ऋषि मुनियों के चमत्कारी सिद्ध योग
इस ब्लॉग में आप आयुर्वेद के बारे में पढ़ेंगे और आयुर्वेद के द्वारा हम कैसे बड़ी से बड़ी बीमारी का इलाज कर सकते है और अपने और अपने परिवार के स्वस्थ का ध्यान रख सकते है ! हमें कब क्या खाना चाहिए क्या नहीं खाना चाइये, किस वस्तु के साथ क्या इस्तेमाल करना है और क्या नहीं ! हमें आशा है की आप को हमारे द्वारा दी गयी जानकारियाँ पसन्द आयेगी ! धन्यवाद
Wednesday, October 18, 2023
ऋषि मुनियों के चमत्कारी सिद्ध योग
शिग्रफ तूफानी वटी बहुत ही पावरफुल
शिग्रफ तूफानी वटी का कोई भी भाई रिजल्ट चेक करना चाहता है तो आप हम से पहले 5 दिन की दवा मंगवा सकते है। शिग्रफ वटी बहुत ही पावरफुल वटी है ! इंद्री की सभी प्रकार की कमजोरी को 2,3 दिन में ही दूर करके इंद्री को रेस्ट पुष्ट कर देती है! चाहे किसी भी प्रकार की कमजोरी हो जैसे हस्थमैथुन, बढ़ती उम्र,या शुगर या किसी भी गलत हरकतों से हो! सभी को दूर करने की ताकत रखती है।।।।जिस किसी भाई को चाहिए हम से सपर्क कर सकता है।
Cont & whatsapp no.+91-9729510363Thursday, October 12, 2023
पुराना जुकाम
🥶 पुराना जुकाम
5 ग्राम सोंठ 1 लीटर पानी में उबालें । दिन में 3 बार यह गुनगुना करके पीने से पुराने जुकाम में लाभ होता है ।
पीने के पानी में सोंठ का टुकड़ा डालकर वह पानी पीते रहने से पुराना जुकाम ठीक होता है । ( सोंठ के टुकड़े को प्रतिदिन बदलते रहें । )
▪सर्दी – जुकाम : 5 ग्राम सोंठ चूर्ण, 10 ग्राम गुड़ और 1 चम्मच घी को मिलालें । इसमें थोडा -सा पानी डालके आग पर रखके रबड़ी जैसा बना लें । प्रतिदिन सुबह लेने से 3 दिन में ही सर्दी – जुकाम मिट जाता है ।
⛔ सावधानी – रक्तपित्त की व्याधि में तथा पित्त प्रकृतिवाले ग्रीष्म व शरद ऋतु में सोंठ का उपयोग न करें ।
Wednesday, October 11, 2023
Special for Wright Loss
Special for Wright Loss
By. Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh ji Insan
सुबह उठ कर हल्का (सर्दियों में ) गुनगुना पानी एक से दो गिलास पीना है ! (गर्मियों में रूम Temperature )
उस के बाद फ्रेश आदि हो कर, कम से कम दो किलोमीटर जोगिंग करनी है !
सुबह खाने में अपने वजन का 10% हिस्सा Fruit (फल ) लेने है इस में आम और केला (फैट वाले फल) नहीं लेना है !
दोपहर को खाने से 30 मिनट पहले एक बड़ी प्लेट सलाद की लें उस के बाद खाना खाना है
फिर श्याम को केवल सलाद खाना है और कुछ नहीं खाना है
इससे आप बिना डाइटिंग और बिना किसी दवाई के अपना वजन कम कर सकते है
पित्ताशय की पथरी का घरेलू उपचार
Home Remedies for Gall bladder Stone
पित्त की पथरी यानि गॉलस्टोन छोटे पत्थर होते हैं, जो पित्ताशय की थैली में बनते हैं। पित्त की पथरी लीवर के नीचे होती है। पित्त की पथरी बहुत दर्दनाक हो सकता है यदि इसका समय पर इलाज नहीं किया गया तो इसे निकालने के लिए एक ऑपरेशन की आवश्यकता हो सकती है। आपको बता दें कि पित्ताशय में जब कोलेस्ट्रोल जमने लगता है या फिर सख्त होने लगता है, तो हमें अक्सर पथरी की शिकायत हो जाती है। ऐसे में रोगी को असहनीय दर्द का सामना करना पड़ता है और साथ में खाना पचने में भी दिक्कत आने लगती है।
लीवर और गॉल ब्लैडर के बीच बाइल डक्ट नामक एक छोटी-सी नली होती है, जिसके माध्यम से यह पित्त को गॉलब्लैडर तक पहुंचाता है। जब व्यक्ति के शरीर में भोजन जाता है तो यह ब्लैडर पित्त को पिचकारी की तरह खींच कर उसे छोटी आंत के ऊपरी हिस्से में भेज देता है, जिसे डुओडेनियम कहा जाता है। इससे पाचन क्रिया की शुरुआत हो जाती है।
Gallbladder stone
Contents
1 पित्ताशय की पथरी क्या होता है (What is Gall Bladder Stone)
2 गॉल ब्लैडर स्टोन क्यों होता है (Causes of Gall Bladder Stone)
3 पित्ताशय में पथरी होने के लक्षण (Symptoms of Gall Bladder Stone)
4 पित्ताशय में पथरी होने से कैसे बचा जा सकता है (Prevention of Gall Bladder Stone)
5 पथरी निकालने के बाद कौन-सी बातों का ध्यान देना चाहिए (Prevention after removing Gall Bladder Stone)
6 पित्ताशय की पथरी होने के साइड इफेक्ट (Side Effect of Gall Bladder Stone)
7 पित्ताशय की पथरी का घरेलू उपचार (Home Remedies for Gall Bladder Stone)
7.1 एप्पल सिडार विनेगार पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Apple Cider Vinegar Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)
7.2 नाशपाती पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Pear Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)
7.3 चुकंदर, खीरा और गाजर का रस पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Beetroot Mixture Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)
7.4 सिंहपर्णी पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Dandelion Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)
7.5 पुदीना पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Mint Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)
7.6 इसबगोल पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Isabgol Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)
7.7 नींबू पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Lemon Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)
7.8 लाल शिमला मिर्च पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Red Capsicum Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)
7.9 साबुत अनाज पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Grain Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)
7.10 हल्दी पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Turmeric Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)
7.11 विटामिन सी पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (VitaminC Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)
8 डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए ? (When to See a Doctor?)
पित्ताशय की पथरी क्या होता है (What is Gall Bladder Stone)
पाचन के लिए आवश्यक एंजाइम को सुरक्षित रखने वाले महत्वपूर्ण अंग यानी पित्ताशय से जुड़ी सबसे प्रमुख समस्या यह कि इसमें स्टोन बनने की आशंका बहुत अधिक होती है, जिन्हें गॉलस्टोन कहा जाता है। दरअसल जब गॉलब्लैडर में तरल पदार्थ की मात्रा सूखने लगती है तो उसमें मौजूद चीनी-नमक और अन्य माइक्रोन्यूट्रिएट तत्व एक साथ जमा होकर छोटे-छोटे पत्थर के टुकड़ों जैसा रूप धारण कर लेते हैं, जिन्हें गॉलस्टोन्स कहा जाता है।
कभी-कभी पित्ताशय में कोलेस्ट्रोल, बिलीरुबिन और पित्त लवणों का जमाव हो जाता है। 80 प्रतिशत पथरी कोलेस्ट्रोल की बनी होती है। धीरे-धीरे वे कठोर हो जाती हैं तथा पित्ताशय के अंदर पत्थर का रूप ले लेती है। कोलेस्ट्रॉल स्टोन पीले-हरे रंग के होते हैं।
जब ब्लैडर में ब्लैक या ब्राउन कलर के स्टोन्स नजर आते हैं तो उन्हें पिगमेंट स्टोन्स कहा जाता है। कई बार गॉल ब्लैडर में अनकॉन्जुगेटेड बिलिरुबिन नामक तत्व का संग्रह होने लगता है तो इससे पिगमेंट स्टोन्स की समस्या होती है। गॉलब्लैडर में गड़बड़ी की वजह से कई बार पित्त बाइल डक्ट में जमा होने लगता है, इससे लोगों को जॉन्डिस भी हो सकता है। अगर आंतों में जाने के बजाय बाइल पैनक्रियाज़ में चला जाए तो इससे क्रॉनिक पैनक्रिएटाइटिस नामक गंभीर समस्या हो सकती है। अगर सही समय पर उपचार न कराया जाए तो इससे गॉलब्लैडर में कैंसर भी हो सकता है।
पित्त में पथरी का बनना एक भयंकर पीड़ादायक रोग है। पित्त में कोलेस्ट्रॉल और पिग्मेंट नामक दो तरह की बनती है। लेकिन लगभग 80 प्रतिशत पथरी कोलेस्ट्रॉल से ही बनती है। पित्त लिवर में बनता है और इसका संग्रह गॉल ब्लैडर में होता है। यह पित्त फैट युक्त भोजन को पचाने में मदद करता है। लेकिन जब पित्त में कोलेस्ट्रॉल और बिलरुबिन की मात्रा ज्यादा हो जाती है, तो पथरी का निर्माण होता है।
गॉल ब्लैडर स्टोन क्यों होता है (Causes of Gall Bladder Stone)
पित्ताशय में पथरी का अभी तक कोई कारण सिद्ध नहीं हुआ है और यह किसी भी उम्र में हो सकता है। कुछ फैक्टर हैं जो गॉलस्टोन्स की संभावना को बढ़ा सकते हैं जैसे कि-
-मधुमेह या डायबिटीज (Diabetes)
मोटापा (Obesity)
-गर्भधारण (Pregnancy)
-मोटापे की सर्जरी के बाद (Post bariatric surgery)
-कुछ दवाओं का सेवन
-लंबे समय से किसी बीमारी के ग्रस्त होने के कारण
इसके सिवा और भी कारण होते हैं-
ब्रेड, रस्क और अन्य बेकरी उत्पाद- बेकरी में बने उत्पाद जैसे- ब्रेड, मफिन्स, कुकीज, कप केक आदि का सेवन पित्ताशय के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। दरअसल इन फूड्स में सैचुरेटेड और ट्रांस फैट की मात्रा बहुत ज्यादा होती है और इनमें से ज्यादातर फूड्स मैदे से बने होते हैं। अगर आपको गॉल ब्लैडर से संबंधित कोई रोग है, तो इन उत्पादों का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। इसकी जगह पर आप मोटे अनाज से बने आहारों का सेवन करें।
ज्यादा प्रोटीन भी है खतरनाक-अगर आपको अपने गॉल ब्लैडर को स्वस्थ रखना है, तो जानवरों में पाये जाने वाले प्रोटीन मात्रा सीमित कर देनी चाहिए। दरअसल जानवरों में पाए जाने वाले प्रोटीन से कैल्शियम स्टोन और यूरिक एसिड स्टोन के होने का खतरा बढ़ जाता है। मछली, मांस में प्रोटीन के साथ कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है, इसलिए इनका सेवन बहुत अधिक नहीं करें। अगर आपको गॉल ब्लैडर या किडनी में पथरी है, तब तो इनका सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
मीठी चीजों का सेवन-मीठी चीजों में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट काफी मात्रा में पाया जाता है। इसके साथ ही चीनी के ज्यादा सेवन से कोलेस्ट्रॉल गाढ़ा होता है, जिससे दिल के रोगों के साथ-साथ गॉल ब्लैडर में पथरी का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए मीठी चीजों का बहुत अधिक सेवन नहीं करना चाहिए।
गर्भनिरोधक दवाएँ -ज्यादा मात्रा में या जल्दी-जल्दी गर्भनिरोधक दवाओं का प्रयोग करने वाली महिलाओं में भी गॉल ब्लैडर की समस्या काफी पाई जाती है। इसलिए महिलाओं को चाहिए कि दवाओं के बजाय अन्य प्रकार के गर्भनिरोधक उपायों को अपनाएं, क्योंकि दवाओं का ज्यादा सेवन उन्हें गॉल ब्लैडर में पथरी का मरीज बना सकता है। इसके अलावा इन दवाओं का किडनी और लीवर पर भी बुरा असर पड़ता है।
कॉफी-अगर आप कॉफी का ज्यादा सेवन करते हैं, तो भी आपको गॉल ब्लैडर की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए जिन लोगों को गॉल ब्लैडर में पहले ही पथरी या अन्य कोई शिकायत है, उन्हें कॉफी का सेवन बिल्कुल बंद कर देना चाहिए। जो लोग स्वस्थ हैं, वो दिन में एक या दो कॉफी पी सकते हैं मगर इससे ज्यादा कॉफी का सेवन नहीं करना चाहिए।
सोडा का सेवन-पथरी होने पर पानी का अधिक सेवन करने की सलाह दी जाती है, लेकिन कुछ पेय पदार्थ ऐसे भी होते हैं जो पथरी होने पर नहीं पीना चाहिए। स्टोन होने पर सोडा का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए, इसमें फॉस्फोरिक एसिड होता है जो स्टोन के खतरे को बढ़ाता है।
पित्ताशय में पथरी होने के लक्षण (Symptoms of Gall Bladder Stone)
Gallbladder stone symptoms
कई बार पित्त की थैली में पथरी बिना किसी लक्षण के होती है और कई बार कुछ लक्षणों को दर्शाते हुए भी होती है। पित्त की थैली में पथरी होने पर कुछ खास लक्षण दृष्टिगोचर होते हैं-
-बदहजमी
-खट्टी डकार
-पेट फुलाना
-एसिडिटी
-पेट में भारीपन
-उल्टी
-पसीना आना जैसे लक्षण नजर आते हैं।
पित्ताशय में पथरी होने से कैसे बचा जा सकता है (Prevention of Gall Bladder Stone)
पित्ताशय में पथरी से बचने के लिए जीवनशैली और आहार में बदलाव लाना आवश्यक होता है। जैसे-
आहार
–गाजर और ककडी का रस को 100 मि.ली. की मात्रा में मिलाकर दिन में दो बार पीने से पित्त की पथरी में लाभ होता है।
-सुबह खाली पेट 50 मि.ली. नींबू का रस पीने से एक सप्ताह में लाभ होता है।
-शराब, सिगरेट, चाय, कॉफी तथा शक्कर युक्त पेय हानिकारक है। इनसे जितना हो सके बचने की कोशिश करें।
-नाशपाती पित्त की पथरी में फायदेमंद होती है, इसे खूब खायें। इसमें पाये जाने वाले रासायनिक तत्वों से पित्ताशय के रोग दूर होते हैं।
-विटामिन-सी अर्थात् एस्कोर्बिक एसिड के प्रयोग से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत बनती है। यह कोलेस्ट्रॉल को पित्त में बदल देता है। इसकी तीन से चार गोली रोज लेने पर पथरी में लाभ होता है।
-पित्त पथरी के रोगी भोजन में अधिक से अधिक मात्रा में हरी सब्जियां और फल लें। इनमें कोलेस्ट्रॉल कम मात्रा में होता है और प्रोटीन की जरूरत भी पूरी करते हैं।
-तली और मसालेदार चीजों से दूर रहें और संतुलित भोजन ही करें।
-खट्टे फलों का सेवन करें। इनमें मौजूद विटामिन-सी गॉलब्लैडर की पथरी दूर करने के लिए काफी मददगार साबित होता है।
-रोजाना एक चम्मच हल्दी का सेवन करने से पथरी दूर होती है।
खाने से परहेज करनी चाहिए-
पित्त की पथरी होने पर चिकित्सकों ने आहार से अण्डों को हटाने का सुझाव दिया है। उनके अनुसार इसमें काफी कोलेस्ट्रॉल होता है जो पित्ताशय में पथरी का कारण बनता है।
-यदि आपको तली हुई चीजें खाना पसंद है तो उसे तुरन्त छोड़ दीजिए। यह न केवल सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि इससे पित्त की पथरी की समस्या और भी बढ़ सकती है। इसलिए आप कोशिश करें कि ज्यादा तली हुई चीजें न खाएं। आपको बता दें कि तली हुई खाद्य पदार्थ में हाइड्रोजनीकृत वसा, ट्रांस वसा और सेचुरेटेड वसा होती है जो आपकी पित्ताशय के दर्द को बढ़ा सकता है। तलने के लिए स्वस्थ विकल्प के रूप में आप जैतून या कैनोला तेल का उपयोग करें।
-पित्त की पथरी में परहेज की बात करें तो आपको मांसाहारी से भी परहेज करना चाहिए जैसे, मीट, लाल मांस, सूअर का मांस और चिकन आदि। इसके अलावा आप तैलीय मदली भी न खाएं।
-प्रोसेस्ड फूड के पीछे लोग क्यों भाग रहें हैं इसकी एक वजह यह भी है कि ये खाने में अच्छे लगते हैं और इसे बनाने के लिए ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ती। लेकिन इसका स्वाद हमारे शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। यह न केवल शरीर के पाचन तंत्र को खराब कर सकता है बल्कि पित्त की पथरी की समस्या को भी बढ़ा सकता है। आमतौर पर ट्रांस फैटी एसिड, पैकेज्ड फूड में मौजूद होते हैं जो पित्त की पथरी के लक्षणों को बढ़ाने का काम करते हैं। आप चिप्स, कुकीज, डोनट्स, मिठाई या मिश्रित पैक वाले खाद्य पदार्थों से बचें।
-पित्त की पथरी होने पर आप परिष्कृत अवयव वाले खाद्य पदार्थ से दूरी बनाएं। व्हाइट ब्रेड, परिष्कृत आटा पास्ता, सफेद चावल और परिष्कृत चीनी ये सभी चीजें फैट का रूप ले लेती है, जो पित्त में कोलेस्ट्रॉल में वृद्धि कर सकती है।
-पित्त की पथरी की समस्या है तो आप वसा वाले डेयरी उत्पादों का सेवन मत कीजिए। दूध, पनीर, दही, आइसक्रीम, भारी क्रीम और खट्टा क्रीम में उच्च स्तर के फैट होते हैं, जो पित्त की पथरी को बढ़ाने का काम करते हैं। अपने आहार में डेयरी की मात्रा कम करने की कोशिश करें या कम वसा वाले दूध को चुनें।
-पित्त की पथरी में परहेज के लिए या आपको अपने पित्ताशय की थैली की रक्षा करने के लिए कुछ खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए। सबसे बड़ी समस्या उच्च वसा वाले खाद्य पदार्थ और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ से हैं। इसलिए इनसे दूरी बनाकर रखें। खाद्य पदार्थ जैसे वनस्पति तेल और मूंगफली का तेल चिकना या तला हुआ होता है, इन्हें छोड़ना अधिक मुश्किल होता है और इससे पित्ताशय की थैली की समस्या हो सकती है। प्रोसेस्ड या व्यावसायिक रूप से बेक्ड उत्पादों की तरह ट्रांस वसा वाले खाद्य पदार्थ, पित्ताशय की थैली के स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। सफेद पास्ता, ब्रेड और शुगर जैसे परिष्कृत सफेद खाद्य पदार्थों से बचें, ये आपके पित्ताशय की थैली को नुकसान पहुंचा सकते हैं। आपको शराब और तंबाकू से भी बचना चाहिए।
-पित्त की पथरी में अम्लीय फूड नहीं खाना चाहिए। खाद्य पदार्थ जो अम्लीय होते हैं, जैसे कि खट्टे फल, कॉफी और टमाटर सॉस न केवल आपके पेट के लिए जलन पैदा कर सकते हैं बल्कि इससे आपको पित्त की पथरी भी हो सकती है।
खाना चाहिए-
फल और सब्जियों की अधिक मात्रा।
-स्टार्च युक्त कार्बोहाइड्रेट्स की अधिक मात्रा। उदाहरण के लिए ब्रेड, चावल, दालें, पास्ता, आलू, चपाती और प्लान्टेन (केले जैसा आहार)। जब सम्भव हो तब साबुत अनाजों से बनी वस्तुएं लें।
-थोड़ी मात्रा में दूध और डेयरी प्रोडक्ट लें। कम फैट वाले डेयरी प्रोडक्ट लें।
-कुछ मात्रा में जैसे फलियाँ और दालें।
-वनस्पति तेलों जैसे सूरजमुखी, रेपसीड और जैतून का तेल, एवोकाडो, मेवों और गिरियों में पाए जाने वाली असंतृप्त वसा।
-रेशे की अधिकता से युक्त आहार ग्रहण करें। यह फलियों, दालों, फलों और सब्जियों, जई और होलवीट उत्पादों जैसे ब्रेड, पास्ता और चावल में पाया जाता है।
-तरल पदार्थ अधिक मात्रा में लें, जैसे कि पानी या औषधीय चाय आदि का प्रतिदिन कम से कम दो लीटर सेवन करें।
जीवनशैली-
योग और व्यायाम-नियमित व्यायाम रक्त ऊतकों में कोलेस्ट्रॉल को घटाता है, जो कि पित्ताशय की समस्या उत्पन्न कर सकता है। प्रतिदिन तीस मिनट तक, सप्ताह में पांच बार, अपेक्षाकृत मध्यम मात्रा की शारीरिक सक्रियता, व्यक्ति के पित्ताशय की पथरी के उत्पन्न होने के खतरे पर अत्यधिक प्रभावी होती है।
योग-पित्ताशय की पथरी के उपचार के लिए जिन योगासनों का अभ्यास करना चाहिए, वह हैं-
-सर्वांगासन
-शलभासन
-धनुरासन
-भुजंगासन
पथरी निकालने के बाद कौन-सी बातों का ध्यान देना चाहिए (Prevention after removing Gall Bladder Stone)
-सर्जरी के पहले पांच घण्टे पीने की अनुमति नहीं है। फिर आप प्रतिदिन 0.5 लीटर तक, हर 20 मिनट में गैर-कार्बोनेटेड पेयजल के एक-दो सिप पी सकते हैं। ऑपरेशन के एक दिन बाद, आप कॉफी, चाय, मीठे और कार्बोनेटेड पेय, अल्कोहल को छोड़कर, सामान्य पेय व्यवस्था जारी रख सकते हैं।
-आहार पर तीन दिनों से पानी पर ग्रेटेड पॉरेज, मैश किए हुए आलू, कम वसा वाले योग, कम वसा वाले कॉटेज पनीर, बेक्ड ग्राउंड ग्रेटिड सेब के रूप में उबले हुए सब्जियां शामिल हैं। पांचवे दिन आप उन्हें 100 ग्राम सफेद रोटी क्रूटोंस जोड़ सकते हैं। पहले सप्ताह के अंत तक, दूध के साथ तरल अनाज, मैश किए हुए केले की अनुमति है।
-इसके अलावा, पित्ताशय की थैली हटाने के बाद, परहेज डेढ़ महीने तक जारी रहता है। इसका मुख्य सिद्धांत यह है कि व्यंजनों को उबला हुआ या उबला जाना चाहिए, छोटे हिस्सों में भोजन, दिन में पांच-छ बार खाने की आवृत्ति। सभी धूम्रपान उत्पादों, मसालेदार उत्पाद, मसालेदार और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों को बाहर रखा गया है।
उबला हुआ सॉसेज, शहद, हल्के पनीर, ताजा खट्टा क्रीम, ताजे फल और जामुन का स्वाद ले सकते हैं। चीनी के बजाय, स्वीटर्स का उपयोग करना बेहतर होता है। इस आहार को तालिका एन 5/हेपेटिक/कहा जाता है और इसे तीन महीने का पालन करने की आवश्यकता होगी। भविष्य में, गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट की अनुमति के साथ, आहार धीरे-धीरे विस्तारित होता है, लेकिन फिर भी मसालेदार और डिब्बाबंद व्यंजनों को धूम्रपान किया जाता है, मसालेदार उत्पादों को त्याग दिया जाना चाहिए। यकृत के पित्त कार्य को बेहतर बनाने के लिए, सब्जी फाइबर का उपयोग करना आवश्यक होता है। कच्ची सब्जियां और फल, वनस्पति तेल उपयोगी होते हैं। शराब बाहर रखा गया है।
पित्ताशय की पथरी होने के साइड इफेक्ट (Side Effect of Gall Bladder Stone)
हालांकि पित्ताशय की थैली के सर्जरी के बाद पाचन समस्याएं ज्यादा होती हैं, इसके अलावा दस्त, कब्ज की परेशानी भी होती हैं।
-फैटी खाद्य पदार्थों को पचाने में कठिनाई- सर्जरी के पहले महीने में कुछ लोगों को फैटी खाद्य पदार्थों को पचाने में थोड़ा मुश्किल होता है। कम वसा वाले आहार खाने से मदद मिल सकती है।
-अस्थायी दस्त- पित्ताशय, डाइजेस्टिव ट्रैक्ट से आने वाले बेकार तत्वों और लीवर से आने वाले बाइल को स्टोर करता है। जब पित्ताशय निकल जाता है तो लीवर से निकलने वाला बाइल सीधे छोटी आंतों में चला जाता है। पित्ताशय के न होने से छोटी आंत में इसके आने से लीवर और उसके बीच की प्रक्रिया में कुछ समय के लिए दिक्कत आती है। जिसकी वजह से कई बार रोगी को डायरिया भी हो जाता है। इसे क्लेसिस्टॉमी सिंड्रोम भी कहा जाता है, जो कि पित्ताशय निकलने के बाद कुछ दिनों तक रहता है।
-अस्थायी कब्ज- कुछ लोग पित्ताशय की थैली सर्जरी के बाद वे दर्द दवाओं से कब्ज हो जाते हैं। एक आहार जो फाइबर में समृद्ध हैं- सेम, ब्रान, पूरे अनाज, फल और सब्जियां रोकथाम और कब्ज से छुटकारा पाने में मदद कर सकते हैं।
-पित्त नली में पथरी-कुछ मामलों में, पित्ताशय की थैली सर्जरी के बाद आपके सामान्य पित्त नलिका में पत्थर बने रहेंगे। यह आपकी छोटी आंत में पित्त के प्रवाह को अवरुद्ध कर सकता है और इसके परिणामस्वरूप सर्जरी के तुरन्त बाद दर्द, बुखार, मतली, उल्टी, सूजन, और पीलिया हो सकता है। आपको अपने सामान्य पित्त नलिका में बनाए गए गैल्स्टोन को हटाने के लिए एक अतिरिक्त प्रक्रिया की आवश्यकता हो सकती है।
आंतों की चोट- हालांकि यह दुर्लभ है, आपके पित्ताशय की थैली सर्जरी के दौरान उपयोग किए जाने वाले यंत्र आपकी आंतों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। सर्जरी के दौरान इस जटिलता के जोखिम को कम करने के लिए डॉक्टर उपाय करेंगे। यदि ऐसा होता है तो आपको पेट दर्द, मतली, उल्टी और बुखार का अनुभव हो सकता है।
इसके अलावा गॉल ब्लाडैर स्टोन होने के साइड इफेक्ट के कारण दूसरे बीमारी के होने का संकेत होता है-
-पित्ताशय में पथरी होने से पीलिया और गंभीर सर्जिकल स्थिति भी उभर सकती है।
-इससे संक्रमण, मवाद बनने और गॉल ब्लैडर में छेद होने के कारण पेरिटनाइटिस (पेट की झिल्ली का रोग) भी सकता है।
-पेनक्रियाटाइटिस जैसी जानलेवा स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
-गॉल ब्लैडर में कैंसर हो सकता है। इस स्टोन से पीड़ित मरीजों के 6 से 18 प्रतिशत मामलों में आजीवन कैंसर पनपने का खतरा रहता है जो खासतौर पर उत्तर भारत में ज्यादा देखे गए हैं।
-बड़ी पथरियों से पीड़ित मरीजों में कैंसर विकसित होने की आंशका ज्यादा रहती है जबकि छोटी पथरियों से पीड़ितों में पीलिया या पेनक्रियाटाइटिस के मामले ज्यादा होते हैं।
पित्ताशय की पथरी का घरेलू उपचार (Home Remedies for Gall Bladder Stone)
आम तौर पर पित्ताशय की पथरी के लिए घरेलू नुस्ख़ो का ही ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है-
एप्पल सिडार विनेगार पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Apple Cider Vinegar Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)
सेब डॉक्टर को दूर रखने में मदद करता है। इसलिए एक गिलास सेब के रस में सेब साइडर सिरका का एक बड़ा चम्मच मिलाकर नियमित रूप दिन में एक बार सेवन करना चाहिए। सेब में मोलिक एसिड होता है जो पित्त पथरी नरमी में सहायता करता है और सिरका पत्थर के कारण कोलेस्ट्रॉल बनाने से लीवर को रोकता है। यह एक पित्त की पथरी के हमले के दौरान दर्द को कम करने के लिए एक त्वरित उपाय है।
नाशपाती पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Pear Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)
नाशपाती में पेक्टिन नामक यौगिक होता है जो कोलेस्ट्रॉल से बनी पथरी को नरम बनाता है ताकि वे शरीर से आसानी से बाहर निकल सकें। वे पथरी के कारण होने वाले दर्द तथा अन्य लक्षणों से आराम दिलाने में सहायक होता है।
चुकंदर, खीरा और गाजर का रस पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Beetroot Mixture Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)
पित्ताशय की थैली को साफ और मजबूत करने और लीवर की सफाई के लिए चुकंदर का रस, ककड़ी का रस और गाजर के रस को बराबर मात्रा में मिलाये। यह संयोजन आपको पेट और खून की सफाई में भी मदद करता है। खीरे में मौजूद उच्च पानी सामग्री और गाजर में विटामिन-सी की उच्च मात्रा मूत्राशय से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालती है।
सिंहपर्णी पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Dandelion Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)
सिंहपर्णी के पत्ते लीवर और मूत्राशय के कामकाज में सहायता, पित्त उत्सर्जन को बढ़ावा और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं। एक कप पानी में एक बड़ा चम्मच सिंहपर्णी के पत्तों को मिलाये। फिर इसे अवशोषित करने के लिए पांच मिनट के लिए रख दें। अब इसमें एक चम्मच शहद मिलायें। मधुमेह रोगियों को इस उपचार से बचना चाहिए।
पुदीना पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Mint Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)
Mint- Home remedies for Gall Bladderstone
यह पित्त तथा अन्य पाचक रसों को बढ़ाता है। इसमें टेरपिन नामक यौगिक पाया जाता है जो प्रभावी रूप से पथरी को तोड़ता है। आप पुदीने की पत्तियों को उबालकर पिपरमेंट टी भी बना सकते हैं।
इसबगोल पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Isabgol Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)
एक उच्च फाइबर आहार, पित्ताशय की थैली की पथरी के इलाज के लिए बहुत आवश्यक है। इसबगोल घुलनशील फाइबर का अच्छा स्रोत होने के कारण पित्त में कोलेस्ट्रॉल को बांधता है और पथरी के गठन को रोकने में मदद करता है। आप इसे अपने अन्य फाइबर युक्त भोजन के साथ या रात को बिस्तर पर जाने से पहले एक गिलास पानी के साथ ले सकते हैं।
नींबू पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Lemon Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)
नींबू का रस प्रकृतिक रूप से अम्लीय होने के कारण यह सिरके की तरह कार्य करता है और लीवर में कोलेस्ट्रॉल को बनने से रोकता है। हर रोज खाली पेट चार नींबू का रस लें। इस प्रक्रिया को एक हफ्ते तक अपनाएं। इससे पथरी की समस्या आसानी से दूर हो सकती है।
लाल शिमला मिर्च पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Red Capsicum Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)
2013 में हुए एक अध्ययन के अनुसार, शरीर में भरपूर मात्रा में विटामिन-सी पथरी की समस्या कम करता है। एक लाल शिमला मिर्च में लगभग 95 मिलीग्राम विटामिन-सी होता है, यह मात्रा पथरी को रोकने के लिए काफी होती है। इसलिए अपने आहार में शिमला मिर्च को शामिल करें।
साबुत अनाज पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Grain Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)
पानी में घुलनशील फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों जैसे साबुत अनाज और अन्य अनाज को अपने आहार में भरपूर मात्रा में शामिल करें। फाइबर कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के स्तर को कम कर स्वाभाविक रूप से पथरी को बनने से रोकने में मदद करते हैं।
हल्दी पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Turmeric Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)
Haldi- Home remedies for Gallbladder Stone
पित्ताशय की पथरी के लिए यह एक उत्तम घरेलू उपचार है। यह एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेट्री (प्रदाहनाशक) होती है। हल्दी पित्त, पित्त यौगिकों और पथरी को आसानी से तोड़ने में मदद करती है। ऐसा माना जाता है कि एक चम्मच हल्दी लेने से लगभग 80 प्रतिशत पथरी खत्म हो जाती है।
विटामिन सी पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (VitaminC Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)
विटामिन-सी शरीर के कोलेस्ट्रॉल को पित्त अम्ल में परिवर्तित करती है जो पथरी को तोड़ता है। आप विटामिन-सी संपूरक ले सकते हैं या ऐसे खाद्य पदार्थ खा सकते हैं जिनमें विटामिन-सी प्रचुर मात्रा में हो जैसे संतरा, टमाटर आदि। पथरी के दर्द के लिए यह एक उत्तम घरेलू उपाय है।
डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए ? (When to See a Doctor?)
पेट में दर्द इतना तेज होता है कि आप सीधे नहीं बैठ सकें। त्वचा और आंखों के सफेद भाग का पीला पड़ जाना। पेट में दर्द के साथ ठण्ड लगकर तेज बुखार आना या उल्टी आने जैसे लक्षण दृष्टिगोचर होने पर डॉक्टर के पास जायें।
गुर्दे की पथरी के लक्षण, कारण और घरेलू इलाज
Symptoms, Causes and Home Remedies for Kidney Stone
गुर्दे की पथरी या किडनी स्टोन को नेफ्रोलिथिआरीस (Nephrolithiaris) भी कहते है। गुर्दे की पथरी एक क्रिस्टलीय खनिज पदार्थ है जो गुर्दे या मूत्र पथ में कही भी हो सकती है। एक छोटा पत्थर बिना लक्षण के मूत्र के साथ बाहर निकल जाता है। लेकिन अगर पथरी 5 एमएम से ज्यादा का हो तो यह मूत्रमार्ग में रुकावट पैदा करता है, जिससे परिणामस्वरूप दर्द और उल्टी जैसे लक्षण उत्पन्न होते है। विभिन्न कारक इन पत्थरों के विकास के जोखिम का बढ़ा सकते है।
Kidney Stone
अनुवांशिकी और पर्यावरणीय कारकों के संयोजन के कारण अधिकांश पथरियाँ बनती है। जोखिम कारक में मूत्र में कैल्शियम का उच्च स्तर, मोटापा, कुछ खाद्य पदार्थ, कुछ दवाएं, कैल्शियम की खुराक, गाउट और पर्याप्त तरल पदार्थ न मिलना शामिल है। यूरीन में मौजूद कैमिकल यूरिक एसिड, फॉस्फोरस, कैल्शियम, ऑक्जालिक एसिड मिलकर पथरी बना देते है।
गुर्दे की पथरी मिनरल्स और नमक से बनी एक ठोस जमावट होती है। इनका माप छोटे से लेकर बड़ा हो सकता है। यह गुर्दे में या मूत्रपथ में पाई जाती है। मूत्रपथ में गुर्दे, मूत्रवाहिनी (Ureter), मूत्राशय (Bladder), मूत्रमार्ग, (urethra) होते है। इसमें बहुत ज्यादा दर्द होता है। लेकिन गुर्दे की पथरी के इलाज (Pathri ka ilaj) के बारे में जानने से पहले वह क्यों होता है पहले इसके बारे में जानते हैं।
1 किडनी स्टोन या गुर्दे की पथरी क्या है (What is Kidney Stone)
2 किडनी स्टोन या गुर्दे में पथरी क्यों होती है (Causes of Kidney Stone)
3 किडनी स्टोन होने के लक्षण (Symptoms of Kidney Stone)
4 किडनी स्टोन या गुर्दे की पथरी से बचने के उपाय (How to prevent Kidney Stone)
5 गुर्दे की पथरी निकालने के घरेलू उपाय (Home Remedies for Kidney Stone)
5.1 सौंफ का मिश्रण गुर्दे की पथरी निकालने में करता है मदद (Fennel seed mixture help to treat Kidney stone)
5.2 तुलसी गुर्दे की पथरी के इलाज में लाभकारी (Tulsi help to treat and remove Kidney stone)
5.3 चौलाई की सब्जी खायें और गुर्दे की पथरी से राहत पाएं (Amaranth helps to get relief from Kidney stone)
5.4 बेलपत्र खाने से गुर्दे की पथरी से मिल सकती है निजात (Bel patra beneficial in Kidney stone)
5.5 किडनी स्टोन से छुटकारा पाने में विटामिन बी है फायदेमंद (Vitamin B treat Kidney stone)
5.6 इलायची का मिश्रण गुर्दे की पथरी में फायदेमंद (Cardomam mixture helps in treatment of Kidney stone)
5.7 पथरी के छोटे छोटे टुकड़े निकालने में सहायक है पानी (Drinking plenty water may help to remove Kidney stone)
5.8 नींबू और ऑलिव ऑयल का मिश्रण किडनी स्टोन से दिलाता है छुटकारा (Lemon and olive oil mixture help to get rid from Kidney stone)
5.9 सेब का सिरका गुर्दे की पथरी के इलाज में लाभकारी (Apple cider vinegar treat Kidney Stone)
5.10 अनार का जूस गुर्दे के पथरी में है फायदेमंद (Pomegranate : Home remedies for Kidney Stone in Hindi)
5.11 तरबूज किडनी से पथरी निकलाने में करता है मदद (Watermelon helps to cure from Kidney Stone)
5.12 राजमा किडनी स्टोन के इलाज में लाभकारी (Rajma se kare kidney ki Pathri ka ilaj in Hindi)
5.13 प्याज का पानी किडनी से पथरी निकालने में फायदेमंद (Onion juice : Home remedies for Kidney Stone)
5.14 कॉर्न हेयर या कॉर्न सिल्क (मकई) गुर्दे के पथरी के इलाज में फायदेमंद (Corn hair helps to get remove from Kidney Stone)
5.15 व्हीट ग्रास गुर्दे से पथरी निकालने में फायदेमंद (Wheat grass beneficial in Kidney Stone)
5.16 खजूर गुर्दे की पथरी होने के खतरे को करता है कम (Dates help to prevent from Kidney Stone formation)
5.17 खीरे का सेवन किडनी स्टोन निकालने में लाभकारी (Cucumber : Home remedies for Kidney Stone in Hindi)
6 डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए (When to see a Doctor)
किडनी स्टोन या गुर्दे की पथरी क्या है (What is Kidney Stone)
आयुर्वेद में पथरी को अश्मरी कहा गया है, इसमें वात दोष मूत्राशय में आये हुए शुक्र सहित मूत्र को या पित्त के साथ कफ को सूखा देता है तब पथरी बन जाती है। जब यह अश्मरी मूत्र मार्ग में आ जाती है तब मूत्र त्याग में अत्यधिक रुकावट एवं असहनीय पीड़ा उत्पन्न करती है। इसके कारण अंडकोष से लेकर लिङ्ग मूत्राशय एवं पार्श्व में पीड़ा होती है। वात के कारण जब यह अश्मरी टुकड़े-टुकड़े होकर मूत्र मार्ग से निकलती है तब इसे आयुर्वेद में शर्करा कहा गया है।
किडनी स्टोन चार प्रकार के होते हैं-
कैल्शियम स्टोन
यूरिक एसिड स्टोन
स्ट्रूविटा स्टोन
सिस्टिन स्टोन
इनमें से कैल्शियम स्टोन और यूरिक एसिड स्टोन आम तौर पर सबसे ज्यादा पाये जाते हैं।
किडनी स्टोन या गुर्दे में पथरी क्यों होती है (Causes of Kidney Stone)
आजकल गुर्दे में पथरी होना जैसा सामान्य हो गया है। इसके लक्षण नजर आते ही तुरंत पथरी का इलाज (Pathri ka ilaj) करना चाहिए. आइये जानते हैं किडनी की पथरी किन कारणों से होती है।
कम मात्रा में पानी पीना इसका एक मुख्य कारण है
यूरीन में केमिकल की अधिकता
शरीर में मिनरल्स की कमी
डिहाइड्रेशन
विटामिन डी की अधिकता
जंक फूड का अति सेवन।
किडनी स्टोन होने के लक्षण (Symptoms of Kidney Stone)
वैसे तो गुर्दे में पथरी होने से दर्द होता है लेकिन इसके साथ ही कई और लक्षण होते हैं-
मूत्र त्याग के समय दर्द
पीठ के निचले हिस्से, पेट में दर्द और ऐंठन
मूत्र में रक्त आना
जी मिचलाना और उल्टी आना
दुर्गन्धयुक्त पेशाब
बार-बार पेशाब आना परंतु खुलकर पेशाब न आना
बुखार, पसीना निकलना आदि
किडनी स्टोन या गुर्दे की पथरी से बचने के उपाय (How to prevent Kidney Stone)
किडनी में पथरी होने पर जल्द से जल्द पथरी का इलाज (Pathari ka ilaj) कराना चाहिए. गुर्दे में पथरी न हो इसके लिए आहार और जीवनशैली में कुछ बदलाव लाने चाहिए। जैसे-
ऐसे व्यक्ति जो कैल्शियम ऑक्जालेट गुर्दे की पथरी से पीड़ित होते है उन्हें ऑक्जालेट से भरपूर आहार नहीं लेने चाहिये। ऐसे आहार हैं- मूंगफली, पालक, चुकन्दर, शीशम के बीज, चॉकलेट, जिमीकंद (Sweet Potatoes)।
अधिक मात्रा में प्रोटीन न लें।
सोडियम की अधिक मात्रा न लें। जंक फूड, डिब्बा बंद खाना और नमक के बहुत अधिक सेवन से बचें।
पालक, साबुत अनाज आदि में ऑक्सलेट पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। इसका सेवन न करें।
टमाटर के बीज, बैंगन के बीज, कच्चा चावल, उड़द और चने का अधिक सेवन करने से स्टोन की समस्या बढ़ जाती है। अधिक से अधिक पानी पिएँ और कोल्ड ड्रिंक का सेवन न करें, इसमें मौजूद फॉस्फोरिक एसिड स्टोन के खतरे को और बढ़ाता है।
शरीर में यूरिक एसिड को बढ़ने न दें इसलिये मांसाहार का सेवन बिल्कुल भी न करें।
गुर्दे की पथरी निकालने के घरेलू उपाय (Home Remedies for Kidney Stone)
गुर्दे की पथरी निकालने के लिए लोग सबसे पहले घरेलू उपाय ही आजमाते हैं। तो चलिये जानते हैं कि वे घरेलू उपाय कौन-कौन से हैं-
सौंफ का मिश्रण गुर्दे की पथरी निकालने में करता है मदद (Fennel seed mixture help to treat Kidney stone)
सौंफ मिश्री, सूखा धनिया, इनको 50-50 ग्रा. मात्रा में लेकर रात को 11/2 कप ठंडा पानी मिलाकर पीने से पथरी पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाती है।
तुलसी गुर्दे की पथरी के इलाज में लाभकारी (Tulsi help to treat and remove Kidney stone)
तुलसी का इस्तेमाल करना किडनी स्टोन दूर करने का काफी प्रचलित घरेलू उपाय (Kidney stone ke gharelu upay) है. इसके लिए प्रतिदिन 5-7 तुलसी के पत्तों को चबाकर खाएँ। इसमें एसिटिक एसिड एवं अन्य जरूरी तेल होते है जो पथरी को तोड़कर पेशाब के रास्ते बाहर निकालते है। यह दर्द निवारक की तरह भी काम करती है।
चौलाई की सब्जी खायें और गुर्दे की पथरी से राहत पाएं (Amaranth helps to get relief from Kidney stone)
चौलाई की सब्जी गुर्दे की पथरी से निजात दिलाती है। यह पथरी को गलाने का रामबाण इलाज (Pathri ka ilaj) है।
बेलपत्र खाने से गुर्दे की पथरी से मिल सकती है निजात (Bel patra beneficial in Kidney stone)
2-3 बेलपत्र को पानी के साथ पीस लें और इसमें एक चुटकी काली मिर्च मिलाकर खाएँ। दो सप्ताह तक इसका सेवन करने से गुर्दे की पथरी निकल आती है।
किडनी स्टोन से छुटकारा पाने में विटामिन बी है फायदेमंद (Vitamin B treat Kidney stone)
शोध के अनुसार विटामिन बी की 100-150एमजी की नियमित खुराक लेने से गुर्दे की पथरी से निजात मिलती है।
इलायची का मिश्रण गुर्दे की पथरी में फायदेमंद (Cardomam mixture helps in treatment of Kidney stone)
एक चम्मच इलायची, खरबूजे के बीज की गिरी और दो चम्मच मिश्री एक कप पानी में डालकर उबालें ठंडा होने के बाद सुबह-शाम पिएँ।
पथरी के छोटे छोटे टुकड़े निकालने में सहायक है पानी (Drinking plenty water may help to remove Kidney stone)
छोटे पथरी को अधिकांश रूप से किसी खास इलाज की जरूरत नहीं होती। एक दिन में 7-8 गिलास पानी पीकर पथरी निकल जाती है।
नींबू और ऑलिव ऑयल का मिश्रण किडनी स्टोन से दिलाता है छुटकारा (Lemon and olive oil mixture help to get rid from Kidney stone)
4 चम्मच नींबू का रस व समान मात्रा में ऑलिव ऑयल मिलाएँ। इसे जरूरत के हिसाब से पानी के साथ पिएँ। इसको दिन में 2-3 बार करें। तीन दिन इसे लगातार करें यदि पथरी बाहर निकल जाती है तो इसे आगे न दोहराएँ।
सेब का सिरका गुर्दे की पथरी के इलाज में लाभकारी (Apple cider vinegar treat Kidney Stone)
सेब के सिरके में क्षार के गुण होते है यह किडनी स्टोन को घुलने में मदद करता है। 1 कप गुनगुने पानी 2 चम्मच विनेगर व 1 चम्मच शहद मिलाकर दिन में बार-बार पिएँ।
अनार का जूस गुर्दे के पथरी में है फायदेमंद (Pomegranate : Home remedies for Kidney Stone in Hindi)
प्रतिदिन अनार का जूस पिएँ। अनार में मौजूद पोटाशियम उन मिनरल क्रिसटल्सको बनने से रोकता है जिनके कारण पथरी बनती है। यह अपने क्षारीय गुण के कारण पथरी को बनने से रोकता है और यह मूत्र में एसिड के स्तर को ठीक रखता है। यह पथरी की रोकथाम के लिए सबसे अच्छा घरेलू उपाय माना जाता है.
तरबूज किडनी से पथरी निकलाने में करता है मदद (Watermelon helps to cure from Kidney Stone)
तरबूज में पोटैशियम होता है जो किडनी को मजबूत बनाने में सहायक होते है। ये यूरीन में एसिड लेवल को समान रखता है। पोटाशियम के साथ इसमें पानी की मात्रा भी अधिक होती है। इसे खाने से शरीर में पानी बढ़ता है व पथरी यूरीन के द्वारा निकल जाती है। इसके अलावा तरबूज के रस में एक चौथाई चम्मच धनिया पाउडर डालकर सेवन करें। दिन में दो-तीन बार ऐसा करें।
राजमा किडनी स्टोन के इलाज में लाभकारी (Rajma se kare kidney ki Pathri ka ilaj in Hindi)
राजमा को भिगोकर उसे उबाल लें। इस पानी को ठंडा कर के इसे दिन में कई बार पिएँ।
प्याज का पानी किडनी से पथरी निकालने में फायदेमंद (Onion juice : Home remedies for Kidney Stone)
2 प्याज को एक गिलास पानी में डालकर धीमी आँच में उबालें पकने पर उसे ठण्डा कर लें अब प्याज को पीस लें और छानकर रस निकालकर 1-2 दिन तक पिएँ।
कॉर्न हेयर या कॉर्न सिल्क (मकई) गुर्दे के पथरी के इलाज में फायदेमंद (Corn hair helps to get remove from Kidney Stone)
कॉर्न हेयर या कॉर्न सिल्क (मकई) के सेवन से किडनी स्टोन ठीक होता है। इसके सेवन से यूरिन ज्यादा आता है और पथरी छोटे-छोटे कणों के द्वारा बाहर निकल जाती है।
व्हीट ग्रास गुर्दे से पथरी निकालने में फायदेमंद (Wheat grass beneficial in Kidney Stone)
व्हीट ग्रास को पानी में उबालकर ठण्डा कर लें इसके नियमित सेवन से गुर्दे की पथरी और गुर्दे से जुड़ी दूसरी बिमारियों में काफी आराम मिलता है।
खजूर गुर्दे की पथरी होने के खतरे को करता है कम (Dates help to prevent from Kidney Stone formation)
खजूर को रात भर पानी में भिगाकर सुबह खाए इसमें फाइबर की अच्छी मात्रा होती है। गुर्दे की पथरी होने के खतरे को कम करता है।
Khajoor
खीरे का सेवन किडनी स्टोन निकालने में लाभकारी (Cucumber : Home remedies for Kidney Stone in Hindi)
खीरे का सेवन करें इसमें पथरी निकलने में आसानी होती है।
ये घरेलू उपाय (kidney stone ke gharelu upay) लाभकारी तो होते हैं लेकिन अगर पथरी बड़ी हो या स्थिति गंभीर हो तो पथरी का इलाज (Pathri ka ilaj) कराएं, सिर्फ घरेलू उपायों पर निर्भर ना रहें.
डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए (When to see a Doctor)
गुर्दे की पथरी का दर्द बहुत ही असहनीय और देर तक बना रहता है। दर्द के साथ जी मिचलाना और उल्टी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते है। गुर्दे की पथरी के कारण गुर्दे या मूत्रपथ में संक्रमण भी हो सकता है अतः दर्द उठने पर ही तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क कर जाँच कराए एवं पथरी होने पर तुरंत इलाज (Pathri ka ilaj) करवाएं।
Tuesday, October 10, 2023
नौसादर के जगब के फायदे
नौसादर
1. दांतों के कीड़े :
दांतों में कीड़े लगने से दांत में गड्ढ़े बन जाते हैं। फिटकरी, सेंधानमक तथा नौसादर बराबर मात्रा में लेकर बारीक पॉउडर बना लें। इस पॉउडर से रोजाना सुबह-शाम दांतों व मसूढ़ों पर मलने से दांतों के सभी रोग ठीक होते हैं।
लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग नौसादर और लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग अफीम को मिला लें। इसे कीड़े लगे हुए दांतों में रखने से कीड़ा मरकर बाहर आ जाता है।
2. खट्टी डकारे : नौसादर, कालीमिर्च 5 ग्राम इलायची दाना, 10 ग्राम पोदीना का चूर्ण एक साथ पीसकर रख लें। इसे रोज 3 बार आधा ग्राम की मात्रा में पानी के साथ लेने से खट्टी डकारें, बदहजमी, प्यास का अधिक लगना, पेट में दर्द, जी मिचलाना और छाती में जलन आदि रोगों से छुटकारा मिलता है।
3. खांसी : 1 कप पानी में 1 चुटकी नौसादर मिलाकर दिन में 3 बार पीने से खांसी ठीक हो जाती है।
4. पुराना सिर दर्द : 10 ग्राम नौसादर को पीस लें, फिर इसे बोतल में भरकर पानी डाल दें। इसे 1-1 चम्मच सुबह-शाम 10-12 दिनों तक लेने से पुराने सिर के दर्द में लाभ होता है। सिर दर्द होने से 1 घण्टे पहले और दर्द बन्द होने के 1 घण्टे बाद 1-1 चम्मच पिलाने से दर्द ठीक हो जाता है।
5. अण्डकोष की सूजन और दर्द :
1 ग्राम नौसादर को 50 मिलीलीटर शराब में पीसकर अण्डकोषों पर लगाने से अण्डकोषों की सूजन कम हो जाती है।
10 ग्राम नौसादर को पीसकर 400 मिलीलीटर पानी में उबालें इसी पानी में कपड़ा भिगोकर अण्डकोषों को सेंकने से सुजाक के कारण अण्डकोषों की सूजन और दर्द सही हो जाते हैं।
6. दांतों का दर्द :
नौसादर को ज्वार के दाने के बराबर रूई में लपेटकर सड़न वाले दांतों के नीचे दबाने से दांतों में हो रही पीड़ा नष्ट होती है।
नौसादर, फिटकरी और सेंधानमक बराबर मात्रा में लेकर बारीक पीसकर पॉउडर (मंजन) बना लें। इसके मंजन से रोजाना मंजन करें तथा सुबह-शाम गर्म पानी में नमक डालकर कुल्ला करें। इससे दांतों के दर्द में आराम रहता है।
नौसादर को रूई में लपेटकर दर्द वाले दांत की जड़ में दबाकर रखें।
नौसादर और कपूर को मिलाकर टिकिया अथवा पोटली बनाकर दांतों के खोखल में दबाकर रखें। इससे दांतों के कीड़े मर जाते हैं तथा जबड़े का दर्द खत्म होता है।
7. श्वास या दमा :
नौसादर पान में रखकर खाने से श्वास-नली के विभिन्न रोग नष्ट हो जाते हैं।
नौसादर को चिलम में रखकर इसका धूम्रपान करने से श्वास रोग नष्ट हो जाते हैं।
नौसादर 10 ग्राम पीसकर तवे के बीचोबीच रख दें। फिर इसके चारों तरफ 3-4 इंच दूर, 200 ग्राम पिसे हुए नमक को गोलाकार में रख दें। तवे के ऊपर एक बड़ा प्याला का कटोरा से ढक दें। फिर तवे को चूल्हे पर चढ़ाकर करीब 1 घंटे तक धीमी आंच पर रखना चाहिए। इसे 1 चुटकी प्रतिदिन शक्कर के बताशे में रखकर दिन में 2 बार लेने से दमे में राहत मिलती है।
8. बादी का बुखार : नौसादर 3 ग्राम और कालीमिर्च का चूर्ण 2 ग्राम को मिलाकर देने से पारी का बुखार नहीं चढ़ता है।
9. मोतियाबिन्द : भुने हुए नौसादर को बारीक पीसकर आंखों में सोते समय सलाई के द्वारा लगाने से मोतियाबिन्द ठीक हो जाता है।
10. रतौंधी (रात में न दिखाई देना) : 1 ग्राम नौसादर को 3 ग्राम असली सिंदूर में अच्छी तरह मिलाकर शीशी में भरकर शहद मिलाकर रख दें। इस मिश्रण को सलाई से आंखों पर लगाने से रतौंधी की बीमारी दूर हो जाती है।
11. जीभ का स्वाद ठीक करना : नौसादर 5 ग्राम और कालीमिर्च 5 ग्राम को पीसकर इसमें शहद मिलाकर जीभ पर रगड़े तथा गंदा पानी बाहर गिरने दें। इससे जीभ की कड़वाहट दूर होती है।
12. मसूढ़ों की सूजन : नौसादर, संगजराहत एवं फिटकरी को बराबर मात्रा में लेकर बारीक पीसकर पॉउडर (मंजन) बना लें। रोजाना इससे मसूढ़ों पर मलने से मसूढ़ों की सूजन दूर होती है।
13. गर्भनिरोध : नौसादर तथा फिटकरी को बराबर मात्रा में पानी के साथ पीसकर योनि में रखने से स्त्री बन्ध्या (बांझ) हो जाती है।
14. जुकाम : नौसादर, कपूर और चूने को बराबर मात्रा में मिलाकर 1 शीशी मे भरकर रख लें। इस शीशी को बन्द करके अच्छी तरह से हिला लें और फिर शीशी को खोलकर नाक से सूंघने से बन्द जुकाम खुल जाता है और सिर के दर्द में भी लाभ मिलता है।
15. चोट : चोट और मोच से पैदा दर्द और सूजन पर नौसादर और कलमीशोरा पानी में घोलकर कपड़े भिगोकर पट्टी करने से लाभ होता है।
16. मोच होने पर : नौसादर, कलमी शोरा 10-10 ग्राम पीसकर 200 मिलीलीटर पानी में मिलाकर इससे कपड़ा भिगोकर बार-बार मोच पर लगायें।
17. गिल्टी (ट्यूमर) : नौसादर को पानी में डालकर किसी कपड़े को उस में भिगोकर गिल्टी पर बांधने से आराम मिलता है।
18. प्लेग (चूहों से होने वाला) रोग : नौसादर, आक के फूल, शुद्ध वत्सनाग और पांचों नमक बराबर मात्रा में मिलाकर बारीक पीस लें। फिर इसे 3 घंटे तक प्याज के बारीक रस में घोंटकर लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग की छोटी-छोटी गोलियां बना लें। इसकी 1-1 गोली ताजे पानी के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम और रात को खाने से प्लेग के रोगी को लाभ होता है।
19. आधासीसी (माइग्रेन, आधे सिर का दर्द ) अधकपारी :
नौसादर और कुटकी को पीसकर जल में मिलाकर माथे पर लेप की तरह लगाने से आधासीसी का दर्द दूर हो जाता है।
नौसादर और बड़ी इलायची के छिलकों को महीन पीसकर जिस तरफ आधासीसी है उस तरफ की नाक के छेद से सूंघने से आधासीसी खत्म हो जाती है।
लगभग 10-10 ग्राम नौसादर और हल्दी को पीसकर सूंघने से आधे सिर का दर्द दूर हो जाता है।
लगभग लगभग आधा ग्राम से लगभग 1 ग्राम नौसादर खिलाने से आधासीसी का दर्द खत्म हो जाता है।
10 ग्राम नौसादर और 1 ग्राम कपूर को पीसकर चुटकी भर नाक से जोर से सूंघने से आधाशीशी (आधे सिर का दर्द), पूरे सिर का दर्द और दांत का दर्द ठीक हो जाता है।
20. नाक से खून का आना (नकसीर) : पिसे हुए नौसादर को नाक से सूंघने से नकसीर (नाक से खून बहना) रुक जाती है।
21. पेट में दर्द :
नौसादर ठीकरी 10 ग्राम, अजवायन 10 ग्राम, भुनी हुई हींग 10 ग्राम सौंठ 10 ग्राम को अच्छी तरह बारीक पीसकर रख लें, फिर उसमें मीठा सोडा 10 ग्राम की मात्रा में मिलाकर रख लें, इस बने चूर्ण को 3 ग्राम लेकर गर्म पानी के साथ पीने से लाभ होता है।
नौसादर 4 ग्राम, सुहागा 4 ग्राम और सौंफ 2 ग्राम को अच्छी तरह से बारीक पीसकर उसमें मीठा सोडा 4 ग्राम की मात्रा में मिलाकर रख लें, फिर आधे से 2 ग्राम की मात्रा में सुबह, दोपहर और शाम को रोगी को देने से पेट की बीमारियों में आराम होता है।
नौसादर, सुहागा, एलुआ, हल्दी और फिटकिरी को बारीक पीसकर पानी मिलाकर लेप बना लें, फिर इस लेप को पेट पर लेप लगाने से पेट के दर्द में आराम मिलता है।
नौसादर लगभग 2 ग्राम को पानी में मिलाकर पीने से पेट के दर्द में आराम मिलता है।
22. स्तनों के रोग : नौसादर 8 ग्राम को लगभग 50 मिलीलीटर पानी में अच्छी तरह घोलकर स्तनों पर लगाने से स्तनों में पड़ी हुई गांठें पिघल जाती हैं तथा सूजन भी समाप्त हो जाती है। नोट : पहली बार स्तनों में दूध आते समय प्राय: गांठ पड़ जाती है। जिसके कारण सूजन आ जाती है तथा दर्द होने लगता है।
23. उपदंश (फिरंग) : नौसादर को पानी में घोल लें, फिर उसमें एक साफ कपड़ा भिगोकर गांठ के ऊपर से रख दें तो वह बैठ जाती है।
24. हिस्टीरिया : नौसादर और चूना को बराबर मात्रा में मिलाकर एक शीशी में अच्छी तरह से बन्द करके रख दें और जब हिस्टीरिया या सिरदर्द हो या बेहोशी, गुल्यवायु, हो तो शीशी को खोलकर उसकी गैस सूंघा दें, इससे तुरन्त ही लाभ मिलता है।
25. मिर्गी (अपस्मार) :
नौसादर और बिना बुझा हुआ चूने को बराबर भाग में लेकर एक शीशी में भरकर डॉट लगाकर रख दें। मिर्गी का दौरा आने पर रोगी की नाक से लगाकर तुरन्त हटा लेना चाहिए। इस तरह से रोगी होश में आ जाता है।
50 ग्राम नौसादर को 1 लीटर केले के पत्तों के रस में डालकर रख दें और मिर्गी का दौरा पड़ने पर नाक में इस रस को टपकाने से यह रोग खत्म हो जाता है।
26. मुंह को सुन्न करना : अकरकरा और नौसादर को पीसकर तालु और मुख (मुंह) में बहुत ज्यादा रगड़ने से मुंह में इतनी शून्यता (सुन्न हो जाना) पैदा हो जाती है कि अगर मुंह में अंगारे भी भर लें तो मुंह नहीं जलता है।
27. सिर दर्द :
नौसादर और सीप के चूर्ण को बराबर मात्रा में लेकर सूंघने से सिर का दर्द दूर हो जाता है।
नौसादर में चोआ डालकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को चुटकी भर नाक में रखकर सूर्य की ओर देखने से छींकें आती हैं। इससे सिर का दर्द दूर हो जाता है।
28. बच्चों के रोग : 2 चावल भर नौसादर लें, जितनी उम्र का बच्चा हो उतनी मात्रा के हिसाब से हर रोज दूध में मिलाकर पिला दें। इससे बच्चे का जिगर नहीं बढ़ेगा।
Thursday, August 24, 2023
*एडी का दर्द*
Monday, August 21, 2023
गर्मी के लिए वाजी रसायन बनाने के लिए आवाशक घटक
Wednesday, August 9, 2023
समय माहवारी बंद हो जाने पर प्राचीन यूनानी चिकित्सा
Sunday, April 30, 2023
पोषक तत्वों से भरपूर खीरा: गर्मियों का हीरा
Monday, April 24, 2023
पाइल्स की समस्या से राहत पाने के लिए
Sunday, December 25, 2022
गुड़ खाने के बेहतरीन लाभ (स्पेशल गुड सर्दियों के लिए)
गुड़ खाने के बेहतरीन लाभ (स्पेशल गुड सर्दियों के लिए) 
1- काजू -1kg
2- बादाम -1kg
3- सोंफ - 500gm
4- मगज - 1 kg
5- अजवान - 200 gm
6- मूंगफली - 4 kg
7- तिल - 2 kg
8- इलाइची - 100 gm
9- घी - 1 kg -
10 -गोला (खोपरा) - 4 kg
गुड - 50 kg
गुड़ खाने के बेहतरीन लाभ :
गुड़ के लाभ सभी तक पहुंचायें
आप स्वस्थ हों देश स्वस्थ हो और साथ ही अपना व देश का करोड़ों रुपये बचायें
★ गन्ने के रस से गुड़ बनाया जाता है। गुड़ में सभी खनिज द्रव्य और क्षार सुरक्षित रहते हैं।
★ गुड़ का सेवन करने से शरीर में होने वाले कई प्रकार के रोग ठीक हो जाते हैं। मिठाई और चीनी की अपेक्षा गुड़ अधिक लाभकारी है।
★ गुड़ से कई प्रकार के पकवान बनाये जाते हैं जैसे- हलुआ, चूरमा तथा लपसी आदि।
★ गुड़ खाने से थकावट मिट जाती है। परिश्रमी लोगों के लिए गुड़ खाना अधिक लाभकारी है। मटके में जमाया हुआ गुड़ सबसे अच्छा होता है।
★ पुराना गुड़ का गुण : पुराना गुड़ हल्का तथा मीठा होता है। यह आंखों के रोग दूर करने वाला, भुख को बढ़ने वाला, पित्त को नष्ट करने वाला, शरीर में शक्ति को बढ़ाने वाला और वात रोग को नष्ट करने वाला तथा खून की खराबी को दूर करने वाला होता है।
★ अदरक के साथ गुड़ खाने से कफ खत्म होता है। हरड़ के साथ इसे खाने से पित्त दूर होता है तथा सोंठ के साथ गुड़ खाने से वात रोग नष्ट होता है।
आधुनिक विज्ञान के अनुसार : 100 ग्राम गुड़ में लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग खनिज द्रव्य होता है। चीनी में खनिज द्रव्यों और क्षारों का अभाव होता है। इसलिए चीनी की अपेक्षा गुड़ खाना अधिक लाभकारी होता है। गुड़ में बिटामिन `बी´-1, `बी´-2, विटामिन `सी´ और अल्पमात्रा में विटामिन `ए` होता है।
प्रकृति : गुड़ की प्रकृति गर्म होती है।
गुड के औषधीय गुण :गुड़ पेट को हल्का तथा साफ करता है। यह आंतों के घावों को ठीक करने में लाभकारी है तथा सर्दी-जुकाम की अवस्था में इसका सेवन करना अधिक फायदेमन्द होता है। यह कफ को नष्ट करता है तथा हाजमें को बढ़ाता है। गुड़ खांसी और सांस को रोकता है। इसका जला हुआ खार खांसी को दूर करता है।
गुड़ सेवन से रोगों का उपचार (औषधीय प्रयोग):
१) जीभ और मुंख का सूखापन: गुड़ में जायफल 360 से 480 मिलीग्राम मिलाकर खायें। प्रतिदिन सुबह शाम इसके सेवन से जीभ और चेहरे का सूखापन दूर हो जाता है।
२) कब्ज: 2 से 4 ग्राम गुड़ के साथ हरीतकी का चूर्ण सुबह और शाम सेवन करने से कब्ज की समस्या दूर होती है।
३) कैन्सर: 2 चम्मच गुड का शीरा 1 कप पानी में मिलाकर दिन में 3 बार पिलायें, 90 दिन तक लगातार ऐसा करने से कैंसर ठीक हो जाता है।
४)गला बैठना:
• 250 मिलीग्राम से 950 मिलीग्राम गुग्गुल को गुड़ के साथ रोजाना 3 से 4 बार सेवन करने से गले का बैठना ठीक हो जाता है।
• 10 ग्राम उबले हुए चावल, 10 ग्राम गुड़ और 40 मिलीलीटर पानी एक साथ मिलाकर पका लें और पकने पर उसमें घी मिलाकर दिन में सुबह और शाम बार सेवन करने से आराम मिलता है।
५) अग्निमान्द्य (अपच):
• गुड़ के साथ जीरा मिलाकर सेवन करने से भुख का कम लगना (अग्निमान्द्य), शीत, और वात रोग में लाभ मिलता है।
• गुड़ और सोंठ का चूर्ण मिलाकर खाने से अपच की समस्यां दूर हो जाती है।
६) सर्दी, खांसी तथा जुकाम:
• 10 ग्राम गुड़ को 40 ग्राम ताजे दही और 3 ग्राम काली मिर्च के चूर्ण के साथ रोजाना सुबह 3 दिनों तक नियमित लेने से जुकाम ठीक हो जाता है।
• सर्दी के मौसम में ठण्ड से बचने के लिये गुड़ और काले तिल के लड्डू खाने चाहिये। इसको खाने से जुकाम और खांसी आदि रोग नहीं होते हैं।
• 100 ग्राम गुड़ में 1 चम्मच पिसी हुई सोंठ और 1 चम्मच कालीमिर्च मिलाकर इसके 4 भाग कर लें। इसे दिन में 4 बार खाने से खांसी व जुकाम में लाभ मिलता है।
• सर्दी के मौसम में काले तिल के साथ गुड़ मिलाकर खाने से खांसी, जुकाम और ब्रोंकाइटिस जैसे कष्टकारी रोगों नहीं होते हैं।
• यदि जुकाम की अवस्था अधिक गंभीर हो तो 30 ग्राम पुराना गुड़, 6 ग्राम पिसी हुई काली मिर्च और 60 ग्राम दही को एक साथ मिलाकर सुबह और शाम को खाने से जुकाम ठीक होकर दुबारा नहीं होता है। जुकाम बिगड़ जाने के कारण हल्का बुखार, अरुचि (खाने का मन नहीं करना), बलगम गिरना, खांसी, नाक में से बदबूदार पानी निकलना, सिर दर्द आदि लक्षण उत्पन्न हो तो गुड़ का सेवन करने से लाभ मिलता है।
• सर्दी के मौसम में गुड़ और काले तिल के लड्डू बनाकर खाने से जुकाम, खांसी, दमा व ब्रांकाइटिस आदि रोग दूर हो जाते हैं। ये रोग न होने की अवस्था में भी तिल-गुड़ के लड्डू खाने से शरीर स्वास्थ्य रहता है और खांसी, जुकाम जैसे रोग नहीं होते हैं।
७) दमा:
• दमा रोग होने पर 3 ग्राम से 10 ग्राम तक की मात्रा में गुड़ और इसके बराबर ही सरसों का तेल इसमें मिलाकर 21 दिनों तक सेवन करें इससे लाभ मिलेगा।
• 15 ग्राम गुड़ और 15 ग्राम सरसों का तेल मिलाकर चाटने से लाभ दमा व सूखी खांसी का रोग ठीक होता है।
• 10 ग्राम गुड़ तथा 10 ग्राम सरसों का तेल मिलाकर खाने से 30 दिन अथवा 40 दिन में श्वास रोग ठीक हो जाता है।
• 10 ग्राम गुड़ तथा 10 ग्राम सरसों का तेल को आपस में मिलाकर लेप जैसा बना लें और इसे कम से कम 40 से 60 दिनों तक प्रतिदिन सुबह तथा शाम को चाटें। इसी प्रकार 40 या 60 दिनों तक चाटने से श्वास रोग जड़ से नष्ट हो जाता है।
• दमे के रोगियों को सर्दी के मौसम में गुड़ और काले तिल के लड्डू का सेवन कराएं इससे उसे अधिक लाभ मिलेगा। दमा न होने पर भी इसका सेवन करने से कई प्रकार के रोग नहीं होते हैं जैसे- दमा, खांसी तथा जुकाम आदि।
८) कफ, विसर्प और हृदय रोग:
• कफ, विसर्प और हृदय के रोग होने पर गुड़ और घी को बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करने से लाभ मिलता है।
• हृदय रोगियों को गुड़ का सेवन कराना लाभकारी होता है इससे यह रोग ठीक हो जाता है।
• हृदय की कमजोरी तथा शारीरिक कमजोरी को दूर करने के लिए गुड़ खाना लाभकारी होता है।
९) मूत्रकृच्छ (पेशाब करने में कष्ट या जलन): गुड़ को आंवले के चूर्ण के साथ सेवन करने से वीर्य की वृद्धि होती है, कीड़े खत्म होते हैं व प्यास भी मिट जाती है। इसके सेवन करने से पेशाब करने पर कष्ट तथा जलन होने की समस्यां दूर हो जाती है।
१०) पेट के रोग:
• गुड़ के साथ बेलगिरी का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से खूनी दस्त, दर्द, मल का रूक कर आना और पेट का बड़ा होना आदि आदि रोग ठीक हो जाते हैं।
• गुड़ में एक चम्मच अजवायन मिलाकर चाटने से पेट दर्द ठीक हो जाता है।
• भोजन करने के बाद छोटी-सी गुड़ की डली 10 ग्राम की मात्रा में मुंह में रखकर धीरे-धीरें चूसने से मुंह में खट्टा पानी आना बंद हो जाता हैं, इससे अम्लपित्त, पेट की गैस, मुंह के छाले, हृदय की कमजोरी और शरीर का ढ़ीलापन दूर हो जाता है।
• गुड़ में काकजंगा मिलाकर खाने से पेट की बीमारीयां ठीक हो जाती हैं।
• गुड़ के साथ लालमिर्च का सेवन करने से पेट दर्द में आराम मिलता है।
• 10 ग्राम गुड़ को खाना खाने के बाद लेने से पेट में गैस बनने की समस्यां दूर हो जाती है।
• गुड़ और मेथी दाना को पानी में उबालकर इस पानी को पीने से पेट में गैस बनने की शिकायत दूर हो जाती है।
• खाने के बाद 25 ग्राम गुड़ प्रतिदिन खाने से पेट का गैस, पेट का बढ़ना आदि रोग ठीक हो जाता है तथा शरीर का स्वास्थ्य भी बना रहता है।
११) खून में दोष: गुड़ के साथ अजवायन का चूर्ण मिलाकर सेवन करने या गुड़ को पानी में डालकर काढ़ा बनाकर 7 दिनों तक सेवन करने से खून में उत्पन्न दोष दूर हो जाते हैं।
१२) गुर्दे में दर्द: गुर्दे में दर्द होने पर 10 ग्राम गुड़ और बुझा हुआ चूना आधा ग्राम दोनों को मिलाकर 2 गोलियां बना लें। पहले 1 गोली गर्म जल से लें। यदि इससे दर्द दूर न हो तो दूसरी गोली फिर लें, इससे दर्द ठीक हो जाएगा।
१३) पुत्रोत्पत्ति:
• जिनके बार-बार कन्या (बेटी) पैदा होती है, यदि वे पुत्र उत्पन्न करना चाहते हैं तो एक मोर के पंख का चंद्रमा की शक्ल वाला भाग काट-पीसकर इसे थोड़ा गुड़ में मिलाकर 1 गोली बना लें। इसी प्रकार से मोर के तीन पंखों की तीन गोलियां बना लें। गर्भ के दूसरे महीने के अंत में, जब स्त्री का दाहिना स्वर चल रहा हो, अर्थात दाहिने नथुने से श्वांस चल रहा हो तो प्रतिदिन प्रात: 1 गोली तीन दिन तक जीवित बछड़े वाली गाय के दूध में मिलाकर खिला दें। उस दिन केवल गाय के दूध का ही सेवन करें। खाना न खाएं शाम को चावल खा सकते हैं। ऐसा करने से निश्चय ही पुत्र उत्पन्न होगा और चांद जैसा गोरा बच्चा पैदा होगा। यह हजारों बार परीक्षित है।
• जिस स्त्री के कन्या ही कन्या जन्म लेती हो उसे मासिकधर्म में पलास (ढाक) का एक पत्ता दूध में पीसकर पिला दें। ऐसा करने के बाद जो सन्तान होगा, वह पुत्र ही होगा।
१४) आधे सिर में दर्द (माइग्रेन): दर्द सूर्य के निकलने तथा अस्त होने के साथ घटे-बढे़ उसे दूर करने के लिए 12 ग्राम गुड़ को 6 ग्राम घी के साथ मिलाकर सुबह सूर्योदय से पहले तथा रात को सोते समय खाएं। इससे लाभ मिलेगा।
१५) आंखों का रोग:
• गुड़ को रात के समय में पानी में भिगोंकर रखें और सुबह साफ कपड़े से छान लें। इस पानी को 100 बार छानकर पीने से आंखों का दर्द ठीक हो जाता है। गुड़ को जितनी अधिक बार छाना जाएगा, वह उतना ही अधिक ठंडा होगा और उतना ही अधिक लाभ प्रदान करेगा।
• गुड़ या चीनी मिलाकर अंजन (काजल) बना लें। इस काजल को आंखों में लगाने से आंखों में से पानी झर जाता है और धुंऐ से होने वाला आंखों का रोग ठीक हो जाता है।
१६) कनखजूरे के काटने के कारण आई सूजन: गुड़ को जलाकर कनखजूरे के काटे हुए स्थान पर लगाने से लाभ मिलता है। काटने के कारण सूजन आई हो तो वह भी मिट जाती है।
१७) उर:क्षत (छाती में जख्म): यदि छाती के अन्दर का मांस फट गया हो और जख्म हो गया हो तो इसे ठीक करने के लिए दिन में 3 बार गुड़ का सेवन करें इससे लाभ मिलेगा।
१८) पेशाब साफ न आना: गर्म दूध में गुड़ मिलाकर पीने से पेशाब साफ और खुलकर आता है। पेशाब की रुकावट दूर हो जाती है। इसका प्रयोग प्रतिदिन 2 बार करने से लाभ मिलता है।
१९) हिचकी:
• पुराना सूखा गुड़ पीसकर इसमें पिसी हुई सोंठ मिलाकर सूंघने से हिचकी का आना बंद हो जाता है।
• पुराना सूखा गुड़ तथा इसमें सोंठ मिलाकर छोटी-छोटी गोली बना लें फिर एक-एक गोली चूसने से हिचकी में आराम मिलता है ।
• रोज़ाना दिन में सुबह और शाम गुड के साथ लगभग 4 ग्राम सज्जीखार का 21 दिन तक सेवन करने से हिचकी आना बंद हो जाता है।
२०) पेट के कीडे:
• पेट के कीड़े मारने के लिए पहले रोगी को गुड़ खिलायें इससे आंतों में चिपके कीड़े निकलकर बाहर आ जाएंगे फिर कृमिनाशक औषधि लेने से कीड़े सरलता से बाहर निकल आते हैं।
• 20 ग्राम गुड़ को खाने के बाद 1 ग्राम खुरासानी अजवायन को बारीक पीसकर चूर्ण बना लें फिर इसे पानी के साथ लें इससे पेट की आंतों में मौजूद कीड़े मरकर मल के द्वारा बाहर निकल जाते हैं।
• 25 ग्राम से लेकर 40 ग्राम की मात्रा में गुड़ खाने के बाद लगभग 15-20 मिनट के बाद कबीला या वायविंडग के चूर्ण को 10 ग्राम की मात्रा के रूप में गर्म पानी के साथ पीने से आंतों के कीड़े मरकर मल के द्वारा बाहर निकल जाते हैं।
• पुराना गुड़ 60 ग्राम में 3 ग्राम कमीला को मिलाकर सेवन 3 दिन तक सेवन करने से लाभ मिलता है।
• 10 ग्राम गुड और 1 ग्राम खुरासानी अजवायन को शीतल पानी के साथ पीने से लाभ मिलता है।
• 1 चम्मच अजवायन को पीसकर चूर्ण बना लें इसको गुड़ में मिलाकर रोजाना खाने से पेट के कीड़ें मर जाते हैं।
२१) कांच, कांटा व पत्थर चुभन: शरीर के किसी भी भाग के त्वचा में यदि कांटा चुभ गया हो तो उसे बाहर निकालने के लिये गुड़ और अजवाइन गर्म करके उसे स्थान पर बांधे जहां कांटा चुभा पड़ा हो और इससे कांटा बाहर निकल जाएगा तथा दर्द भी ठीक हो जाएगा।
२२) शरीर में रसोली का बनना: आधे कप पानी में 1 चम्मच गुड़ का शीरा मिलाकर दिन में 3 बार देने से शरीर के अन्दर की रसोली, कैंसर की गांठ (फोड़ा) ठीक हो जाता है। इस प्रयोग से रक्त की गांठे पिघल जाती हैं और रोग जल्दी ठीक हो जाता है।
२३) मलेरिया का बुखार: 10 ग्राम गुड़, 3 ग्राम काला जीरा मिलाकर दिन में 4 बार 2 घण्टे के अंतर से 2-3 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से मलेरिया बुखार की अवस्था में लाभ मिलता है।
२४) बुखार:
• गुड़ की शर्बत के साथ अर्जुन पेड़ की छाल का चूर्ण सेवन करने से जीर्ण बुखार में बहुत लाभ मिलता है।
• गुड़ के साथ अजवायन खाने से कब्ज़ दूर होती है। पूरे शरीर में फैले दर्द से उत्पन्न बुखार ठीक हो जाता है।
• 10 ग्राम गुड़ के साथ 10 आंवले का चूर्ण सुबह और शाम सेवन करने से बुखार में लाभ मिलता है।
२५) एलर्जिक का बुखार: पुराने गुड़ में अदरक का रस मिलाकर सुबह और शाम पीने से शीत पित्त के एलर्जिक का बुखार में आराम मिलता है। इससे भूख न लगने की शिकायत भी दूर हो जाती है।
२६) सूखी खांसी: सूखी खांसी वाले रोगी को 15 ग्राम गुड़ के साथ 15 ग्राम सरसों के तेल मिलाकर सेवन कराएं इससे सूखी खांसी ठीक हो जाती है।
२७) मुंह की दुर्गन्ध: मूली खाने के बाद गुड़ खाने से डकार में बदबू नहीं आती है।
२८) बहरापन (सुनाई न देना): 10 ग्राम पानी में 2 ग्राम गुड़ और 2 ग्राम शुंठी के चूर्ण को अच्छी तरह मिलाकर कान में बूंद-बूंद करके डालने से बहरापन ठीक हो जाता है।
२९) खूनी अतिसार– 2 से 4 ग्राम गुड़ के साथ हरीतकी चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से खूनी अतिसार में लाभ मिलता है।
३०) नष्टार्तव (मासिकधर्म का बंद हो जाना): गुड़ के साथ काले तिल मिलाकर काढ़ा बना लें। इसे ठंडा करके पीने से बहुत समय का रुका हुआ मासिकधर्म शुरू हो जाता है।
३१) भगन्दर: पुराना गुड़, नीलाथोथा, गन्दा बिरोजा तथा सरेस इन सबको बराबर मात्रा लेकर थोड़े से पानी में घोंटकर मलहम बना लें तथा उसे कपड़े पर लगाकर भगन्दर के घाव पर रखने से कुछ दिनों में ही यह रोग ठीक हो जाता है।
३२) नहरूआ (स्यानु): नहरूआ के रोगी को कबूतर की बीट के साथ गुड़ मिलाकर देने से रोग में आराम मिलता है।
३३) नाखूनों का अन्दर की ओर बढ़ना:गन्ने के गुड़ में पिसी हुई हल्दी मिलाकर नाखून पर बांधने से दर्द व जलन में आराम मिलता है।
३४) नासूर (पुराना घाव): गुड़ में सांप की कांचली 120 मिलीग्राम मिलाकर घाव पर लगाने से घाव से खून का निकलना बंद हो जाता है।
३५) पैरों की नस फूल जाना: पैरों की नशें फूल जाने पर रोगी को एक चम्मच गुड़ शीरा एक कप पानी में मिलाकर दिन में तीन बार पीयें। इससे नसों का फूलना ठीक हो जाता है।
३६) फीलपांव (गजचर्म):
• फीलपांव के रोगी का रोग ठीक करने के लिए 10 ग्राम हल्दी का चूर्ण 20 ग्राम गुड़ में मिलाकर कांजी के साथ प्रतिदिन खायें।
• 2 से 4 ग्राम हल्दी और गुड़ को गाय के पेशाब के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से फीलपांव ठीक हो जाता है।
३७) होठों का फटना: मोम, गुड़ और राल को बराबर मात्रा में मिलाकर इसमें तेल या घी डालकर पका लें। इसको होठों पर लगाने से होठों की कठोरता और फटना ठीक हो जाता है।
३८) सिर का दर्द: लगभग 10 ग्राम गुड़ को और 5 ग्राम घी में मिलाकर सेवन करने से सिर का दर्द दूर हो जाता है।
३९) बालरोग हितकर: अगर बच्चे को जल्दी बढ़ाना हो, तो गु़ड़ और प्याज को मिलाकर कुछ दिन तक खिलायें। अगर बच्चे की चेतन्यता (दिमागी शक्ति) बढ़ानी हो तो मक्खन और छुहारे खिलायें।
४०)पैर का फटना: अगर पैर फट गये हों तो औरत का दूध, गुड़, घी, शहद और गेरू बराबर मात्रा में लेकर लेप बना लें और इसे पैर के फटे हुए स्थान पर लगाएं इससे पैर कमल और मुलायम हो जायेंगें।
४१) सफेद प्रदर: 2 ग्राम पुराना गुड़ रोजाना सुबह-शाम सेवन करने से सफेद प्रदर ठीक हो जाता है।
४२) यकृत का बढ़ना: 1.5 ग्राम पुराना गुड़ और बड़ी (पीली) हरड़ के छिलके का चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर गोली बनायें और यह गोली दिन में 2 बार सुबह-शाम हल्के गर्म पानी के साथ 1 महीने तक लें। इससे यकृत (लीवर) और प्लीहा (तिल्ली) यदि दोनों ही बढे़ हुए हों तो यह रोग ठीक हो जाता है।
४३) शीतपित्त: गुड़ के साथ अदरक का रस 1 चम्मच से 2 चम्मच की मात्रा में सेवन करें। इसके 2 से 3 मात्रायें प्रतिदिन सेवन करें। इससे शीत-पित्त रोग ठीक हो जाता है।
४४) गिल्टी (ट्यूमर): गुड़ में 10-10 ग्राम गुगल और सुहागा एक साथ मिलाकर गिल्टी पर लेप करने से लाभ मिलता है।
४५) गुल्म: गुड़, भांरगी और छोटी पीपल को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर छान लें। इस चूर्ण को 2 से 4 ग्राम तक की मात्रा में काले तिलों के काढ़े के साथ सेवन करने से खूनी गुल्म ठीक हो जाते हैं।
४६) पेशाब करने में रुकावट: 10 ग्राम गुड़ और एक चम्मच कच्ची अजवाइन 15 दिन तक खाने से पेशाब के रोग दूर होते हैं।
४७) खाज-खुजली: जिन व्यक्तियों को रक्त विकार (खून मे खराबी) हो उन्हे चाय, दूध, लस्सी आदि में चीनी की जगह गुड़ का सेवन करना चाहिये। ऐसा करने से खून साफ होकर खुजली दूर होती है।
भोजन के बाद गुड़ खाने से भोजन को गुड़ पचाता है और चीनी खाने से भोजन पचने के बाद उत्प्पन शक्ति से चीनी को पचाना पड़ता है
गुड़ खाने के नुकसान : गुड़ का अधिक मात्रा में सेवन करना गर्म प्रकृति वाले व्यक्तियों के लिए हानिकारक हो सकता है। बसन्त ऋतु में गुड़ नहीं खाना चाहिए क्योंकि इस मौसम में इसका सेवन हानिकारक हो सकता है। पित्त प्रकृति वालों को भी नया गुड़ कभी नहीं खाना चाहिए। मोटापन, बुखार, भूख कम लगना, जुकाम और मधुमेह आदि रोगों की अवस्था में गुड़ नहीं या कम खाना चाहिए या खाने के बाद निम्बू का उपयोग या त्रिफला,दालचिनी या आँवला के साथ करना चाहिए। उड़द, दूध के साथ कभी भी गुड़ का सेवन साथ में नहीं करना चाहिए उसके पहले या बाद में करना उत्तम होता है।Contact for more information +91-9729510363
Sunday, November 6, 2022
प्रदूषण (जहरीली हवा) से बचने के उपाय
1-खाना खाने के बाद थोड़ा सा गुड़ जरूर खाएं गुड़ खून साफ करता है। इससे आप प्रदूषण से बचे रहेंगे।
-फेफड़ों को धूल के कणों से बचाने के लिए आप रोजाना एक गिलास गर्म दूध जरूर पियें।
2.-अदरक का रस और सरसों का तेल नाक में बूंद-बूंद कर डालने से भी आप हानिकारक धूल कणों से भी बचे रहेंगे!
- खुद को प्रदूषण के प्रभाव से बचाने के लिए आप ज्यादा से ज्यादा पानी का सेवन करें।
- शहद में काली मिर्च मिलाकर खाएं, आपके फेफड़े में जमी कफ और गंदगी बाहर निकल जाएगी।
3.-अजवायन की पत्तियों का पानी पीने से भी व्यक्ति का खून साफ होने के साथ शरीर के भीतर मौजूद दूषित तत्व बाहर निकल जाते हैं।
4.-तुलसी प्रदुषण से आपकी रक्षा करती है, इसलिए रोजाना तुलसी के पत्तों का पानी पीने से आप स्वस्थ बने रहेंगे।
-ठंडे पानी की जगह गर्म पानी का सेवन करना शुरू कर दें।
Measures to avoid pollution (poisonous air)
After eating food, definitely eat a little jaggery, jaggery purifies the blood. This will save you from pollution.
To protect the lungs from dust particles, you must drink a glass of warm milk daily.
2. By putting ginger juice and mustard oil drop by drop in the nose, you will also be saved from harmful dust particles!
To protect yourself from the effects of pollution, drink more and more water.
Eat black pepper mixed with honey, the phlegm and dirt in your lungs will come out.
3. By drinking water from oregano leaves, along with purifying the blood of the person, the contaminants present inside the body come out.
4.-Tulsi protects you from pollution, so drinking water of basil leaves daily will keep you healthy.
Start drinking hot water instead of cold water.
रसेन्द्र चूड़ामणि रस(अक्सीरी योग)
रसेन्द्र
चूड़ामणि रस पुरातन आयुर्वेद का अक्सीरी योग है।जिस को पुराने समय में
राजे, महाराजे,अमीर लोग लेते थे और उनके संबन्ध अनेक औरतों से बने रहते
थे।यह योग आप को अपना प्रभाव तुरन्त ही दिखाता है।
यह योग आयुर्वेद के
शक्तिशाली प्रसिद्ध योगों में से एक योग है।जिस का आप एक महीना सेवन करने
से आप के शरीर की सभी कमजोर धातु की पूर्ति हो जाती है।
नामर्द,तनाव की
कमी,शीघ्रपतन,इच्छा में कमी, वीर्य की कमी,शुगर की समस्या, घुटनो में दर्द
आदि बहुत से रोगों को जड़ से खत्म करने की ताकत रखता है।
जिन को कोई समस्या या परेशानी नही है या वोह लोग जो एक से ज्यादा औरतों में रुचि रखते है।इस योग का इस्तमाल कर सकते है।
इस योग से आप लम्बा समय तक जवानी की मौज मान सकते हो।
इस योग को कुछ दिन ही लेने से नया जोश,जवानी,चेहरे पर नूर,शरीर में चुस्ती फुर्ती लोट आती है,,आखों में अजीव सी चमक दिखती है।
रसेन्द्र चूड़ामणि रस योग को आप जितनी मेहनत,और लगन से बनायेगे यह उतना ही प्रभावशाली होगा।
इस योग को आप किसी अच्छे भारोसेयोग वैद,हकीम से बना सकते हो।
इस योग की बनाने की विधि इस प्रकार है।
शुद्ध पारद भस्म 1 भाग
स्वर्ण भस्म 2 भाग
नाग भस्म 100 पुत्ती 3 भाग
अभ्रक भस्म 1000 पुत्ती 4 भाग
बंग भस्म 5 भाग
अतुल शक्ति दाता योग 164 पुती 6 भाग
चांदी भस्म 7 भाग
स्वर्ण माक्षिक 8 भाग
इन
सब को मिला कर धतूरे के पतों के रस और भांग के पतों के रस में तीन दिन खरल
करें!। फिर मघाँ, गिलोय, भड़िंगी, अंबरबेल, खस, नागरमोथा, शुद बचनाग,
मुलठी, शतावर, कौंच के रस जा काड़े की सात- सात भावना देवें। जब सारी दवाई
सूख जाये तो इसके कुल वजन की आधी शुद्ध अफीम मिला कर । तुलसी और पान के
पत्तो के रस में घोटकर 1-1 रत्ती की गोलियां बना कर छाया में सुखा लें I
सूखने के बाद इन गोलियों को किसी कांच की शीशी में भर कर रख ले। आप का
महाशक्तिशाली अक्सिरी रसेन्द्र चूड़ामणि रस त्यार है।
For More Information 9729510363
The harder you make Rasendra Chudamani Ras Yoga, the more effective it will be.
You can make this yoga with any good Bharoseyoga Vaid, Hakeem.
The method of making this yoga is as follows.
Pure Parad Bhasma 1 part
Swarna Bhasma 2 parts
Nag Bhasma 100 Putti 3 parts
Abhrak Bhasma 1000 Putti 4 parts
Bang Bhasma 5 parts
Atul Shakti Data Yoga 164 Puti 6 Parts
Chandi Bhasma 7 parts
Swarna Makshik 8 parts
Mix all these and mix it with the juice of datura leaves and the juice of hemp leaves for three days. Then go to the juice of Maghan, Giloy, Bhadingi, Amberbell, Khas, Nagarmotha, Shud Bachnag, Multhi, Shatavar, Kaunch and give seven spirits of Kada. When all the medicine dries up, add half of its total weight to pure opium. Make 1-1 ratti tablets by mixing them in the juice of basil and betel leaves and dry them in the shade. After drying, keep these tablets in a glass vial. Your superpowerful Aksiri Rasendra Chudamani Ras is ready. (GB)
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Saturday, July 2, 2022
चश्मा हटाने का उपचा
चश्मा हटाने का उपचार
ज्यादा देर तक कंप्यूटर पर काम करते हुए या किताब, टीवी देखते हुए आंखे दर्द करने लगती है तो यह खतरे की घंटी हो सकती है। ऎसे में आंखों की रोशनी कमजोर होने से आपकी आंखों पर चश्मा चढ़ जाता है।
चश्में से छुटकारा पाने के लिये कुछ घरेलू उपाय जिनसे आसानी से चश्मे से छुटकारा मिलेगा।
हथेली
अपनी दोनों हथेलियों को आपस में रगड़े, जिससे गर्मी पैदा होगी।
फिर आंखे बंद करके हथेलियों को आंखों पर रखें।
ध्यान रहें आंखों पर हाथ रखते पर रोशनी बिल्कुल ना आएं।
दिन में ऎसा 3-4 बार करें।
कालीमिर्च
दो चुटकी कालीमिर्च पाउडर में एक चम्मच शहद मिलाकर मिश्रण तैयार कर लें और रोजाना इसका सेवन करें।
इससे आंखों की रोशनी बेहतर होती है और चश्मे से छुटकारा मिलता है।
चीनी और धनिया की आई ड्रॉप
तीन भाग धनिया के साथ एक भाग चीनी मिक्स करें।
दोनों को पीसकर पेस्ट बना लें।
फिर इसे पानी में गर्म करें और एक घंटे के लिए कवर करके रख दें।
फिर एक साफ कॉटन का कपड़ा लेकर इस मिश्रण को छान लें और आंखों में आई ड्रॉप की तरह इस्तेमाल करें।
भरपूर नींद
आधुनिक लाइफस्टाइल में अनिद्रा की समस्या बहुत कॉमन है।
अगर पूरी नींद नहीं लेंगे तो इसका असर आंखों पर भी पड़ेगा।
जिससे आंखों के नीचे डार्क सर्कल्स तो होंगे ही, साथ ही आंखों की रोशनी भी कम होगी। इसलिए एक दिन में 7-9 घंटे की नींद बहुत जरूरी है।
एक्सरसाइज
चश्मा हटाने का सबसे कारगर उपाय है आंखों की एक्सरसाइज।
रोज आंखों की एक्सरसाइज करने से आंखे मजबूत होती है और आंखों की रोशनी भी बेहतर होती है।
अगर रोज आंखों की एक्सरसाइज करें तो इससे आपका चश्मा भी हट सकता है।
तांबे के बर्तन में रखा पानी
एक लीटर पानी को तांबे के जग में रात भर के लिए रख दें और सुबह उठकर इस पानी को पीएं।
तांबे में रखा पानी शरीर विशेषकर आंखों को बहुत फायदा पहुंचाता है।
शहद
बादाम को गर्म पानी में कुछ देर रखें, फिर गल जाने पर इसके छिलके उतार दें और इसमें एक चम्मच शहद मिला लें।
इस मिश्रण को रोज खाएं, इससे कमजोर आंखे ठीक होती है और आंखों की रोशनी बढ़ती है।
सूर्य की रोशनी
सूर्य की रोशनी आंखों के लिए बहुत लाभदाक है।
इससे आंखों के लेंस और सिलिअरी मांसपेशियों को रिएक्टिवेट होती है।
इसके लिए रोज कुछ मिनट बंद आंखों पर धूप सेंके। इससे आंखों की रोशनी तेज होती है।
ड्राई फ्रूट्स
रातभर 6-7 बादाम, 15 किशमिश और दो अंजीर पानी में भिगोकर रखें और फिर अगली सुबह इन्हें खाली पेट खा लें।
इसमें पाए जाने वाले फाइबर और विटामिन से आंखों की रोशनी तेज होती है।
सौंफ का शर्बत
सौंफ का शर्बत
पेट की समस्याओं के लिए पिएं एक्सपर्ट का बताया ये सौंफ का शर्बत
अगर आपको पेट ठंडा करने के लिए कुछ अच्छी ड्रिंक पीनी है तो सौंफ का शर्बत बहुत अच्छा साबित हो सकता।
गर्मियों का मौसम शुरू हो गया है और इस मौसम में जितना पेट को ठंडा रखा जाए उतना ही अच्छा होता है। गर्मियों के मौसम में अक्सर हम पेट से जुड़ी कई समस्याओं से दो-चार होते हैं। अगर देखा जाए तो ये मौसम कई लोगों को काफी समस्याएं दे देता है।
गैस, अपच, उल्टी, दस्त आदि बहुत सारी समस्याएं सिर्फ पेट में गर्मी बढ़ने के कारण हो सकती हैं।
ऐसे में क्यों न पेट को ठंडा करने के लिए कोई उपाय कर लिया जाए?
आयुर्वेद में पेट को ठंडा करने के लिए सौंफ का शर्बत पीने को कहा गया है। आयुर्वेदिक डॉक्टर दीक्षा भावसार (BAMS) ने भी इसके बारे में जानकारी दी है। डॉक्टर दीक्षा ने इस शर्बत के फायदे के बारे में बताया कि पेट की गर्मी को शांत करने के लिए ये शर्बत काफी उपयोगी साबित हो सकता है।
सौंफ के शर्बत से होते हैं ये फायदे-
सौंफ के शर्बत से आप पेट की गर्मी शांत कर सकते हैं
सौंफ में फ्लैवोनॉइड्स होते हैं जो सलाइवा का फ्लो ठीक रखते हैं जिससे मुंह नहीं सूखता।
ये मुंह की दुर्गंध को भी ठीक करता है।
सौंफ का शर्बत
सौंफ को अक्सर खाना खाने के बाद इस्तेमाल किया जाता है और इसे माउथ फ्रेशनर का काम लिया जाता है, लेकिन यकीन मानिए सौंफ का काम बहुत हद तक मुंह के स्वास्थ्य को ठीक रखना है।
ये काफी अरोमैटिक होती है और इसलिए ये मुंह की दुर्गंध से काफी अच्छे से लड़ती है। इसे आप दिन में कई बार ऐसे ही खा सकते हैं, लेकिन सौंफ का शर्बत खासतौर पर आपके पेट के लिए होता है जो पेट की कई समस्याओं का इलाज बन सकता है।
पर आखिर ये सौंफ का शर्बत बनाया कैसे जाए?
इसके लिए भी डॉक्टर दीक्षा ने रेसिपी बताई है.!
सामग्री-
2 चम्मच सौंफ का पाउडर
थोड़ी सी मिश्री
2 ग्लास पानी
पुदीना, इलाइची (ऑप्शनल)
बस इस शर्बत को बनाना इतना ही आसान है।
आपको मिश्री अपने स्वादानुसार लेनी होगी।
आप इन सभी चीज़ों को अच्छे से मिलाएं और आपकी ड्रिंक तैयार है।
अगर आपके पास पहले से ही सौंफ का पाउडर मौजूद है तो इसे पूरा बनाने में आपको सिर्फ 5 मिनट ही लगेंगे!
पानी ठंडा लीजिए तो ज्यादा राहत मिलेगी और इसे दोपहर के खाने के बाद गर्मियों में लिया जा सकता है।
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