधा, शतावर, काला जीरा, सफ़ेद जीरा, केसर, जायफल, जावित्री, विदारीकंद, छोटी इलायची, सफ़ेद मिर्च, अकरकरा, दालचीनी, पीपर, सफ़ेद मूसली, काली मूसली, खुरासानी अजवायन, लौंग, सौंठ, वंशलोचन, जुन्दबेदस्त, गोखरू, सालमपंजा, मालकांगनी, काले तिल, मुलहठी।
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GB

सेहत का राज़

 यूरीन (पेशाब) के  रंग से जानें अपनी "सेहत  का  राज़"     ????

 

अगर यूरीन (पेशाब) का रंग हल्‍का पीला हो तो चिंता की कोई बात नहीं होती है, लेकिन ज्‍यादा पीलापन आपके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अच्‍छा नहीं होता है।
यूरीन का रंग हमारे स्‍वास्‍थ्‍य पर क्‍या असर करता है, यह बताने के लिए यहां पर यूरीन के कुछ रंग दिये गये हैं।

यूरीन (पेशाब) का रंग बता सकता है आपकी सेहत का राज़
यूरीन किडनी के माध्यम से रक्त से अतिरिक्त पानी और अपशिष्ट उत्पादों को निकालने का प्राकृतिक तरीका है। सामान्य मूत्र का रंग हल्‍के पीले से थोड़ा गहरा पीला हो सकता है। अगर यूरीन (पेशाब) का रंग पीला हो तो ज्‍यादा चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है लेकिन एक दिन से ज्‍यादा ऐसा होने पर स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या होने का डर रहता है।
ऐसे में खूब सारा पानी पीने की हिदायत दी जाती है, लेकिन अगर फिर भी यूरीन का पीलापन नहीं जा रहा हो तो तुरंत चिकित्‍सक के पास जाये।
यहां पर यूरीन के कुछ  रंग दिये गये हैं जो बताते हैं कि यूरीन का रंग हमारे स्‍वास्‍थ्‍य पर क्‍या असर करता है।

"हल्का पीला"
आदर्श यूरीन का रंग स्पष्ट या पीले रंग का होता है।
यह रंग बताता है कि आप बिल्कुल स्वस्थ हैं, और अपने स्‍वयं को अच्‍छी तरह से हाइड्रेटेड कर रहे हैं और आपका शरीर बहुत अच्छे से काम कर रहा।

"पीला पेशाब"
शरीर को अच्छी तरह से हाइड्रेट नहीं करने पर यूरीन का रंग पीला हो जाता है।
शरीर में अत्यधिक पसीना आने या कम हाइड्रेशन के कारण भी यूरीन का रंग पीला हो सकता है।
इससे बचने के लिए आपको तरल पदार्थ अधिक से अधिक मात्रा में लेने की सलाह दी जाती है।

"गहरा पीला पेशाब"
दवाओं के कारण भी यूरीन का रंग गहरे पीले रंग में बदल सकता है। यूरीन का रंग गहरा पीला होने पर जितनी जल्‍दी हो सके अपने डॉक्‍टर से मिलना चाहिए क्‍योंकि यह लीवर विकारों या हैपेटाइटिस में से किसी एक का लक्षण हो सकता है।

"दूधिया सफेद पेशाब"
यूरीन (पेशाब) का दूधिया सफेद रंग यूरीन मार्ग, यूरीन मार्ग के संक्रमण या किडनी की पथरी में बैक्‍टीरिया की उपस्थिति में वृद्धि का संकेत हैं।
अगर आप यूरीन दूधिया सफेद रंग में बदल गया है तो तुरंत अपने डॉक्‍टर के पास जाये।

"लाल या गुलाबी पेशाब"
यूरीन (पेशाब) का रंग लाल या गुलाबी रंग में तब बदलता है।
जब आपने लाल रंग से बने भोजन या चुकंदर और ब्लैकबेरी जैसे प्राकृतिक लाल रंग का उपभोग किया हो।
अगर इस तरह के खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं किया है, तो यह यूरीन से रक्त के आने का संकेत होता है।
आपके यूरेनरी सिस्टम, किडनी में पथरी या बहुत ज्यादा एक्‍सरसाइज के कारण लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने का कारण भी हो सकता है।

"नारंगी पेशाब"
यूरीन (पेशाब) समस्‍या को कम करने के लिए इस्‍तेमाल की जा रही दवाओं के कारण भ यूरीन का रंग नारंगी हो सकता है।
इसके अलावा गाजर या गाजर के रस को लेने से भी यूरीन का रंग बदल कर नारंगी हो जाता है।  

"नीला या हरा पेशाब"
यूरीन (पेशाब) का रंग नीला या हरा खाने में पड़े कृत्रिम रंग के कारण होता है।
इसमें चिंता करने की कोई बात नहीं होती, हालांकि चिंता बनी रहती है।
दुर्लभ मामलों में आनुवांशिक बीमारी के कारण भी यूरीन का रंग नीला और हरा हो जाता है।

यूरीन के रंग को प्रभावित करने वाले कारक
खाद्य पदार्थों के कारण यूरीन का रंग बदल सकता है।
दवाओं, कीमोथैरेपी दवाओं, यूरीन मार्ग में संक्रमण के निदान के लिए ली गई दवाओं से भी यूरीन का रंग प्रभावित होता है।
अगर आप इसमें से किसी को भी ले रहे हैं तो आपके यूरीन का रंग बदल सकता है।

चिकित्सा सलाह की जरूरत
अगर आप इस बारे में सुनिश्चित नहीं हो पा रहे हैं कि यूरीन के रंग में परिवर्तन का कारण क्‍या हैं तो आपको अपने डॉक्‍टर से मिलना चाहिए।
इसके अलावा यूरीन में ब्‍लड का आना भी एक गंभीर संकेत है, इसके लिए आपको तुरंत चिकित्‍सक की सलाह लेनी चाहिए।
नियमित स्‍वास्‍थ्‍य जांच से आपको इसके कारणों के बारे में जानकारी मिल सकती है।

Tuesday, March 8, 2022

स्वस्थ रहें जीवन भर

 1. सुबह उठते ही एक लीटर पानी पी लें .

 पानी बासी मुंह ही पीएं , बिना कुल्ला किये . सुबह की वह लार आपके पेट में जाकर पूरा पेट साफ कर देगी . जिस व्यक्ति का सुबह सुबह पेट साफ हो गया, उसके जीवन में कभी जल्दी से बीमारी नही आती .

सुबह की लार औषधि का काम करती हैं . इसे आज के वैज्ञानिकों ने अपनी भाषा मेंपानी चिकित्सा (वॉटर थेरेपी) नाम दे दिया हैं .

 ध्यान देने योग्य बातें स्वस्थ रहें  जीवन भर

  एक लीटर का मतलब दो लोटा . अगर  इतना नही पी सकते तो शुरुआत में एक लोटा (दो गिलास) पानी पीने की आदत डालें .

 1- सुबह उठते ही अगर जोर से पेशाब आयी हुई हो , तो पहले मूत्र त्याग लें . उसके बाद आराम से शांत चित्त के साथ नीचे बैठकर पानी पियें .

2- हर बार पानी पीने के साथ पानी को मुंह में हिलाये , ताकी मुंह की लार (थूक) पूरा पेट में जा सके .

3- भोजन करने के डेढ़ घण्टे बाद पानी पियें .

खाना खाने के बाद हमारे पेट में जठराग्नि (आग) जलती है , वह आग उस भोजन को पचाती है . जब आप खाना खाते ही तुरंत बाद पानी पीते हो तो वह आग बूझ जाती हैं, और फिर वह भोजन पेट में सड़ता हैं . और फिर बहुत सारी बीमारियां होती हैं .

4- भोजन करने के पाँच या दस मिनट बाद पानी पीना शुरू करें , फिर कुछ दिनों बाद भोजन के आधा घंटे बाद पानी पीने की आदत को ले जायें और फिर धीरे धीरे एक घंटा से डेढ़ घंटे तक इस अंतराल को ले जायें .

5- यह सबसे महत्वपूर्ण बात है , जो मैंने अपने अनुभव से सीखी है . भोजन करने के बाद एक बार एक  दो गिलास पानी से अच्छे से कुल्ला अवश्य कर लें इससे आपको पानी पीने का मन नही करेगा .

6- या फिर थोड़ा काला देशी गुड़ खा लीजिए , जिससे सब्जी का तीखापन खत्म हो जाएगा . फलों का ज्यूस भी पी सकते हैं .

7. हमेशा घूंट-घूंट पानी पियें .स्वस्थ रहें जीवन भर

आप जो खड़े -खड़े गटागट पानी पीते हो , एक ही बार में पूरा लोटा पेट में खाली कर देते हो ये तरीका बिल्कुल सही नही हैं . घूंट घूंट पानी पीने से आपको कभी भी मोटापा नहीं आयेगा . आप हमेशा स्लिम फिट रहोगे .

 यह नियम आपको तीस से ज्यादा बीमारियों से बचायेगा . पूरे दिन में जितनी बार पानी पियो , थोड़ा-थोड़ा , घूँट घूँट मुंह में अच्छे से हिलाकर पिओ .

 इस बात का ध्यान रखें , जितनी बार पानी पिओ, आपकी मुँह की लार शरीर के अंदर जानी चाहिए . यह लार (थूक) बहुत कीमती है इसमे 18 प्रकार के सूक्ष्म पोषक तत्व मौजूद रहते हैं .

 8-जीवन में कितनी भी जोर से प्यास क्यों लगे ठंडा पानी कभी पियेंस्वस्थ रहें जीवन भर

 फ्रीज का पानी कभी भी पियें . अगर आप पाँच- दस साल लगातार ठंडा पानी पीते हो तो, आपको लकवा ( पैरालिसिस) , दिल का दौरा ( हार्ट- अटैक) शत प्रतिशत आयेगा .

इस नियम को विज्ञान की भाषा में समझाता हूँ . हमारा शरीर हैं गर्म , औऱ जब हम ठंडा पानी पीते हैं , तो शरीर का सारा खून उस ठंडे पानी को गर्म करने में लग जाता हैं . और इस तरह आप लगातार ठंडा पानी पीते जाओगे , तो एक दिन आपके किसी भी अंग में  खून (ब्लड) की कमी हो जायेगी और वो अंग आपका काम करना बंद कर देगा . इसी को लकवा कहते हैं .

हाँ , घर के मिट्टी के बर्तन (मटके) का ठंडा पानी पी सकते हो , वह प्राकृतिक ठंडा जल हैं .

बाजार में मिलने वाली पानी की बोतलों का पानी भी कभी पियें .

या फिर घर से मिट्टी की बोतल या स्टील की बोतल में पानी भरकर लेकर जायें , खाली होने पर कही प्याऊ से भर लें .

 आयुर्वेद के अनुसार खान-पान

 1- भोजन हमेशा चबा चबा कर खाएं . रोटी के एक ग्रास (टुकड़े) को मुँह में पूरा रस बनाएं , इस नियम का पालन करने से बहुत सारे अद्भुत लाभ मिलेंगे .

2- गाय का दूध अमृत है . हर दिन शाम को गाय का दूध पीये . गाय का मतलब मैं भारतीय देशी गाय (गौमाता) के दूध की बात कर रहा हूँ .

3-  प्यास भूख को मत रोकियेस्वस्थ रहें जीवन भर

4-  शाम को बिना तकिये सोने से हृदय और मस्तिष्क मजबूत होता हैं .

5- रात्रि को बाँयी करवट सोने से दांयाँ स्वंर चलता हैं, जो भोजन पचाने में सहायक हैं .

6- शक्कर और नमक का विकल्प - सेंधा नमक और देशी शक्कर बूरा (खांड) देशी काला/भूरा गुड !!!

7- मिट्टी के बर्तन में बनी कोई भी चीज खाने से कई प्रकार के रोग खत्म होते हैं . आपको जानकर हैरानी होगी, घर में उपयोग होने वाले सभी मिट्टी के बर्तन आपके गांव शहर के बाजारों में , कुम्हारों के पास और ऑनलाइन उपलब्ध हैं . हमारे पूर्वज सभी मिट्टी के बर्तन/हांडी में ही सबकुछ पकाकर खाते थे .

8-  भोजन करने से 40 मिनट पहले पानी पी सकते हो .

9- भोजन करने से पहले , बीच में , बाद में पीया पानी आरोग्य की दृष्टि से सही नही है . इस नियम का पालन करने से 50 से 100 बीमारियों से आप हमेशा के लिए बचे रहेंगे

किन चीजों के साथ क्या नहीं खाना चाहिए ?...

  दूध के साथदही , नमक , मूली , मूली के पत्ते , अन्य कच्चे सलाद , सहिजन , इमली , खरबूजा , बेलफल , नारियल , नींबू , करौंदा ,जामुन , अनार , आँवला , गुड़ , तिलकुट ,उड़द , सत्तू , तेल तथा अन्य प्रकार के खट्टे फल या खटाई , मछली आदि चीजें ना खाएं .

 दही के साथखीर , दूध , पनीर , गर्म पदार्थ , गर्म भोजन , खीरा , खरबूजा आदि ना खाएं .

 खीर के साथकटहल , खटाई (दही , नींबू , आदि), सत्तू , शराब आदि ना खाएं .

 शहद के साथ: घी (समान मात्रा में पुराना घी), वर्षा का जल , तेल , वसा , अंगूर , कमल का बीज , मूली , ज्यादा गर्म जल , गर्म दूध या अन्य गर्म पदार्थ , शार्कर (शर्करा से बना शरबत) आदि चीजं ना खाएं . शहद को गर्म करके सेवन करना भी हानिकारक है .

 ठंडे जल के साथ- घी , तेल , गर्म दूध या गर्म पदार्थ , तरबूज , अमरूद , खीरा , ककड़ी , मूंगफली , चिलगोजा आदि चीजें ना खाएं .

 गर्म जल या गर्म पेय के साथ- शहद , कुल्फी , आइसक्रीम अन्य शीतल पदार्थ का सेवन ना करें .

 घी के साथ समान मात्रा में शहद , ठंडे पानी का सेवन ना करें .

 खरबूजा के साथ- लहसुन , दही , दूध , मूली के पत्ते , पानी आदि का सेवन ना करें .

 तरबूज के साथ  ठण्डा पानी , पुदीना आदि विरुद्ध हैं .

 चावल के साथ  सिरका ना खाएं .

 नमक- अधिक मात्रा में अधिक समय तक खाना हानिकारक है .

 उड़द की दाल के साथ मूली ना खाएंस्वस्थ रहें जीवन भर

 केला के साथ- मट्ठा पीना हानिकारक है .

 घी - काँसे के बर्तन में दस दिन या अधिक समय तक रखा हुआ घी विषाक्त ( जहरीला ) हो जाता है



दांत दर्द या मुंह की बदबू

   दांत दर्द या मुंह की बदबू का आसान उपाय ● दन्त व मुख समस्या से ग्रस्त व्यक्ति का जीवन काफी कष्टमय रहता है, उसे कुछ भी अछा नहीं लगता आपको य...